आपने भी कराई है बैंक में FD तो ये छोटी सी गलती पड़ सकती है भारी! इनकम टैक्स डिपार्टमेंट भेज रहा नोटिस

बैंक में किए गए फिक्स्ड डिपोजिट पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्सेबल होता है.

बैंक में किए गए फिक्स्ड डिपोजिट पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्सेबल होता है.

Income Tax Notice: पिछले कुछ महीनों में टैक्सपेयर्स को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की तरफ से धड़ाधड़ नोटिस मिल रहे हैं. टैक्स चुकाने वाले लोगों को इनकम टैक्स विभाग मैसेज और ई-मेल के जरिये नोटिस जारी किए गए हैं.

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  • Last Updated: April 10, 2021, 8:08 AM IST
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नई दिल्ली. पिछले कुछ महीनों में टैक्सपेयर्स को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की तरफ से धड़ाधड़ नोटिस मिल रहे हैं. टैक्स चुकाने वाले लोगों को इनकम टैक्स विभाग मैसेज और ई-मेल के जरिये नोटिस जारी किए गए हैं. ये नोटिस इसलिए भेजे जा रहे हैं क्योंकि टैक्स डिपार्टमेंट के पास ब्याज से होने वाली कमाई का जो ब्योरा है, वह टैक्सपेयर्स के इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) से मेल नहीं खा रहा है.

छोटी गलती पड़ेगी महंगी

दरअसल, बैंक में किए गए फिक्स्ड डिपोजिट पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्सेबल होता है, लेकिन इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करते वक्त लोग अक्सर इस बात को भूल जाते हैं और एफडी के ब्याज से होने वाली कमाई को ITR में नहीं दिखाते हैं. इस छोटी सी गलती के कारण टैक्स डिपार्टमेंट टैक्सपेयर्स को नोटिस भेज रहा है.

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नोटिस से बचने के लिए करें ये काम

अगर इमकम टैक्स डिपार्टमेंट के नोटिस से बचना चाहते हैं तो ITR में Bank FD पर मिले ब्याज की जानकारी टैक्स विबाग को दें, लेकिन आपको यह पता होना चाहिए कि ITR में इसका ब्योरा कैसे देना है. दरअसल, ब्याज से होने वाली कमाई का ब्योरा देने के लिए ITR में दो ऑप्शन मिलते हैं.टैक्सपेयर अपने इंटरेस्ट इनकम को ITR में ईयर ऑफ एक्रुअल (year of accrual) के साथ ईयर ऑफ रिसीप्ट (year of receipt) में दिखा सकते हैं. यानी, आप ब्याज का ब्योरा हर साल के हिसाब से दे सकते हैं या उस वर्ष भी दे सकते हैं जब आपको FD का रिटर्न मिलता है, लेकिन टैक्स एक्सपर्ट्स का सुजाव है कि FD पर मिलने वाले इंटरेस्ट को ईयर ऑफ एक्रुअल में दिखाएं.

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बैंक की तरफ से TDS काटे जाते हैं

हर साल के ब्याज पर बैंक की तरफ से TDS भी काटा जाता है, जिसे आईटीआर फॉर्म 26AS में दिखा सकते हैं.इससे TDS और एनुअल इंटरेस्ट के आंकड़े में कोई अंतर नहीं होगा और टैक्स डिपार्टमेंट के नियमों का कोई उल्लंघन भी नहीं होगा. अगर आपकी इनकम एग्जेम्टेड लिमिट से कम है तो आपको मिलने वाले ब्याज पर TDS का पेमेंट नहीं करना पड़ता है. बैंक 10 फीसदी की दर से टीडीएस काटते हैं.
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