जब जम्मू-कश्मीर में हर आदमी पर खर्च हो रहे थे 92 हजार, तब यूपी में सिर्फ 4300 रुपये!

दूसरे राज्य हाशिए पर, जम्मू-कश्मीर पर पैसा लुटाती रहीं सरकारें, देश की सिर्फ एक फीसदी आबादी के लिए मिलती रही 10 परसेंट केंद्रीय ग्रांट

News18Hindi
Updated: August 6, 2019, 12:53 PM IST
जब जम्मू-कश्मीर में हर आदमी पर खर्च हो रहे थे 92 हजार, तब यूपी में सिर्फ 4300 रुपये!
जम्मू-कश्मीर में सबसे ज्यादा है प्रति व्यक्ति सरकारी खर्च!
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Updated: August 6, 2019, 12:53 PM IST
यह कोई कहावत नहीं है बल्कि सच है कि जम्मू-कश्मीर पर देश के किसी भी राज्य से बहुत अधिक पैसा खर्च होता है. कितना खर्च होता है यह हम आपको बता रहे हैं. आपके टैक्स का ज्यादातर हिस्सा इसी राज्य में खर्च किया जा रहा था. जम्मू-कश्मीर की आबादी भारत की कुल जनसंख्या की सिर्फ एक फीसदी है, लेकिन वहां पर कुल केंद्रीय बजट का 10 फीसदी हिस्सा दिया जा रहा था. उधर, उत्तर प्रदेश जहां देश के 13 फीसदी लोग रहते हैं वहां पर सिर्फ 8.2 प्रतिशत केंद्रीय ग्रांट मिलती थी.

एक रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र सरकार ने 2000 से 2016 के बीच हर कश्मीरी पर औसतन 92 हजार रुपये खर्च किए जबकि यूपी के लोगों पर सिर्फ 4300 रुपये ही खर्च हुए. 1991-92 में जब देश में प्रति व्यक्ति खर्च 576 रुपये था तब जम्मू-कश्मीर के लोगों पर 3197 रुपये खर्च किए जा रहे थे. इसी तरह 2001-02 में जब देश में प्रति व्यक्ति खर्च 1137 रुपये था तब जम्मू-कश्मीर में 8092 रुपये खर्च हो रहे थे. सूत्रों का कहना है कि इस समय जेएंडके में 14,255 रुपये प्रति व्यक्ति आवंटित किया जा रहा है, जबकि राष्ट्रीय औसत सिर्फ 3,681 रुपये है.

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पिछले 16 साल में जम्मू-कश्मीर पर 1.4 लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए. यह विशेष दर्जे वाले अन्य दस राज्यों के मुकाबले 25 फीसदी ज्यादा था. 70 साल में चार लाख करोड़ रुपये से ज्यादा पैसा सिर्फ कश्मीर में खर्च हुआ. यही नहीं अलगाववादियों की सुरक्षा पर सालाना करीब सौ करोड़ रुपये खर्च हुए. इसका 90 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार ही उठा रही थी. जम्मू-कश्मीर सरकार सिर्फ 10 फीसदी ही देती थी.

पूरी तरह से नहीं हटाया गया है आर्टिकल 370
आर्टिकल 370 पूरी तरह से नहीं हटाया गया है. तीन भागों में बंटे इस आर्टिकल का सिर्फ भाग 2 और 3 हटाया गया है.  संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप का कहना है कि ये कहना गलत होगा की धारा 370 को हटाया गया है, बल्कि संशोधन किया गया है.  सरकार का फैसला ऐतिहासिक और साहसपूर्ण है. उनका कहना है कि चुनौती तो किसी भी फैसले को दी जा सकती है,  लेकिन मुझे लगता है की सरकार का फैसला संवैधानिक है और किसी तरह की कमी नहीं है. सरकार का पक्ष मजबूत है.

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First published: August 6, 2019, 12:03 PM IST
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