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इस बैंक के एडमिनिस्ट्रेटर पैनल हुए बर्खास्त, घोटाले के बाद लिया गया है एक्शन

इस बैंक के एडमिनिस्ट्रेटर पैनल हुए बर्खास्त, घोटाले के बाद लिया गया है एक्शन

बैंक की शुरुआत 1921 में हुई थी

बैंक की शुरुआत 1921 में हुई थी

बैंक के अधिकारियों और स्थानीय रियल एस्टेट माफिया के गठजोड़ ने पहले से गिरवी रखी प्रॉपर्टीज पर नए लोन लेकर जालसाजी की थी.

    नई दिल्ली. रजिस्ट्रार ऑफ को-ऑपरेटिव सोसाइटीज ने केरल के करुवन्नूर  को-ऑपरेटिव बैंक के
    एडमिनिस्ट्रेटर पैनल को भंग कर दिया. यह फ़ैसला यहां हुए घोटाले के बाद लिया गया है. इस एक्शन के बाद रजिस्ट्रार ऑफ को-ऑपरेटिव सोसाइटीज ने इसके लिए एक एडमिनिस्ट्रेटर नियुक्त किया है जो Karuvannur को-ऑपरेटिव बैंक के प्रति दिन के कामकाज की निगरानी करेगा. इस घोटाले की विभिन्न एजेंसियों की ओर से जांच की जा रही है. मालूम हो इस मामले में मनीकंट्रोल ने गुरुवार को रिपोर्ट दी थी कि बैंक में लगभग 100 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है. बैंक के अधिकारियों और स्थानीय रियल एस्टेट माफिया के गठजोड़ ने पहले से गिरवी रखी प्रॉपर्टीज पर नए लोन लेकर जालसाजी की थी.

    बैंक के कर्जदार ने की थी आत्महत्या

    इस बीच बैंक के एक कर्जदार ने लोन बकाया होने का नोटिस मिलने पर कथित तौर पर आत्महत्या कर ली है. उनके परिवार ने आरोप लगाया है कि लोन की वास्तविक राशि 25 लाख रुपये थी और बैंक ने उनसे 80 लाख रुपये चुकाने को कहा था. इसमें वह लोन भी शामिल था जिसके लिए कर्जदार ने गारंटी दी थी. हालांकि, बैंक ने इस तरह का नोटिस भेजने से इनकार करते हुए कहा है कि यह मृत्यु बैंक से नहीं जुड़ी.

    बैंक की शुरुआत 1921 में हुई थी

    हाल के दिनों तक Karuvannur को-ऑपरेटिव बैंक की स्थानीय तौर पर अच्छी साख थी। इसके पास 290 करोड़ रुपये का डिपॉजिट और लगभग 270 करोड़ रुपये की लोन बुक थी. बैंक पर वाम दलों का नियंत्रण है और इन दलों के सदस्य इसके एडमिनिस्ट्रेटिव पैनल में शामिल थे. बैंक की वेबसाइट के अनुसार इसकी पांच शाखा और त्रिसुर में एक एक्सटेंशन काउंटर है. बैंक की शुरुआत 1921 में हुई थी और इसके डायरेक्टर बोर्ड में 13 सदस्य हैं. बोर्ड के अध्यक्ष के के दिवाकरण हैं, जो एक स्थानीय सीपीएम नेता हैं.

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    फर्जी कर्ज, 46 खाते: कैसे हुआ फ्रॉड

    सहकारी समितियों के संयुक्त रजिस्ट्रार द्वारा ऑडिट में पाया गया कि इन संपत्ति दस्तावेजों का इस्तेमाल बैंक अधिकारियों, निदेशक बोर्ड के सदस्यों और स्थानीय रियल एस्टेट माफिया से संबंधित कुछ व्यक्तियों के गठजोड़ द्वारा फिर से उधार लेने के लिए अवैध रूप से किया गया था. बैंक में पहले से ही गिरवी रखे गए संपत्ति के उन्हीं दस्तावेजों का उपयोग करके और नकली हस्ताक्षर और लेटर हेड का उपयोग करके ऋण लिया गया था. स्थानीय रिपोर्टों में कहा गया है कि प्रारंभिक अनुमानों से पता चलता है कि 46 दस्तावेज गिरवी रखे गए थे और पैसा अलग-अलग खातों में जमा किया गया था. पूरा विवरण ज्ञात नहीं है. मनीकंट्रोल द्वारा करुवन्नूर बैंक को भेजे गए एक ईमेल प्रश्नावली का कोई जवाब नहीं मिला.

    Tags: Bank news, Business news in hindi

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