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just take 8 months to wipe out 7 years of foreign investments in indian equities prdm

बाजार से मोहभंग! महज 8 महीने में खत्‍म हो गया 7 साल का विदेशी निवेश, FPI ने की रिकॉर्ड धन निकासी

मई में ही अब तक 35 हजार करोड़ की निकासी विदेशी निवेशक कर चुके हैं.

मई में ही अब तक 35 हजार करोड़ की निकासी विदेशी निवेशक कर चुके हैं.

विदेशी निवेशकों की भारतीय शेयर बाजार से धन निकासी का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा. आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले साल अक्‍तूबर से अब तक जितनी राशि की निकासी विदेशी निवेशक कर चुके हैं, उतना पैसा भारतीय बाजार में आने में 2014 से 2020 तक का समय लगा था.

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नई दिल्‍ली. भारतीय शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव में बड़ी भूमिका निभाने वाले विदेशी निवेशकों का अब मोहभंग हो रहा है. इसकी बानगी शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों की लगातार हो रही निकासी दे रहे हैं. आलम यह है कि जितना विदेशी निवेश पिछले 7 साल में आया था, उतना महज 8 महीने में खत्‍म हो चुका है.

मनीकंट्रोल के मुताबिक, नेशनल सिक्‍योरिटी डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) ने हाल में आंकड़े जारी कर बताया कि विदेशी निवेशकों ने अक्‍तूबर, 2021 से अब तक भारतीय पूंजी बाजार से 2.5 लाख करोड़ रुपये यानी करीब 32 अरब डॉलर निकाले हैं. यह शेयर बेचकर पैसे निकालने का अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है, जो इतने कम समय में इतनी बड़ी राशि की निकासी की गई है.

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आंकड़ों पर गौर करें तो साल 2014 से 2020 तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में 2.2 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया है. NSDL ने बताया कि साल 2010 से 2020 तक बाजार को कुल 4.4 लाख करोड़ रुपये का विदेशी निवेश मिला है, जबकि अक्‍तूबर से अब तक महज आठ महीने में ही इसकी आधी से ज्‍यादा रकम निकाली जा चुकी है.

इन कारणों से हो रहा मोहभंग

विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार से पूंजी निकालने का सबसे बड़ा कारण महंगाई भी है. दरअसल, इस दौरान दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों ने अपनी ब्‍याज दरों में इजाफा किया है और पश्चिमी देशों में महंगाई दर भी कई दशक के शीर्ष पर पहुंच गई है. साथ ही रूस-यूक्रेन सहित तमाम देशों के बीच चल रहे तनाव की वजह से भी विदेशी निवेशकों को अपनी पूंजी डूबने का खतरा महसूस हो रह है, जिससे वे बिना कुछ सोचे-समझे भारतीय बाजार से पैसे निकाल रहे हैं.

विदेशी निवेशकों की ओर से पैसे निकालने का सिलसिला सिर्फ भारतीय बाजार में ही नहीं चल रहा है, बल्कि दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसी उभरती अर्थव्‍यवस्‍थाओं को भी इस चुनौती का सामना करना पड़ रहा है. साल 2022 में ही विदेशी निवेशकों ने ताइवान के शेयर बाजार से 28 अरब डॉलर और दक्षिण कोरिया से 12.8 अरब डॉलर की निकासी की है.

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घरेलू और खुदरा निवेशकों ने थामा बाजार

अक्‍तूबर से अब तक अमेरिका, चीन और यूरोप के बाजारों में बड़ी गिरावट आ चुकी है, जबकि इस दौरान भारत का बड़ा बेंचमार्क निफ्टी महज 8 फीसदी टूटा है. बाजार को ढहने से बचाने का पूरा क्रेडिट घरेलू संस्‍थागत और खुदरा निवेशकों को जाता है. वित्‍तमंत्री निर्मला सीतारमण भी खुदरा निवेशकों को शॉक अब्‍जॉर्बर बता चुकी हैं. ऐसा इसलिए है क्‍योंकि 2021 और 2022 में जहां विदेशी निवेशकों ने 2.2 लाख करोड़ रुपये बाजार से निकाले हैं, वहीं खुदरा निवेशकों ने 2.1 करोड़ रुपये की खरीदारी की है.

शेयर बाजार के अलावा म्‍यूचुअल फंड में भी खुदरा निवेशकों ने जमकर पैसे लगाए हैं और म्‍यूचुअल फंड की कुल संपत्तियों में खुदरा निवेशकों की हिस्‍सेदारी 55 फीसदी पहुंच गई है. साल 2021 और 2022 में खुदरा निवेशकों ने 1.1 लाख करोड़ रुपये म्‍यूचुअल फंड में लगाए हैं.

Tags: Foreign investment, Investment, Nifty50, Share market

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