कोरोना संकट के बीच भारत का विदेशी पूंजी भंडार रिकॉर्ड स्तर पर कैसे पहुंचा?

कोरोना संकट के बीच भारत का विदेशी पूंजी भंडार रिकॉर्ड स्तर पर कैसे पहुंचा?
आरबीआई की ओर से जारी साप्‍ताहिक आंकड़ाें के मुताबिक, 12 जून को समाप्‍त हफ्ते के दौरान देश के विदेशी पूंजी भंडार में 5 अरब डॉलर से ज्‍यादा की वृद्धि दर्ज की गई है.

कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन के बीच आई बड़ी खुशखबरी आई है. देश का विदेशी पूंजी भंडार (Forex Reserves) अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है. ये 3 अरब डॉलर से ज्‍यादा की वृद्धि के साथ 37 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्‍तर पर पहुंच गया है.

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कोरोना वायरस के बीच देश के लिए अच्‍छी खबर है कि हमारे विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) में बढ़ोतरी हो रही है. देश का विदेशी पूंजी भंडार 29 मई को समाप्त हुए सप्‍ताह के दौरान 3.43 अरब डॉलर की वृद्धि के साथ 37 लाख करोड़ रुपये (493.48 अरब डॉलर) पर पहुंच गया. विदेशी मुद्रा में बढ़ोतरी से पूंजी भंडार में यह रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की है. भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा कि विदेशी पूंजी भंडार में यह बढ़ोतरी ऐसे वक्त में हुई है, जब पूरा देश वैश्विक महामारी की वजह से बुरी तरह प्रभावित है. बता दें कि विदेशी पूंजी भंडार में विदेशी मुद्रा भंडार, स्वर्ण भंडार (Gold Reserve), स्‍पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDR) और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में भारतीय भंडार शामिल होते हैं.

आरबीआई ने साप्ताहिक आंकड़े जारी करते हुए बताया कि देश का विदेशी पूंजी भंडार 22 मई को समाप्‍त हफ्ते के दौरान 490.04 अरब डॉलर था. साप्ताहिक आधार पर विदेशी पूंजी भंडार का सबसे अहम हिस्‍सा विदेशी मुद्रा भंडार 29 मई को समाप्‍त सप्‍ताह में 3.50 अरब डॉलर बढ़कर 455.21 अरब डॉलर हो गया है. हालांकि, देश के स्वर्ण भंडार का मूल्य 9.7 करोड़ डॉलर घटकर 32.682 अरब डॉलर पर आ गया है. स्‍पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDR) मूल्य 1.43 अरब डॉलर पर बरकरार रहा. देश का आईएमएफ में भंडार 310 लाख डॉलर बढ़कर 4.158 अरब डॉलर हो गया है.

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कोरोना संकट के बीच विदेशी मुद्रा भंडार में इस बढ़ोतरी को काफी अच्‍छा माना जा रहा है. देश का विदेशी मुद्रा भंडार इससे पिछले सप्ताह में 3 अरब डॉलर की बढ़त के साथ 490.04 अरब डॉलर पर आया था, जो उस समय का उच्चतम स्तर था. विदेशी मुद्रा भंडार एक या एक से अधिक करेंसी में रखे जाते हैं. आमतौर पर भंडार डॉलर या यूरो में रखा जाता है. आरबीआई साप्ताहिक आधार पर इसके आंकड़े पेश करता है.
अब सवाल ये उठता है कि तमाम नकारात्‍मक कारणों के बाद भी विदेशी पूंजी भंडार में बढ़ोतरी कैसे हुई. दरअसल, मई के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिली है. इस वजह से कच्चे तेल को खरीदने के लिए सरकार का खर्च कम हुआ है. कच्चा तेल खरीदने के लिए सरकार को डॉलर में भुगतान करना पड़ता है. ऐसे में कच्चे तेल की कीमतें घटने से सरकार को कम डॉलर खर्च करने पड़े हैं. इसी कारण घरेलू स्तर पर डॉलर की बचत हुई है और विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि हुई.

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विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ने से भारतीय मुद्रा रुपये को भी सपोर्ट मिल सकता है. अगर रुपये में सुधार होता है तो विदेश से आयात होने वाले सामान पर भी कम लागत लगेगी. इसका सीधा फायदा देश की अर्थव्यवस्था को हो सकता है. हालांकि, इसके उलट रुपये में ज्यादा मजबूती आने पर देश के निर्यात कारोबार पर असर पड़ सकता है.

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