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काम की बात : सोना सस्‍ता होने से गोल्‍ड लोन पर क्‍या पड़ता है असर? कर्जधारकों के लिए कैसे मुसीबत बन सकती है गिरावट

सोने की कीमत का 60-70 फीसदी तक ही कर्ज लेना चाहिए.

सोने की कीमत का 60-70 फीसदी तक ही कर्ज लेना चाहिए.

गोल्‍ड लोन लेने वालों के लिए सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव काफी मायने रखता है. इससे आपके एलटीवी यानी सोने के अनुपात में कर्ज की राशि पर असर पड़ता है. अगर बैंक को लगता है कि मौजूदा गिरावट आपके एलटीवी पर घाटा करा रही है तो जोखिम कम करने के लिए बैंक आपसे तत्‍काल कुछ हिस्‍सा जमा करा सकते हैं या और सोना गिरवी मांग सकते हैं.

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नई दिल्‍ली. सस्‍ता सोना खरीदना हर किसी की चाह रहती है, लेकिन कुछ लोगों के लिए इसकी कीमतों में गिरावट आना मुसीबतें बढ़ाने वाला होता है. आजकल गोल्‍ड लोन सस्‍ता और पैसों की तत्‍काल जरूरत पूरी करने वाला विकल्‍प माना जाता है. लेकिन, अगर सोने की कीमत घटती है तो इस पर लोन लेने वालों के लिए संकट पैदा हो सकता है.

दरअसल, रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के समय ग्‍लोबल सप्‍लाई बाधित होने पर सोने की कीमतें उछलकर 57 हजार के आसपास पहुंच गईं थी. इस दौरान गोल्‍ड लोन लेने वालों को बैंकों या एनबीएफसी से कर्ज एवं सोने के मूल्य का अनुपात (एलटीवी) ज्‍यादा मिला. तीन महीने बाद जून में सोने की कीमत घटकर 51 हजार के आसपास आ गई है. यानी कीमतों में करीब 6 हजार रुपये की गिरावट है. इससे लोन की एलटीवी पर भी असर पड़ेगा.

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इसका मतलब है कि गिरावट से न सिर्फ सोने के अनुपात में कम कर्ज मिलेगा, बल्कि एलटीवी को बनाए रखने के लिए बैंक या अन्य कर्जदाता किसी भी समय मौजूदा कर्जधारक से लोन के पूरे या कुछ हिस्से के अग्रिम भुगतान करने के लिए कह सकते हैं. भुगतान का हिस्सा कर्जदाता और ग्राहक को संबंधों एवं कर्ज की अवधि पर निर्भर करता है.

ज्यादा गिरवी मांग सकते हैं बैंक
बैंकिंग विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सोने में गिरावट ऐसे ही जारी रही तो एलटीवी भी बढ़ता जाएगा, जिससे कर्जदाता के लिए कर्ज पर जोखिम बढ़ जाएगा. ऐसे में करार के तहत कर्जदाता को यह अधिकार है कि वह एलटीवी को पूर्व स्तर पर लाने यानी जोखिम कम करने के लिए कर्जधारक से अग्रिम भुगतान करने या अतिरिक्त गिरवी रखने को कह सकता है.

मुथटूट फाइनेंस के अनुसार, अमूमन ग्राहकों से अग्रिम भुगतान करने को नहीं कहा जाता है, क्योंकि कर्जदाता पर्याप्त मार्जिन रखकर चलते हैं. हालांकि, बड़ी गिरावट जैसे हालात में मार्जिन को देखते हुए कर्जदाता के पास कर्ज वापस लेने का अधिकार होता है. सबसे पहले ग्राहकों से अग्रिम भुगतान या अतिरिक्त गिरवी रखने को कहा जाता है. इसमें नाकाम होने पर कर्जदाता गिरवी रखा सोना बेच भी सकता है.

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ऐसे समझें एलटीवी घटने-बढ़ने का गणित
मान लीजिए, आपने जब कर्ज लिया तो सोने की कीमत 57 हजार रुपये थी. इस पर आपको 45 हजार रुपये का कर्ज मिल गया. अब कीमतें घटने से आपके सोने की कीमत घटकर 50 हजार रुपये रह गई तो इस हिसाब से एलटीवी भी घट जाना चाहिए. यानी लोन राशि के रूप में आपके पास कम रकम होनी चाहिए. ऐसे में बैंक अपने घाटे को पाटने के लिए आपसे कुछ राशि तत्‍काल चुकाने को कह सकता है.

ऐसी स्थिति से बचने के लिए ग्राहकों को अपने गोल्‍ड की कीमत का 60-70 फीसदी कर्ज लेना चाहिए, ताकि एक बड़ा मार्जिन बना रहे. ऐसा करने से गोल्‍ड की कीमतों में गिरावट का कर्ज पर खास असर नहीं पड़ता है.

Tags: Business news in hindi, Gold Loan, Gold price, Tips and Tricks

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