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कोरोना संकट में कटी सैलरी का आपके PF और ग्रैच्‍युटी पर होगा सीधा असर, जानिए इसके बारे में सबकुछ

कोरोना संकट में कटी सैलरी का आपके PF और ग्रैच्‍युटी पर होगा सीधा असर, जानिए इसके बारे में सबकुछ

कोरोना संकट में शुरू की गई वेतन में कटौती का असर आपके रिटायरमेंट बेनिफिट्स पर भी पडेगा.

कोरोना संकट में शुरू की गई वेतन में कटौती का असर आपके रिटायरमेंट बेनिफिट्स पर भी पडेगा.

प्रॉविडेंट फंड (PF) और ग्रैच्‍युटी (Gratuity) जैसे रिटायरमेंट बेनिफिट की गणना बेसिक सैलरी (Basic Salary) और डियरनेस अलाउंस (DA) के आधार पर की जाती है. ऐसे में कोविड-19 महामारी के दौरान काटी गई सैलरी (Salary Cut) का असर इन बेनिफिट पर पड़ना तय है.

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    नई दिल्‍ली. कोरोना संकट के बीच कारोबारी गतिविधियां (Business Activities) ठप रहने के कारण ज्‍यादातर कंपनियों के सामने चुनौतीभरा दौर चल रहा है. लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान हुए नुकसान को कम करने के लिए ज्‍यादातर कंपनियां अपने कर्मचारियों और अधिकारियों की सैलरी में कटौती (Salary Cut) कर रही हैं. इससे एक तरफ कर्मचारियों के हाथ में कम वेतन (Take Home Salary) आ रहा है तो दूसरी तरफ उन्‍हें अपने खर्च पर भी अंकुश (Spending Capacities) लगाना पड़ रहा है. वेतन में कटौती के कारण होने वाले इन तात्‍कालिक प्रभावों के अलावा कर्मचारियों के सेवानिवृत्ति लाभ (Retirement Benefits) पर भी असर पड़ेगा.

    कटौती का हर कंपोनेंट पर पड़ता है असर
    रिटायरमेंट बेनिफिट्स में शामिल प्रॉविडेंट फंड की गणना बेसिक सैलरी और डियरनेस अलाउंस के आधार पर की जाती है. वहीं, ग्रैच्‍युटी की गणना बैंक अकाउंट में ट्रांसफर की आखिरी सैलरी और कंपनी में बिताए वर्षों के आधार पर की जाती है. अगर किसी कर्मचारी को किसी कंपनी में काम करते हुए 5 साल हो चुके हैं तो उसकी ग्रैच्‍युटी बैंक अकाउंट में ट्रांसफर की आखिरी सैलरी की ढाई गुना होगी. पांच साल के बाद ग्रैच्‍युटी में हर बढ़ते हुए साल के साथ 15 दिन का वेतन जुड़ता जाता है. ऐसे में अगर किसी कर्मी के वेतन में कटौती होती है तो उसके कुल पीएफ और ग्रैच्‍युटी पर असर पड़ेगा. आसान शब्‍दों में समझें तो जब वेतन में कटौती की जाती है तो उसका सैलरी के हर कंपोनेंट पर उसी अनुपात में असर पड़ता है.

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    CTC स्‍ट्रक्‍चर के कारण ज्‍यादा नुकसान
    आजकल ज्‍यादातर प्राइवेट कंपनियों में सैलरी के 'कॉस्‍ट टू कंपनी' स्‍ट्रक्‍चर (CTC Structure) को अपनाया जाता है. ऐसे में जब सैलरी में कटौती की जाती है तो उसी अनुपात में वेतन में शामिल हर मद के भुगतान पर भी असर पड़ता है. मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, टीमलीज सर्विसेस की सह-संस्‍थापक और कार्यकारी उपाध्‍यक्ष रितुपर्णा चक्रवर्ती कहती हैं कि बेसिक सैलरी में मिलने वाले कई फायदों पर वेतन कटौती का असर पड़ता है. एम्‍प्‍लॉय प्रॉविडेंट फंड और कई प्रोविजंस एक्‍ट के मुताबिक, नियोक्‍ता को कर्मचारी की बेसिक सैलरी और डीए के 12 फीसदी के बराबर पीएम अपनी तरफ से जमा करना होता है. इतना ही पीएफ योगदान कर्मचारी को भी करना होता है.

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    पीएफ कॉर्पस में लगेगा तगड़ा झटका
    मान लीजिए किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी और डीए मिलाकर वेतन 20 हजार रुपये प्रति माह है, तो नियोक्‍ता के 2,400 रुपये और उसके योगदान को मिलाकर 4,800 रुपये पीएफ जमा करना होगा. अब मान लीजिए नियोक्‍ता ने मौजूदा हालात को देखते हुए वेतन में 20 फीसदी कटौती कर दी तो बेसिक और डीए घटकर 16,000 रुपये रह जाएगा. इससे उसका पीएफ भी कम होकर 3,840 रुपये रह जाएगा. अभी जमा किया गया कम पीएफ कर्मचारी के रिटायरमेंट बेनिफिट पर भी असर डालेगा. अब मान लीजिए किसी व्‍यक्ति की 20 साल की नौकरी बची है तो 8.5 फीसदी ब्‍याज दर पर उसका कुल रिटायरमेंट कॉर्पस 6 लाख रुपये घट जाएगा.

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    ग्रैच्‍युटी पर ऐसे पड़ेगा बड़ा असर
    कोई कर्मचारी या अधिकारी जब रिटायर होता है या नौकरी छोड़ता है तो नियोक्‍ता उसके कार्य वर्षों के आधार पर गणना कर ग्रैच्‍युटी देता है. इसके लिए कर्मचारी का कम से कम 5 साल कंपनी में काम करना जरूरी है. बैंकबाजार के सीईओ आदिल शेट्टी कहते हैं कि अगर किसी व्‍यक्ति ने किसी कंपनी में 8 साल काम किया है और उसके बैंक अकाउंट में ट्रांसफर की गई आखिरी सैलरी 20,000 रुपये है तो उसकी ग्रैच्‍युटी 92,307 रुपये होगी. अब अगर इस कर्मचारी की सैलरी में 20 फीसदी की कटौती कर दी गई है तो उसकी ग्रैच्‍युटी घटकर 73,846 रुपये रह जाएगी. इसका समाधान यही है कि कर्मचारी की बेसिक सैलरी में कटौती ना की जाए. इसके बजाय दूसरे अलाउंस में कटौती कर नियोक्‍ता अपने नुकसान को कम कर सकते हैं.

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    Tags: Employees receiving low salary, Employees salary, Gratuity, PF contribution, Salary break-up

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