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आम आदमी और अर्थव्यवस्था के लिए कैसे और कितने फायदेमंद होंगे इलेक्ट्रिक हाईवे, जानिए इसके बारे में सबकुछ

News18Hindi
Updated: February 3, 2020, 8:50 PM IST
आम आदमी और अर्थव्यवस्था के लिए कैसे और कितने फायदेमंद होंगे इलेक्ट्रिक हाईवे, जानिए इसके बारे में सबकुछ
केंद्र सरकार ने दिल्‍ली-मुंबई एक्‍सप्रेसवे पर एक इलेक्ट्रिक हाइवे बनाने की योजना तैयार की है. इस पर ओवरहेड केबल की मदद से ट्रक और बसें दौड़ेंगी.

Prime Time: केंद्रीय परिवहन व राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने बताया है कि सरकार ने दिल्‍ली-मुंबई एक्‍सप्रेसवे (Delhi-Mumbai Expressway) पर एक इलेक्ट्रिक हाइवे (Electric Highway) बनाने की योजना तैयार की है. वह खुद इलेक्ट्रिक हाइवे (Electric Highway) देखने के लिए अगले महीने स्‍वीडन (Sweden) जा रहे हैं.

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  • Last Updated: February 3, 2020, 8:50 PM IST
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नई दिल्‍ली. आपने अब तक पेट्रोल-डीजल (Petrol-Diesel), सीएनजी (CNG) से चलने वाले ट्रक और बसें देखी होंगी. साथ ही ऊपर लगी इलेक्ट्रिक केबल (Overhead Cable) की मदद से चलने वाली ट्रेनें (Trains) देखी होंगी. अब सरकार ऐसा हाइवे बना रही है, जिस पर आपको पेट्रोल-डीजल या सीएनजी से चलने वाली कार के साथ बिजली से चलने वाले ट्रक (Truck) और बसें (Bus) भी दौड़ते हुए नजर आएंगे. केंद्रीय परिवहन व राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने बताया है कि सरकार ने दिल्‍ली-मुंबई एक्‍सप्रेसवे (Delhi-Mumbai Expressway) पर एक इलेक्ट्रिक हाइवे (Electric Highway) बनाने की योजना तैयार की है. वह खुद इलेक्ट्रिक हाइवे देखने के लिए अगले महीने स्‍वीडन जा रहे हैं. उन्‍होंने कपंनियों से राजमार्गों को इलेक्ट्रिक हाइवे में तब्‍दील करने के लिए निवेश करने को भी कहा.

चौथे साल से वसूला जाएगा टोल टैक्‍स
नितिन गडकरी के मुताबिक, इस हाइवे के दोनों तरफ 10 लाख पेड़ लगाए जाएंगे. साथ ही यहां वाटर हार्वेस्टिंग (Water Harvesting) भी की जाएगी. इससे प्रदूषण (Pollution) को कम करने में भी मदद मिलेगी. उन्‍होंने बताया, 'इस परियोजना के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भरोसा दिलाया है कि सरकार को 30 साल के लिए इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर लोन (Infra Loan) की अनुमति दी जाएगी.'

उन्‍होंने कहा कि परियोजना पूरी होने के बाद दो साल तक यथास्थिति अवधि होगी. तीन साल बाद टोल टैक्‍स (Toll Tax) वसूलना शुरू किया जाएगा. इसके बाद एक एस्क्रो खाता खोला जाएगा. इस खाते में एक निश्चित राशि डाली जाएगी. उन्‍होंने बताया कि भारतीय स्टेट बैंक (SBI) समेत छह बैंक कर्ज देने को तैयार हैं.



ऑटो कंपनियां बना रहीं खास बस-ट्रक
केंद्र सरकार जर्मनी (Germany), स्वीडन (Sweden) और कोरिया (Korea) की तर्ज पर भारत में भी राजमार्गों को इलेक्ट्रिक हाइवे में बदलने की योजना पर काम कर रही है. इस योजना के अमल में आने के बाद भारत में ट्रक और बस बिजली से चलेंगे. इससे लॉजिस्टिक कॉस्ट में कमी आएगी. इलेक्ट्रिक हाइवे पर ट्रक या बस भी मेट्रो की तरह ऊपर लगे इलेक्ट्रिक केबल के जरिये चलेंगे.एक्‍सप्रेसवे के दोनों ओर बिजली की लाइन बिछाई जाएगी, जिस पर 80 टन तक वजन ढोने वाले ट्रक 100 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलेंगे. इससे बिना प्रदूषण फैलाए हाईब्रिड ट्रक्स कम समय में सामान को एक शहर से दूसरे शहर पहुंचा सकेंगे.

