India Toy Fair 2021: जानिए देश के पहले डिजिटल टॉय फेयर जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें...

वर्चुअली इंडिया टॉय फेयर 2021

वर्चुअली इंडिया टॉय फेयर 2021

टॉय फेयर केवल एक व्यापारिक या आर्थिक कार्यक्रम भर नहीं है. ये कार्यक्रम देश की सदियों पुरानी खेल और उल्लास की संस्कृति को मजबूत करने की एक कड़ी है. आइए जानते हैं इससे जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें...

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 27, 2021, 3:39 PM IST
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नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने शनिवार को वर्चुअली इंडिया टॉय फेयर 2021 का (India Toy Fair 2021) उद्घाटन किया. इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि ये पहला टॉय फेयर केवल एक व्यापारिक या आर्थिक कार्यक्रम भर नहीं है. ये कार्यक्रम देश की सदियों पुरानी खेल और उल्लास की संस्कृति को मजबूत करने की एक कड़ी है. सिंधु घाटी सभ्यता, मोहनजो-दारो और हड़प्पा के दौर के खिलौनों पर पूरी दुनिया ने रिसर्च की है. आइए जानते हैं इससे जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें...

1. ये है फेयर का टाइटल स्पॉन्सर- देश का पहला ऑनलाइन खिलौना मेले का टाइटल स्पॉन्सर रिलायंस रिटेल के स्वामित्व वाली सबसे पुरानी ब्रिटिश बहुराष्ट्रीय खिलौना रिटेलर कंपनी हैमलेज (Hamleys) है. यह कंपनी मेले में अपने वर्चुअल बूथ की स्थापना करेगी. बहुराष्ट्रीय रिटेलर मुंबई, दिल्ली और अहमदाबाद में अपने टॉय सर्कल भी लॉन्च करेगा. हैमलेज की एक CSR गतिविधि खिलौना किट और आंगनबाड़ी वर्कर के बच्चों के लिए खेल सामग्री प्रदान करेगी.

2. 1,000 से अधिक होंगे स्टाल- मेले के मुख्य आकर्षणों में 1,000 से अधिक स्टालों के साथ एक वर्चुअल प्रदर्शनी भी होगी, साथ ही पैनल चर्चा और विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा ज्ञान सत्र भी होंगे. खिलौना-आधारित शिक्षण, शिल्प प्रदर्शन, क्विज कॉम्पिटिशन, वर्चुअल टूर, उत्पाद लॉन्च आदि शामिल हैं.



3. बनेंगे 8 टॉय मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स- केंद्र सरकार ने देश के विभिन्न राज्यों में 8 टॉय मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स (Toy manufacturing clusters) को मंजूरी दी है. कलस्टरों के जरिए देश के पारंपरिक खिलौना उद्योग को बढ़ावा दिया जाएगा. इन कलस्टरों के निर्माण पर 2,300 करोड़ रुपए की लागत आएगी. कलस्टरों में लकड़ी, लाह, ताड़ के पत्ते, बांस और कपड़ों के खिलौने बनेंगे.
India Toy Fair 2021

4. ये राज्य हैं शामिल- केंद्र की योजना के मुताबिक सबसे ज्यादा मध्य प्रदेश में 3 कलस्टर बनेंगे. इसके बाद राजस्थान में 2, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडू में एक-एक टॉय मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स का निर्माण होगा. गौरतलब है कि अभी स्फूर्ति योजना के तहत कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में दो टॉय क्लस्टर्स बनाए गए हैं.

5. कर्नाटक में होगा देश का पहला खिलौना क्लस्टर- देश का पहला खिलौना क्लस्टर कर्नाटक में बनेगा. यह बेंगलुरु से 365 किमी दूर स्थित कोप्पल जिले के भानापुर गांव में बनेगा. इसका निर्माण इसी साल दिसंबर तक पूरा हो जाने की उम्मीद है. कर्नाटक सरकार के मुताबिक, क्लस्टर की 400 एकड़ जमीन में से 300 एकड़ एक विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) होगा जो निर्यात के लिए समर्पित होगा. बाकी घरेलू बाजार में पूरा होगा. इसे तैयार करने में करीब 5,000 करोड़ रुपये तक की लागत आएगी.

6. लगेंगे 100 से अधिक यूनिट- इस क्लस्टर में खिलौना निर्माण की 100 से अधिक यूनिट्स होंगे. इससे करीब 25,000 से अधिक प्रत्यक्ष और एक लाख के आसपास अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा. उन्होंने कहा कि खिलौना निर्माण उद्योग श्रमिक-उन्मुख है और इसमें अधिकांश श्रमिक महिलाएं होती हैं. इसलिये कोप्पल में शुरू होने वाला यह खिलौना क्लस्टर महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है.

7. महिला सशक्तिकरण को मिलेगा बढ़ावा- 'वोकल फॉर लोकल' के दृष्टिकोण के अनुरूप ही खिलौना निर्माण को बढ़ावा देने के लिए कोप्पला भारत का पहला खिलौना विनिर्माण क्लस्टर बनेगा. महिलाएं प्रति दिन 200 रुपये कमा रही हैं, वे प्रति दिन 600 रुपये कमा सकेंगी. खिलौना निर्माण उद्योग में महिलाओं की बड़ी भागीदारी रही है.

8. पर्यावरण के अनुकूल हैं ये खिलौने- चीजों भारतीय खिलौने प्राकृतिक और पर्यावरण के अनुकूल चीजों से बनते हैं, उनमें इस्तेमाल होने वाले रंग भी प्राकृतिक और सुरक्षित होते हैं. जो इकॉलजी और साइकॉलजी दोनों के लिए बेहतर होते हैं. इन खिलौनो में कम से कम प्लास्टिक का उपयोग होता है. ऐसी चीजों का उपयोग जिन्हें से रिसायकिल किया जा सकता है.

9. मनोरंजन और मनोविज्ञान से भरपूर- भारतीय खेल और खिलौनों की ये खूबी रही है कि उनमें ज्ञान होता है, विज्ञान भी होता है, मनोरंजन होता है और मनोविज्ञान भी होता है. उदाहरण के तौर पर लट्टू को ही ली रहें. जब बच्चे लट्टू से खेलने सीखते हैं तो लट्टू खेल खेल में ही उन्हें गुरुत्वाकर्षण और संतुलन का पाठ पढ़ा जाता है. नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में प्ले-आधारित और गतिविधि-आधारित शिक्षा को बड़े पैमाने पर शामिल किया गया है. ये एक ऐसी शिक्षा व्यवस्था है जिसमें बच्चों में पहेलियों और खेलों के माध्यम से तार्किक और रचनात्मक सोच बढ़े, इस पर विशेष ध्यान दिया गया है.

10. खराब गुणवत्ता वाले सस्ते खिलौनों के आयात पर लगेगी रोक- सरकार को खराब गुणवत्ता वाले सस्ते खिलौनों को देश में आयात किए जाने की बहुत शिकायतें मिली थीं, जो भारतीय खिलौना उद्योग पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहे थे. इस मामले की एक समिति द्वारा जांच की गई जिसमें पाया गया कि 30 प्रतिशत आयातित प्लास्टिक के खिलौने में बड़ी मात्रा में रसायन और भारी धातुएं थीं, जो निर्धारित स्तरों से परे हैं. अन्य खिलौने भी गुणवत्ता में कमी पाए गए. इससे खिलौनों के लिए गुणवत्ता नियंत्रण आदेश जारी किया गया. यह पहल सुनिश्चित करेगी कि भारतीयों को गुणवत्तापूर्ण खिलौनों की सुविधा मिले.
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