Mission Paani: इंडस्ट्री और होटल्स के लिए पानी रिसाइकल करना होगा जरूरी

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Updated: August 27, 2019, 12:16 PM IST
Mission Paani: इंडस्ट्री और होटल्स के लिए पानी रिसाइकल करना होगा जरूरी
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार (Prime Minister Narendra Modi) जल जीवन मिशन (Jal Iivan Mission) पर साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये खर्च करेगी.

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार (Prime Minister Narendra Modi) 'जल जीवन मिशन' (Jal Iivan Mission) पर साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये खर्च करेगी.

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  • Last Updated: August 27, 2019, 12:16 PM IST
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केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार (Prime Minister Narendra Modi) 'जल जीवन मिशन' (Jal Iivan Mission) पर साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये खर्च करेगी. इसके जरिए पानी रिसाइकलिंग (Water Recycling) पर जोर दिया जाएगा. साथ ही, इंडस्ट्री और होटल्स के पानी रिसाइकल करना लिए अनिवार्य होगा. आपको बता दें कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लालकिले पर दिए गए अपने भाषण में (Prime Minister Narendra Modi) जल जीवन मिशन (Jal Iivan Mission) का ऐलान किया है. इस मिशन के जरिए मोदी सरकार का लक्ष्य देश के हर घर तक पानी पहुंचाना है. इसको लेकर केंद्र और राज्य सरकार मिलकर काम कर रही है.

क्या है जल जीवन मिशन- देश में आधे से अधिक घर ऐसे हैं जिनमें पीने का स्वच्छ पानी नहीं है. इसीलिए जल जीवन मिशन की शुरुआत की गई है. प्रधानमंत्री मोदी ने इसके जरिए हर घर में जल यानी पीने का पानी को लाने का संकल्प किया है. इस योजना पर 3.5 लाख करोड़ रुपये खर्च करने की तैयारी है.



ऐसे काम करेगी ये योजना- बारिश के पानी को रोकने, समुद्री पानी, माइक्रो इरिगेशन, पानी बचाने का अभियान शुरू किए जाएंगे. साथ ही, सामान्य नागिरकों को भी इसके महत्व की जानकारी दी जाएगी. इसके अलावा बच्चों को पानी के महत्व की शिक्षा दी जाएगी.

देश में पानी की समस्या बेहद गंभी हो चुकी है- पेयजल की समस्या के बारे में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जैन मुनि महुड़ी ने लिखा है कि भविष्य में एक दिन ऐसा आएगा जब पानी किराने की दुकान में बिकेगा. 100 साल पहले उनकी कही बात सही हो गई है. आज हम किराने की दुकान से पानी खरीदते हैं. उन्होंने कहा कि जल संचय का यह अभियान सरकारी नहीं बनना चाहिए, जन सामान्य का अभियान बनना चाहिए.

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जल प्रबंधन में भारत काफी पीछे-जल प्रबंधन के मामले में देश के कई बड़े राज्ये बहुत पीछे छूट गए है.  नीति आयोग ने शुक्रवार को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के जल प्रबंधन तरीकों को लेकर रैंकिंग जारी की. इस रैंकिंग में गुजरात सबसे ऊपर और दिल्ली सबसे नीचे रही जबकि सबसे ज्यादा बेहतरी हरियाणा में देखने को मिली है.
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आयोग ने यह भी कहा है कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य और दिल्ली जैसे राज्य, जो अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान देते हैं, उनका इंडेक्स काफी कम है.

आपको बता दें कि यह इंडेक्स 9 मानकों के आधार पर तय होता है-जल संसाधन को पुनर्जीवित करना, भूमिगत जल के स्रोतों में बढ़ोतरी, सिंचाई के सप्लाइ-साइड का प्रबंधन, वॉटरशेड डिवेलपमेंट, सिंचाई में भागीदारी, खेतों में पानी के इस्तेमाल के सतत तरीके, ग्रामीण इलाकों में पीने का पानी, शहरी इलाकों में पानी की सप्लाइ और सैनिटेशन और नीति और प्रशासन.

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First published: August 27, 2019, 12:06 PM IST
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