साथ ही इलेक्ट्रिक बसों के जरिये आम लोग भी करीब-करीब आधे समय में प्रदूषण मुक्‍त सफर का लुत्‍फ ले सकेंगे. गडकरी ने बताया कि ऑटो कंपनियां (Auto Makers) इलेक्ट्रिक हाईवे के लिए खास ट्रक और बसें डिजाइन कर रही हैं. उन्‍होंने दावा किया कि साल 2020 के अंत तक हमारे पास 10,000 ईवी बसें होंगी. ये ट्रक और बस बिजली और बैट्री दोनों से चलेंगे.



लागत घटाने को चुने ग्रामीण इलाके
इस इलेक्ट्रिक हाइवे का काम अगले दो साल में पूरा होने की उम्‍मीद है. सरकार हाईवे के लिए भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition) का काम पूरा कर चुकी है. परियोजना पर खर्च घटाने के लिए ग्रामीण (Rural) और आदिवासी इलाकों (Tribal Area) को चुना गया. पहले इलेक्ट्रिक हाइवे को दिल्ली-अहमदाबाद से मुंबई के मौजूदा हाईवे के किनारे-किनारे बनाने की योजना थी. बाद में लागत (Cost) कम करने के लिए दूसरा और सस्ता रूट तैयार किया गया.

इस नए रूट का चुनाव कर परिवहन मंत्रालय (Road Transport Ministry) ने 16,000 करोड़ रुपये की बचत की है. इस इलेक्ट्रिक हाइवे की कुल लागत 1.03 लाख करोड़ है. इसकी कुल लंबाई 1250 किमी होगी, जो मौजूदा हाइवे से 120 किमी कम होगी. इसकी चौड़ाई 120 मीटर होगी. इस हाइवे से दिल्‍ली-मुंबई की दूरी महज 12 घंटे में तय हो जाएगी यानी अभी से करीब आधा समय लगेगा. फिलहाल राजधानी एक्‍सप्रेस जैसी तेज रफ्तार ट्रेन से भी इस दूरी को तय करने में 16 घंटे लग जाते हैं.



हाइवे से कई इलाकों में होगा विकास
इलेक्ट्रिक हाइवे नई दिल्‍ली से गुड़गांव, अलवर, भरतपुर, सवाई माधोपुर, कोटा, झाबुआ, वडोदरा होते हुए मुंबई पहुंचेगा. दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र के पिछड़े इलाकों से गुजरने वाला यह इलेक्ट्रिक हाइवे खासकर पिछड़े तथा आदिवासी इलाकों के लिए विकास (Development) का इंजन साबित होगा. यहां लॉजिस्टिक पार्क, हैंडलूम और हैंडक्राफ्ट स्टॉल, फूड प्लाजा में इन इलाके में तैयार होने वाली वस्‍तुओं को खासतौर पर उपलब्‍ध कराया जाएगा.

इससे यह हाइवे सफर करने वालों को उन क्षेत्रों की कला और संस्‍कृति से भी जोड़ेगा. साथ ही स्‍थानीय युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार (Employment) भी उपलब्ध होगा. इस हाइवे पर बैटरी, सीएनजी, पेट्रोल और डीजल से चलने वाली कारें भी दौड़ेंगी. ऐसे में सीएनजी स्टेशन, इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशन या पेट्रोल पंप लगाने की इच्छुक कंपनियों को भी फायदा मिलेगा. इन स्‍टेशनों पर भी स्‍थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे.



माल ढुलाई का खर्च घटेगा, रोजगार बढ़ेगा
नितिन गडकरी ने एक कार्यक्रम के दौरान बताया था कि देश को कच्‍चा तेल (Crude Oil) आयात करने पर करीब हर साल 7 लाख करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते हैं. इस समय एक ट्रक एक लीटर डीजल (66 रुपये प्रति लीटर) में अधिकतम 6-10 किमी की दूरी तय करता है. वहीं, इलेक्ट्रिक ट्रक 12-15 रुपये की बिजली में 20 किमी दूरी तय कर लेगा. इस दौरान उसकी बैटरी भी चार्ज होती रहेगी.

फिर ट्रक बैटरी से चलेगा. इसके बाद फिर ओवरहेड केबल से चलेगा. इलेक्ट्रिक ट्रक एक चक्‍कर में सामान्‍य ट्रक के मुकाबले ज्‍यादा माल भी ढोएगा. इससे दिल्‍ली और मुंबई के बीच माल ढुलाई के खर्च (Logistic Cost) में करीब पांच गुना कमी आएगी.

यही बात बसों पर भी लागू होती है. इससे पेट्रोल-डीजल की मांग भी घटेगी. इसके अलावा ऑटो इंडस्‍ट्री (Auto Industry) प्रत्‍यक्ष या अप्रत्‍यक्ष तौर पर 2 करोड़ लोगों को रोजगार मुहैया कराती है. ऑटो इंडस्‍ट्री का भारत में कारोबार करीब 4.5 लाख करोड़ रुपये का है.

इलेक्ट्रिक बसों और ट्रकों की मांग बढ़ने से ऑटो सेक्‍टर में रोजगार व सालाना कारोबार भी बढ़ेगा. साथ ही इलेक्ट्रिक हाइवे के कारण युवाओं को रोजगार मिलने से उपभोग (Consumption) भी बढ़ेगा. ये सभी चीजें मिलकर भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था (Indian Economy) को सहारा देंगी.

बर्लिन में 1882 में ट्रॉली बसों को ओवरहेड इलेक्ट्रिक केबल के जरिये चलाया गया था.


1882 में बर्लिन में चली थीं बसें
ओवरहेड पावर लाइंस के जरिये रोड ट्रांसपोर्ट की शुरुआत 1882 में जर्मनी के बर्लिन (Berlin) शहर से हुई. तब बर्लिन में ट्रॉली बसों को ओवरहेड इलेक्ट्रिक केबल के जरिये चलाया गया. बर्लिन में 2018 तक 300 से ज्‍यादा इलेक्ट्रिक ट्रॉली बस चल रही थीं. इसके बाद 2000 में हाइवे व्‍हीकल्‍स के लिए ये सुविधा शुरू की गई.

हालांकि, ये सुविधा नॉन-कमर्शियल व्‍हीकल्‍स के लिए उपयोगी साबित नहीं हो पाई. इसके बाद कुछ देशों ने 2010 में फिर पैसेंजर कारों में ये सुविधा शुरू करने की कोशिश की, लेकिन फिर नाकामी मिली. इलेक्ट्रिक रोड सिस्‍टम के विकास की कहानी 1990 के दशक में तेजी से बढ़ी. इस क्षेत्र में विकास का सिलसिला 2010 तक जारी रहा.

दुनिया भर में कई कंपनियों ने 2010 तक इसे विकसित कर लिया था. जर्मनी ने 5 राजमार्गों पर मई, 2019 में ही ओवरहेड केबल इलेक्ट्रिक सिस्‍टम शुरू किया है. स्‍वीडन 2022 तक अपने रोड नेटवर्क को इलेक्ट्रिक करने पर काम कर रहा है. कोरिया ने 2013 में ही ये सुविधा शुरू कर दी थी. इसके बाद वह लगातार अपने रोड नेटवर्क को इलेक्ट्रिक में तब्‍दील करने के लिए काम कर रहा है. ब्रिटेन (Britain) ने 2015 में इस परियोजना पर काम शुरू किया, लेकिन बजट की कमी के कारण 2016 में प्रोजेक्‍ट रद्द कर दिया. अमेरिका ने 2017 में लॉस एंजिलिस में देश के पहले इलेक्ट्रिक हाइवे को आम लोगों के लिए खोला था.



प्रदूषण से लड़ने में मिलेगी मदद
पूरी दुनिया लगातार बढ़ते हुए प्रदूषण से परेशान है. ग्‍लोबल वार्मिंग (Global Warming) को लेकर सभी देश चिंतित हैं. पिछले साल स्‍वीडन की युवा पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग (Greta Thunberg) ने तो संयुक्‍त राष्‍ट्र (UN) में भाषण के दौरान पूरी दुनिया के नेताओं की प्रदूषण को लेकर लताड़ तक लगा दी थी. उन्‍होंने कहा था कि युवा पीढ़ी आपको कभी माफ नहीं करेगी.

वहीं, भारत (India) में भी प्रदूषण को लेकर चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही हैं. इसके अलावा पारंपरिक ईंधन पेट्रोल और डीजल की आसमान छूती कीमतों (High Prices) से भी आम भारतीय तंग आ चुका है. पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने का असर रोजमर्रा की जरूरतों की चीजों के दाम में उछाल के तौर पर भी नजर आता है. ऐसे में इलेक्ट्रिक हाइवे शानदार परिवहन विकल्‍प के तौर पर सामने आया है, जिससे एकतरफ प्रदूषण से लड़ने में मदद मिलेगी. वहीं, अर्थव्‍यवस्‍था को भी सहारा मिलेगा.

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(अमृत चंद्र, डिप्टी न्यूज एडिटर, न्यूज18)

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First published: January 30, 2020, 8:57 PM IST
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