राकेश झुनझुनवाला से जानिए बाजार में तेजी कायम रहेगी या होगा बड़ा करेक्शन, कोरोना third wave पर कही ये बात

राकेश झुनझुनवाला ने बाजार पर कहा तेजी कायम रहेगी

मुंबई . मार्केट में आई हालिया गिरावट और महंगाई से जुड़ी चिंता को दरकिनार करते हुए भारत के जाने-माने दिग्गज निवेशक राकेश झुनझुनवाला का कहना है कि भारत का बुल मार्केट जारी रहेगा और महंगाई से जुड़ी चिंता अस्थाई है.

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    मुंबई . मार्केट में आई हालिया गिरावट और महंगाई से जुड़ी चिंता को दरकिनार करते हुए भारत के जाने-माने दिग्गज निवेशक राकेश झुनझुनवाला का कहना है कि भारत का बुल मार्केट जारी रहेगा और महंगाई से जुड़ी चिंता अस्थाई है.
    CNBC-TV18 को दिए गए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि निवेशकों को सिर्फ हाल में आए छोटे-करेक्शन को लेकर नहीं डरना चाहिए. पिछले हफ्ते 15900 से ऊपर का हाई छूने के बाद निफ्टी 15600 के आसपास ट्रेड कर रहा है जो लगभग 2 फीसदी की गिरावट दर्शाता है.

    बाजार की तेजी एक दशक तक कायम रहेगी 
    आज की स्थिति की तुलना 2004-2008 के बुल मार्केट से करते हुए राकेश झुनझुनवाला ने कहा कि उनके अंदर 2002-2003 वाली फीलिंग आ रही है. बाजार की यह मजबूती सिर्फ 6 साल तक नहीं बल्कि पूरे 1 दशक कायम रहेगी.

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    इस बातचीत में राकेश झुनझुनवाला ने आगे कहा कि उनको नहीं लगता है कि कोविड-19 की तीसरी लहर आएगी. उन्होंने कहा कि किसी ने कोविड-19 के दूसरे लहर की भविष्य वाणी नहीं की थी और अब हर कोई तीसरी लहर की बात कर रहा है.
    वैक्सीनेशन की प्रक्रिया आगे बढ़ने और लोगों में इम्यूनिटी बढ़ने के साथ ही मुझे कोविड-19 की तीसरी लहर संभावना नहीं नजर आती. इसके अलावा किसी चुनौती से निपटने के लिए इस बार इकोनॉमी में ज्यादा बेहतर तरीके से तैयार है.

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    छोटे-मझोले शेयरों में आई तेजी पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि इन सेक्टरों में उछाल आया है. उन्होंने आगे यह भी कहा कि बुल मार्केट हर दिन एक ही दिशा में नहीं चलता उसमें बीच-बीच में करेक्शन आने चाहिए. झुनझुनवाला इंडियन इकोनॉमी को लेकर काफी बुलिश है. उनका मानना है कि सरकार द्वारा हाल में किए गए रिफॉर्म का असर लंबी अवधि में देखने को मिलेगा.
    उन्होंने कहा कि भारत की इकोनॉमी अब उड़ान भरने की स्थिति में है. इकोनॉमी को एनपीए साइकिल से गुजरना पड़ा. इसके अलावा भारतीय इकोनॉमी जन-धन, आईबीसी, रेरा , माइनिंग रिफॉर्म , लेबर और कृषि कानून जैसे बदलावों से गुजरना पड़ा. भारत अब अच्छे और दीर्घावधि आर्थिक विकास के दहलीज पर खड़ा है. इंडियन इकोनॉमी में आए ढ़ाचागत बदलाव अब अपना असर दिखाना शुरु करेंगे.

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