कभी इंटर्न से बन गए थे देश के सबसे बड़े कॉफी किंग, अब बिक रही है उनकी कंपनी

कभी इंटर्न से बन गए थे देश के सबसे बड़े कॉफी किंग, अब बिक रही है उनकी कंपनी
सीडीईएल अपने कॉफी रिटेल बिजनेस में हिस्‍सेदारी बेचने के लिए केकेआर, टीपीजी कैपिटल और बेन जैसी प्राइवेट इक्विटी फर्म्‍स के साथ पिछले साल से बातचीत कर रही है.

कॉफी डे ग्‍लोबल (Coffee Day Global) ने अपने कॉफी कारोबार का मूल्‍यांकन कराने के लिए अर्नस्‍ट एंड यंग (EY) को जिम्‍मेदारी सौंपी है ताकि इसमें हिस्‍सेदारी बेची जा सके. पिछले साल कर्जदारों (Lenders) के भारी दबाव के कारण कंपनी के संस्‍थापक वीजी सिद्धार्थ (VG Siddhartha) ने आत्‍महत्‍या कर ली थी. तब से कंपनी की हालत खराब है.

  • Share this:
कॉफी डे एंटरप्राइजेज लिमिटेड (CDEL) के कॉफी बिजनेस का प्रबंधन करने वाली कॉफी डे ग्‍लोबल (Coffee Day Global) ने कंपनी में निवेश प्रस्‍तावों के लिए शुरुआती जांच करने की जिम्‍मेदारी अर्नस्‍ट एंड यंग (EY) को सौंप दी है. सीडीईएल अपने कॉफी रिटेल बिजनेस में हिस्‍सेदारी बेचने के लिए केकेआर, टीपीजी कैपिटल और बेन जैसी प्राइवेट इक्विटी फर्म्‍स के साथ पिछले साल से बातचीत कर रही है. इस समय कंपनी 1,469 कैफे और 59,400 वेंडिंग मशींस चला रही है. पिछले साल कर्जदारों (Lenders) के भारी दबाव के कारण कंपनी के संस्‍थापक वीजी सिद्धार्थ (VG Siddhartha) ने आत्‍महत्‍या कर ली थी. इसके बाद से कंपनी भारी-भरकम कर्ज चुकाने के लिए कई तरीकों पर विचार कर रही है.

सीडीईएल ने कर्ज चुकाने के लिए बेंगलुरु के बाहर मौजूद अपने आईटी पार्क को बेचने के लिए प्राइवेट इक्विटी फर्म ब्‍लैकस्‍टोन के साथ 2,000 करोड़ रुपये का सौदा किया है. सिद्धार्थ का परिवार कर्ज चुकाने के लिए 10,000 एकड़ के कॉफी प्‍लांटेशन के साथ ही करीब-करीब अपनी पूरी निजी संपत्ति बेचने की बात कर रहा है. माना जा रहा है कि उनकी पूरी संपत्ति करीब 2,000 करोड़ रुपये की होगी. सिद्धार्थ की पत्‍नी मालविका समेत प्रमोटर्स की कंपनी में हिस्‍सेदारी 16.4 फीसदी है, जो पिछले साल तक 54 फीसदी थी. तय समय के भीतर वित्‍तीय नतीजों की घोषणा नहीं कर पाने के कारण फरवरी में कंपनी के शेयर की खरीद-फरोख्‍त पर भी रोक लगा दी गई थी. वीजी सिद्धार्थ ने इस कंपनी को वैश्विक स्‍तर पर पहचान दिलाने के लिए कड़ी मेहनत की थी. उनका सफर भी किसी फैंटसी से कम नहीं रहा है.

ये भी पढ़ें-कोरोना संकट के बीच भारत का विदेशी पूंजी भंडार रिकॉर्ड स्तर पर कैसे पहुंचा?



वीजी सिद्धार्थ को फोर्ब्स मैगजीन ने देश में नए तरह के बिजनेस टायकून के रूप में शुमार किया था. उनका परिवार कर्नाटक में कई पीढ़ियों से बेहद अमीर और रसूख वाला माना जाता है. पिछले साल जब उन्‍होंने आत्‍महत्‍या की तो पीछे छोड़े एक खत में लिखा कि मैं बिजनेस में नाकाम होने के कारण खुदकुशी कर रहा हूं. इस पर सब चौंक गए थे. उनका जन्‍म कर्नाटक के चिक्कमंगलुरु में हुआ था. उनके परिवार के पास 350 एकड़ का काफी एस्टेट है. लेकिन, उन्होंने फैमली बिजनेस के बजाय अपना अलग रास्ता चुना. सिद्धार्थ मंगलूर यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में मास्टर्स थे. करियर की शुरुआत में ही वो शेयर मार्केट से जुड़ गए. उन्होंने 1983 से 1985 तक जेएम फाइनेंशियल लिमिटेड मुंबई में मैनेजमेंट ट्रेनी के रूप काम किया. वह यहां पोर्टफोलिया मैनेजमेंट और सिक्‍योरिटीज से जुड़ा काम करते थे.
सिद्धार्थ दो साल बाद बेंगलुरु लौट आए. उनके पिता ने इस शर्त के साथ उन्हें अपनी पसंद का बिजनेस करने के लिए पांच लाख रुपये दिये कि सफल नहीं होने पर वह फैमली बिजनेस संभालेंगे. उन्होंने इसमें तीन लाख रुपये से एक जमीन खरीदी और दो लाख रुपये अपने सिक्‍योरिटी बिजनेस में लगा दिए. इसमें उन्होंने नौकरी के दौरान बचाए दो लाख रुपये भी जोड़ दिए. तब उन्होंने शिवन सिक्‍योरिटीज नाम से फर्म शुरू की. इसका नाम 2000 में बदलकर वेटूवेल्थ सिक्‍योरिटीज लिमिटेड कर दिया. बाद में इसकी वेंचर कैपिटल डिविजन की शुरुआत ग्लोबल टेक्नॉलॉजी वेंचर के नाम से हुई.

