सिक्योरिटी देकर लिया गया लोन क्या है? क्या आपको ये Loan लेना चाहिए या नहीं?

सिक्योरिटी लेकर दिए गए लोन से लोनदाता के पास वह पैसा ब्याज सहित वापस आ जाता है.
सिक्योरिटी लेकर दिए गए लोन से लोनदाता के पास वह पैसा ब्याज सहित वापस आ जाता है.

शेयर और इक्विटी म्यूचुअल फंड जैसे इक्विटी इन्वेस्टमेंट्स से कोई 50 फीसदी मूल्य तक की वैल्यू ले सकता है. इसके अलावा डेब्ट म्यूचुअल फंड और फिक्स्ड इनकम सिक्योरिटी से 80 से 85 फीसदी तक की राशि प्राप्त की जा सकती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 21, 2020, 2:25 PM IST
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नई दिल्ली. सिक्योरिटी जमा कराकर लोन लेना ऐसा ऑप्शन है जिससे लोन के पैसे आसानी से मिल जाते हैं. लोन देने वाली कम्पनी या बैंक बीमा पॉलिसी, म्यूचुअल फंड आदि लेकर ग्राहक को लोन की राशि देते हैं. इस प्रकार के लोन को 'Collateral backed loan या secured loan कहते हैं. लोन लेने वाला व्यक्ति गारंटी के रूप में जो चीज देता है, वह वास्तविक संपत्ति (Real Property) या फिजिकल रूप में मौजूद संपत्ति होनी चाहिए. इसके अलावा संपत्ति (Property) के क़ानूनी कागजात भी मौजूद होने चाहिए, जिन्हें लोनदाता बैंक या कम्पनी अपने पास रख सके.

स्मार्टकॉइन के सह-संस्थापक और सीईओ रोहित गर्ग कहते हैं कि शेयर और इक्विटी म्यूचुअल फंड जैसे इक्विटी इन्वेस्टमेंट्स से कोई 50 फीसदी मूल्य तक की वैल्यू ले सकता है. इसके अलावा डेब्ट म्यूचुअल फंड और फिक्स्ड इनकम सिक्योरिटी से 80 से 85 फीसदी तक की राशि प्राप्त की जा सकती है.

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लोन देने वालों को इससे क्या फायदा होगा?
सहयोगी वेबसाइट CNBC TV 18 की रिपोर्ट के अनुसार मनीटैप के CBO और सह-संस्थापक कुनाल वर्मा कहते हैं कि सिक्योरिटी लेकर दिए गए लोन से लोनदाता के पास वह पैसा ब्याज सहित वापस आ जाता है. अगर पैसा नहीं आता है, तो सिक्योरिटी से उस पैसे की भरपाई कर ली जाती है. डीफ़ॉल्ट लोन के रूप में यह भरपाई होती है. दूसरी तरफ बिना सिक्योरिटी के लोन देने पर उधारकर्ता की चुकाने की क्षमता और चुकाने के इरादे से पहले क्रेडिट मूल्यांकन किया जाता है.

क्या यह लोन ग्राहकों को लेना चाहिए?
विशेषज्ञ लोन के लिए क्रेडिट एक्सेस के साथ लोन के लिए जाने का सुझाव देते हैं. कुनाल वर्मा कहते हैं कि क्रेडिट लाइन के आधार पर ग्राहक लोन लेकर उसी राशि का ब्याज चुका सकता है. यह अफोर्डेबल, फ्लेक्सिबल और सुविधाजनक तरीका है, इसमें बिना पाबंदी के आसानी से राशि को चुकाया जा सकता है. वर्मा आगे कहते हैं, कि अगर यह विकल्प ग्राहक के पास नहीं है और अन्य सभी विकल्प भी बंद हो गए हैं, तभी सिक्योरिटी जमा कराकर लोन लेना चाहिए. संपत्ति और सिक्योरिटी दोनों में से सिक्योरिटी पर लोन लेना ज्यादा सही है.

रोहित गर्ग कहते हैं कि सिक्योरिटी पर लोन लेने पर KYC, सिक्योरिटी की नई कॉपी और इसके अधिकार के दस्तावेज जमा कराने होते हैं, जबकि प्रोपर्टी पर लोन लेते समय दस्तावेजों की एक लम्बी सूची होती है. सिक्योरिटी लोन पर कोई फॉर-क्लोजर शुल्क भी नहीं होता. अगर प्रोपर्टी पर लिए गए लोन को समय से पहले देना चाहें, तो आपका बैंक 2 फीसदी ब्याज चार्ज करेगा.

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ग्राहक जिस भी विकल्प के तहत लोन लेते हैं, उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि लोन देने वाली संस्था सही और प्रतिष्ठित है, जल्दी और तुरंत लोन देने का दावा करने वालों के झांसे में कभी नहीं आना चाहिए.
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