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टैक्स बचाने और FD से ज्यादा मुनाफे के लिए हिट हैं म्यूचुअल फंड्स स्कीम

टैक्स बचाने और FD से ज्यादा मुनाफा के लिए हिट हैं म्यूचुअल फंड्स स्कीम

टैक्स बचाने और FD से ज्यादा मुनाफा के लिए हिट हैं म्यूचुअल फंड्स स्कीम

टैक्स बचाने और मोटे रिटर्न पाने के लिए निवेशक म्यूचुअल फंड्स की ELSS में निवेश कर सकते हैं. आइए जानते हैं इस स्कीम्स के बारे में...

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    अगर आप टैक्स सेविंग के लिए निवेश की तैयारी कर रहे है तो आपके लिए म्यूचुअल फंड्स में पैसा लगाना एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है. जब यह सवाल एक्सपर्ट्स से पूछा गया तो उनका जवाब हां में था, एक्सपर्ट्स के मुताबिक इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम्स (ELSS) का आकर्षण पीपीएफ, एनएससी और बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट्स के मुकाबले बढ़ा है. इन स्कीम्स ने पिछले 5 साल में 20 फीसदी से भी ज्यादा का रिटर्न दिया है. ईएलएसएस के तहत सेक्शन 80 सी में 1.5 लाख रुपए तक के निवेश पर टैक्स बचत होती है.

    क्या होता है ELSS- एक्सपर्ट्स बताते हैं कि ईएलएसएस (इक्विटी लिंक्ड सेंविग्स स्कीम्स) में करीब 65 फीसदी राशि इक्विटी या इक्विटी लिंक्ड प्रोडक्ट्स में निवेश की जाती है. लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स के तहत छूट के लिए 65 फीसदी निवेश जरूरी है. वहीं, 80सीसी में छूट के लिए आम आदमी ईएलएसएस के तहत 1.5 लाख रुपए तक का निवेश कर सकता है. इस स्कीम में 3 साल का लॉक इन पीरियड होता है.

    मिलता है मोटा रिटर्न- अगर पिछले 5 साल के रिटर्न पर नजर डालें तो रिलायंस टैक्स सेवर ने 22.08 फीसदी, ऐक्सिस लॉन्ग टर्म इक्विटी ने 22.05 फीसदी, आदित्य बिड़ला सनलाइफ टैक्स रिलीफ ने 21 फीसदी, आईडीएफसी टैक्स अडवांटेज फंड ने 20.87 फीसदी का रिटर्न दिया है.

    कम होता है लॉक-इन पीरियड- पीपीएफ और एनएससी में लॉक-इन पीरियड काफी लंबा होता है. इसका मतलब यह है कि इनमें एक बार निवेश करने के बाद आप जल्द अपना पैसा नहीं निकाल सकते हैं. हालांकि, पीपीएफ में पांच साल के बाद आंशिक निकासी की सुविधा है, लेकिन इसकी मैच्योरिटी पीरियड 15 साल है. इसी तरह एनएससी में लॉक-इन पीरियड 6 साल है. इसके मुकाबले ईएलएसएस में लॉक-इन पीरियड 3 साल है.

    1.5 लाख की टैक्स छूट- इनकम टैक्स की धारा 80सी के तहत 1.5 लाख रुपए का निवेश अधिकतम ईएलएसएस में कर टैक्स में छूट का फायदा उठाया जा सकता है. ज्यादातर निवेशक टैक्स बचाने के लिए ईएलएसएस में निवेश करना शुरू करते हैं और धीरे-धीरे वे म्यूचुअल फंड (एमएफ) की दूसरी इक्विटी स्कीमों में निवेश करने लगते हैं. इसलिए इसे एमएफ की पहली स्कीम भी कहा जाता है.

    FD और PPF के मुकाबले क्यों हैं बेहतर- ईएलएसएस के रिटर्न्स पूरी तरह से टैक्स फ्री होते हैं और टैक्स सेविंग एफडी और पीपीएफ के मुकाबले ईएलएसएस का लॉक इन कम है. ईएलएसएस में ग्रोथ और डिविडेंड दोनों के विकल्प रहते हैं. इस स्कीम में डिविडेंड रीइन्‍वेस्टमेंट का विकल्प नहीं मिलता है.

    ये भी पढ़ें: म्यूचुअल फंड्स स्कीम में लगे आपके पैसे पर हो रहा है फायदा या नुकसान, ऐसे जानें

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