वीजी सिद्धार्थ 1985 तक स्टाक मार्केट में फुल टाइम इनवेस्टर हो गए. उन्होंने 10,000 एकड़ के कॉफी फॉर्म खरीदे. कॉफी बिजनेस में 90 के दशक में उदारीकरण की बहार आई. उस दौरान उन्होंने प्लांटेशन के जरिये एक साल में ही पैसा दोगुना कर डाला. इसके बाद उन्होंने एक और कंपनी अमलगेमेटेड बीन्स कॉफी ट्रेडिंग कंपनी लिमिटेड बनाई. उन्‍होंने 1993 में कॉफी एक्सपोर्ट पर फोकस करने के लिए ये कंपनी बनाई थी. इस समय उनके कॉफी प्लांटेशन से 3,000 टन कॉफी का उत्पादन होने लगा था. वहीं, उनकी कॉफी ट्रेडिंग कंपनी 20 हजार टन का व्यापार कर रही थी. दो साल में ही ये कंपनी देश की दूसरी बड़ी काफी निर्यातक बन गई.

ये भी पढ़ें-'लोगों के खाते में पैसे डालने से नहीं सुधरेंगे हालात, रोजगार बढ़ाने को एमएसएमई की कर रहे मदद'

सिद्धार्थ ने पहला कैफे कॉफी डे स्टोर बेंगलुरु के भीड़भाड़ वाले इलाके ब्रिगेड रोड पर 1996 में खोला था. जहां एक कॉफी और एक घंटे की इंटरनेट सर्फिंग की कीमत 100 रुपये थी. ये वो दौर था, जब बेंगलुरु बदल रहा था और आईटी हब में तब्दील हो रहा था. इसके बाद सिद्धार्थ और उनकी टीम ने इसका जबरदस्त विस्तार किया. ये देश की सबसे बड़ी कॉफी रेस्‍टोरेंट चेन बन गई. साथ ही ये कॉफी डे ग्लोबल और उसकी सब्सिडिरी कॉफी डे एंटरप्राइजेज की भी मालिक थी. फोर्ब्‍स की 2015 में जारी हुई सूची के मुताबिक, तब वीजी सिद्धार्थ की कुल संपत्ति 8200 करोड़ रुपये आंकी गई थी. कर्नाटक के पूर्व सीएम एसएम कृष्णा उनके ससुर थे. ऐसे में ये भी हैरानी की बात थी कि क्यों उन्होंने संकट के समय अपने ससुर के रसूख का इस्तेमाल नहीं किया.

एक समय कोका-कोला के साथ कैफे कॉफी डे की हिस्सेदारी बेचने की बात हो रही थी. कैफे कॉफी डे को उम्मीद थी कि कोका कोला को हिस्सेदारी बेचने से उसे 8,000 से 10,000 करोड़ रुपये तक मिल सकेंगे. सिद्धार्थ के पास कई और कंपनियों के भी शेयर थे. कई कंपनियों में वह बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में थे, जिसमें जीटीवी, माइंडट्री, लिक्विड क्रिस्टल, वेटूवेल्थ और इत्तियम शामिल हैं. लार्सन एंड टूब्रो ने भी कैफे कॉफी डे और माइंडट्री के 20 फीसदी शेयर 3,210 करोड़ में खरीदे थे. कॉफी डे एंटरप्राइजेज पर 31 मार्च  2019 तक 6,547 करोड़ रुपये का कर्ज हो गया था, जो तब उनकी 2,529 करोड़ रुपये की कुल संपत्ति का लगभग 2.5 गुना था. हालांकि, यह रिपोर्ट भी आई थीं कि माइंडट्री में हिस्सेदारी बेचने के बाद कर्ज काफी कम हो गया था.

उनके कई आफिस और परिसरों पर 2017 में इनकम टैक्स के छापे पड़े. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के मुताबिक, उन्हें ऐसे दस्तावेज मिले थे, जिससे साफ हो रहा था कि कंपनी ने 650 करोड़ का हिसाब-किताब जाहिर नहीं किया है. इन छापों ने सिद्धार्थ को परेशान कर दिया. उन पर प्राइवेट शेयरधारकों का दबाव पड़ने लगा. इसी दौरान उन्होंने अपने एक दोस्त से मोटा कर्ज लिया. इसके बाद पिछले साल उन्‍होंने कर्जदारों के भारी दबाव में आत्‍महत्‍या कर ली.

ये भी पढ़ें-कोरोना वायरस लॉकडाउन के बीच सरकार ने कंपनियों को राहत देने के लिए कानून में किया बड़ा बदलाव
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading