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जहरीली खाद छोड़ जैविक खेती से जुड़े 19 लाख किसान, आप भी सरकार से ले सकते हैं 50 हजार रुपये की मदद

ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: March 9, 2020, 1:07 PM IST
जहरीली खाद छोड़ जैविक खेती से जुड़े 19 लाख किसान, आप भी सरकार से ले सकते हैं 50 हजार रुपये की मदद
जैविक खेती (Organic Farming) करना चाहते हैं तो मोदी सरकार देगी 3 साल के लिए प्रति हेक्टेयर 50 हजार रुपये. आर्गेनिक खेती के लिए जरूरी है सर्टिफिकेशन

जैविक खेती (Organic Farming) करना चाहते हैं तो मोदी सरकार देगी 3 साल के लिए प्रति हेक्टेयर 50 हजार रुपये. आर्गेनिक खेती के लिए जरूरी है सर्टिफिकेशन

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नई दिल्ली. जहरीले कीटनाशक और खाद वाली खेती छोड़ने के लिए की गई पीएम नरेंद्र मोदी की अपील रंग लाने लगी है. कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के मुताबिक अब तक देश में 19,00,720 किसान जैविक खेती (Organic Farming) से जुड़ चुके हैं. जिसमें पहले नंबर पर मध्य प्रदेश है. अगर आप भी आर्गेनिक खेती करना चाहते हैं तो हम आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दे रहे हैं. इसे बढ़ावा देने पर सरकार जोर दे रही है. इसके लिए PKVY (Paramparagat Krishi Vikas Yojana) बनाई है. जिससे आपको प्राकृतिक खेती के लिए प्रति हेक्टेयर 50 हजार रुपये मिलेंगे. सरकार ने इसके लिए 1632 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं.

पीएम मोदी ने कहा था कि हमें धरती मां को बीमार बनाने का हक नहीं है. इसके बाद जैविक खेती पर फोकस किया जाने लगा. परंपरागत कृषि विकास योजना के तहत केंद्र सरकार 3 साल के लिए प्रति हेक्टेयर 50 हजार रुपये की सहायता ऐसी खेती के लिए दे रही है. इसमें से 31,000 रुपये जैविक खाद, जैविक कीटनाशकों और वर्मी कंपोस्ट आदि खरीदने के लिए तय किए गए हैं.

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ऑर्गेनिक फार्मिंग में हैं कई फायदे




इसलिए बढ़ रहा आर्गेनिक खाद का उत्पादन



केंद्रीय कृषि मंत्री तोमर के मुताबिक मांग बढ़ने की वजह से जैविक उर्वरक का उपादन बढ़ रहा है. साल 2013-14 में आर्गेनिक खाद का जो उपादन 2294 लाख मिट्रिक टन था वह 2017-18 में बढ़कर 3387 लाख मिट्रिक टन हो गया है.

आर्गेनिक खेती के लिए जरूरी है सर्टिफिकेशन
आपका का जैविक उत्पाद तभी बिकेगा जब आपके पास इसका प्रमाण पत्र होगा कि आपकी फसल जैविक ही है. इसके सर्टिफिकेशन की एक प्रक्रिया है. इसके लिए आवेदन करना होता है. फीस देनी होती है. प्रमाण पत्र लेने से पहले मिट्टी, खाद, बीज, बोआई, सिंचाई, कीटनाशक, कटाई, पैकिंग और भंडारण सहित हर कदम पर जैविक सामग्री जरूरी है. आपने उत्पादन के लिए आर्गेनिक चीजों का ही इस्तेमाल किया है इसके लिए इस्तेमाल की गई सामग्री का रिकॉर्ड रखना होता है.

इस रिकॉर्ड की प्रमाणिकता की जांच होती है. उसके बाद ही खेत व उपज को जैविक होने का सर्टिफिकेट मिलता है. इसे हासिल करने के बाद ही किसी उत्पाद को ‘आर्गेनिक प्रोडक्ट’ की औपचारिक घोषणा के साथ बेचा जा सकता है. एपिडा (Agricultural and Processed Food Products Export Development Authority) ने आर्गेनिक फूड की सैंपलिंग और एनालिसिस के लिए 19 एजेंसियों को मान्यता दी है.

 

इस राज्य ने कायम की मिसाल
पूर्वोत्तर के राज्य सिक्किम ने इस मामले में मिसाल कायम कर दी है. जब कुछ विशेषज्ञ दावा करते हैं कि आर्गेनिक फार्मिंग संभव नहीं है, उसने खुद को जनवरी 2016 में ही 100 फीसदी एग्रीकल्चर स्टेट बना लिया था. उसने रासायनिक खादों और कीटनाशकों को चरणबद्ध तरीके से हटा दिया. एपीडा (APEDA) के मुताबिक पूर्वोत्तर के इस छोटे से प्रदेश ने अपनी 76 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को प्रमाणिक तौर पर जैविक कृषि क्षेत्र में बदल लिया है.

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आर्गेनिक खेती का दायरा बढ़ रहा है


आर्गेनिक खेती का बढ़ता दायरा
वैसे तो एक दौर में यहां पर जैविक खादों से ही लोग खेती करते थे. लेकिन हरित क्रांति की शुरुआत के बाद से रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल की अंधी दौड़ शुरू हो गई. उसके बाद जैविक खेती की तरफ ध्‍यान 2004-05 में गया, जब जैविक खेती पर राष्‍ट्रीय परियोजना (एनपीओएफ) की शुरूआत की गई. नेशनल सेंटर ऑफ आर्गेनिक फार्मिंग के मुताबिक 2003-04 में भारत में जैविक खेती सिर्फ 76,000 हेक्टेयर में हो रही थी जो 2009-10 में बढ़कर 10,85,648 हेक्टेयर हो गई.

उधर, केंद्रीय कृषि मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस समय करीब 27.77 लाख हेक्टेयर में जैविक खेती हो रही है. इनमें मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, छत्तीसगढ़, यूपी, ओडिशा, कर्नाटक, झारखंड और असम अच्छा काम कर रहे हैं.

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First published: March 7, 2020, 6:10 AM IST
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