इन 5 बातों से समझिए आखिर कैसे कोरोना वायरस ने बदली वैश्विक अर्थव्यवस्था की तस्वीर

इन 5 बातों से समझिए आखिर कैसे कोरोना वायरस ने बदली वैश्विक अर्थव्यवस्था की तस्वीर
कोरोना के खिलाफ हमारी जंग में ये 15 जिले महत्‍वपूर्ण हैं.

कोरोना वायरस महामारी की वजह से दुनिया की एक बड़ी आबादी बाहर नहीं निकल पा रही है. यही कारण है कि आर्थिक ​गतिविधियां लगभग ठप पड़ चुकी है. IMF ने कहा कि इस साल वैश्विक अर्थव्यवस्था 3 फीसदी तक सिकुड़ जाएगी. हालांकि, चीन और भारत में आर्थिक ग्रोथ में तेजी रहेगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 25, 2020, 5:16 PM IST
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नई दिल्ली. पिछले साल चीन के वुहान शहर में कोरोना वायरस (Coronavirus) का पहला मामला सामने आने के बाद अब तक यह 185 देशों में फैल चुका है. जॉन्स हॉप​किन्स यूनिवर्सिटी द्वारा जुटाए गए आंकड़े से पता चलता है कि अब तक दुनियाभर में कुल 27 लाख से भी अधिक लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं. इसी डेटा के मुताबिक, करीब 19 लाख लोगों की कोविड-19 संक्रमण से मौत हो चुकी है. भारत में अब तक 24.5 हजार लोग संक्रमित हुए हैं और 700 से अभी अधिक लोगों की जान जा चुकी है. हालांकि, करीब 5 हजार लोग स्वस्थ भी हुए हैं.

ग्रेट लॉकडाउन ने रोक दी दुनिया
इस जानलेवा वायरस को रोकने के लिए दुनियाभर के कई देशों में लॉकडाउन भी लगाया गया, जिसमें शहरों से लेकर पूरे देश तक बंद कर दिया गया. इसमें बॉर्डर्स, स्कूल, वर्कप्लेस, बाजार, धार्मिक सम्मेलनों तक को बंद कर दिया गया. अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने इस 'ग्रेट लॉकडाउन' का नाम दिया है. इस लॉकडाउन की वजह से वैश्विक स्तर पर आर्थिक गतिविधियों का एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह से ठप पड़ चुका है. अब इससे छोटे-बड़े कारोबार से लेकर नौकरियों पर भी खास असर पड़ा है.

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IMF की चीफ इकोनॉमिस्ट गीता गोपीनाथ (Gita Gopinath) ने पिछले महीने ही अपने एक ब्लॉग में लिखा कि सही मायने में यह एक वैश्विक संकट (Global Crisis) है. इस वायरस ने किसी भी देश को नहीं छोड़ा है. आइए जानते हैं कि आने वाले दिनों में कोरोना वायरस वैश्विक अर्थव्यवस्था की तस्वीर कैसे बदल कर रख देगा.



1. बेरोजगारी में बेतहाशा इजाफा
कई प्रख्यात अर्थशास्त्रियों ने कहा है कि लॉकडाउन की वजह से दुनिया में बेरोजगारी बढ़ने की दर में तेजी से इजाफा होगा. कुछ अर्थव्यवस्थाओं अब यह देखने को भी मिलने लगा है. कुछ प्रमुख देशों में फिलहाल बेरोजगारी दर की बात करें तो चीन में 5.9 फीसदी, ऑस्ट्रेलिया में 5.2 फीसदी, जर्मनी में 5 फीसदी, अमेरिका में 4.4 फीसदी और ​दक्षिण कोरिया में 3.8 फीसदी है. दुनिया की सबसे बड़ी ​अर्थव्यवस्था माने जाने वाले अमेरिका में 2.6 करोड़ लोगों ने पिछले 5 सप्ताह में नौकरी गंवा दी है. अगस्त 2017 के बाद इस देश में बेरोजगारी सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है.

2. सर्विस इंडस्ट्री पर सबसे अधिक मार
दुनियाभर के कई देशों में रोजागर और ग्रोथ में सर्विस इंडस्ट्री अहम भूमिका निभाता है. इसमें अमेरिका, चीन और भारत जैसे देशों का नाम शामिल है. मौजूदा महामारी की वजह से इन तीनों देशों में रिटेल सेल्स में रिकॉर्ड गिरावट देखने को मिली है. दुकानें बंद होने और ग्राहकों को घर की दहलीज से बाहर नहीं निकलना इसका एक सबसे बड़ा कारण है. हालांकि, अमेजन जैसे कुछ ऑनलाइन रिटलेर्स के कारोबार में मामूली बढ़ोतरी भी देखेन को मिली है. इकोनॉमिस्ट्स का कहना है कि लॉकडाउन के बाद भी ग्राहकों में पहले जैसे खर्च करने की क्षमता नहीं रहेगी. चीन में कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है. ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स के एक एनलिस्ट ने भी यही कहा है.

इस रिपोर्ट में कहा गया कि रोक हटने के बाद ऐसा नहीं होगा कि ग्राहक दुकानों की तरफ दौड़ेंगे. आईएचएस मार्किट का कहना है कि पूरी दुनिया में सर्विस इंडस्ट्री पर असर देखने को मिल रहा है. इसमें ट्रांसपोर्टेशन, रियल एस्टेट, ट्रैवल और टूरिज्म जैसे सेक्टर्स पर सबसे अधिक असर पड़ेगा.

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3. मैन्युफैक्चरिंग एक्टिविटी में गिरावट
पहले ही अमेरिका-चीन के बीच व्यापार युद्ध (Trade War) की वजह से मैन्चुफैक्चरर्स पर असर पड़ा है. अब कोरोना वायरस की वजह से इस सेक्टर पर एक बार फिर दबाव बढ़ गया है. कई देश उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल के लिए चीन पर निर्भर रहते हैं. चीनी बाजार से ही उन्हें अपने प्रोडक्ट के लिए किफायती दर पर मैटेरियल्स और पार्ट्स मिलते हैं. लेकिन, चीन में इनका निर्माण अभी भी बंद है. लॉकडाउन की वजह से मैन्युफैक्चरिंग फर्म्स को भी धक्का लगा है. इसके बाद मांग में कमी का डर पर अब इस सेक्टर को सताने लगा है. अमेरिका, यूरोप से लेकर ए​शिया तक में पिछले महीने फैक्ट्री आउटपुट ग्रोथ में बड़ी गिरावट आई है.

4. विश्व व्यापार संगठन (WTO) ने पिछले महीने ही एक अनुमान में कहा था कि वैश्विक ट्रेड वॉल्युम 31.9 फीसदी से लुढ़कर 12.9 फीसदी के स्तर पर आ जाएगा. WTO ने कहा है कि ट्रेड वॉल्युम बहुत हद तक कई अर्थव्वयवस्थाओं पर निर्भर करता है. इस रिपोर्ट में कहा गया कि ​इस साल आयात-निर्यात में भारी गिरावट देखने को मिलेगी.

5. इस साल सिकुड़ेगी वैश्विक अर्थव्यवस्था
कोरोना वायरस महामारी (Coronvirus Pandemic) की वजह से कई रेटिंग एजेंसियों ने वैश्विक आर्थिक ग्रोथ के अनुमान को घटा दिया है. IMF का मानना है कि इस साल वैश्विक अर्थव्यवस्था 3 फीसदी तक सिकुड़ जाएगी. IMF ने कहा कि कुछ चुनिंदा अर्थव्यवस्थाओं में ही इस साल तेजी देखने को मिलेगी. तेजी आने वाली अर्थव्यवस्थाओं में IMF ने चीन और भारत का नाम लिया है.

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