PMC बैंक की तरह आपके बैंक पर भी लग जाए बैन तो जानिए क्या होगा, क्या आपका पैसा बचेगा?

PMC बैंक की तरह आपके बैंक पर भी लग जाए बैन तो जानिए क्या होगा, क्या आपका पैसा बचेगा?
PMC बैंक

PMC बैंक जैसी स्थिति में आपको खाते से जुड़े इंश्योरेंस के ​जरिए अधिकतम एक लाख रुपये तक मिल सकता है. यह नियम बैंक के सभी ब्रांच पर लागू होता है. इसमें मूलधन और ब्‍याज दोनों को शामिल किया जाता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 26, 2019, 10:15 PM IST
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नई दिल्ली. भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) ने बीते मंगलवार को पंजाब एंड महाराष्ट्र कॉपरेटिव बैंक (PMC Bank) पर अगले 6 महीने के लिए लेनदेन पर प्रतिबंध लगा दिया है. RBI ने यह प्रतिबंध बैंक द्वारा अनियमितता बरतने को लेकर लगाया है. आरबीआई के कड़े प्रतिबंध के बाद अब इस बैंक के ग्राहक 10 हजार रुपये से अधिक नहीं निकाल सकेंगे. केवल निकासी (Cash Withdrawal) को लेकर ही नहीं, बल्कि आरबीआई ने PMC पर कई अन्य प्रतिबंध भी लगाया है. इस खबर के बाद से ही अब बैंक के खाताधारकों (Account Holders) को उनका पैसा डूबने का डर सता रहा है. ऐसे में आपके मन में भी एक सवाल होगा कि जिस बैंक में आपका पैसा है, उस बैंक पर ​यदि इस तरह का प्रतिबंध लग जाए तो क्या होगा. आज हम आपको इसी के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं.

इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में आरबीआई की तरफ से नियुक्त प्रशासक जे बी भोरिया के हवाले से लिखा गया है, 'मैं लोागों को आश्वस्त करता हूं कि उनके एक लाख रुपये तक की रकम सुरक्षित है. उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है.' उनके हवाले से आगे लिखा गया है कि पीएमसी बैंक के पास बहुत सी संपत्ति व पूंजी है. स्थिति को संभालने की कोशिश की जा रही है.

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1 लाख रुपये सुरक्षित



एक सवाल यह भी है कि क्या इस तरह की परेशानी छोटे बैंकों में ही होती है? क्या आरबीआई इस तरह का प्रतिबंध बड़े बैंकों पर लगा सकता है? आपको बता दें कि आरबीआई के निर्देश के मुताबिक, सभी कॉमर्शियल बैंक (Commercial Bank) और कॉपरेटिव बैंक (Co-operative Bank) का डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) से बीमा होता है. आरबीआई के इस प्रावधान में केवल प्राथमिक कॉपरेटिव सोसाइटी ही शामिल नहीं हैं. ऐसे में यदि आपका बैंक दिवालिया घोषित हो गया है तो आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है. एक खाताधारक के रूप में आपको खाते से जुड़े इंश्योरेंस के ​जरिए अधिकतम एक लाख रुपये तक मिल सकता है. यह नियम बैंक के सभी ब्रांच पर लागू होता है. इसमें मूलधन और ब्‍याज दोनों को शामिल किया जाता है. यानी अगर दोनों जोड़कर 1 लाख से ज्यादा है तो सिर्फ 1 लाख ही सुरक्षित माना जाएगा.

किस तरह के डिपॉजिट होते हैं कवर

DICGC के तहत ऐसी परिस्थिति में बचत, फिक्स्ड, करंट, रिकरिंग समेत अन्य तरह के डिपॉजिट इंश्योर किया जाता है. इनमें विदेशी सरकार द्वारा जमा रकम, केंद्र/राज्य सरकार का डिपॉजिट, इंटर बैंकिंग डिपॉजिट , राज्य के भूमि विकास बैंक का जमा, भारत से बाहर की गई कोई डिपॉजिट और आरबीआई की मंजूरी से छूट प्राप्त कोई डिपॉजिट शामिल है.

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तब क्या होगा, जब एक ही बैंक के कई ब्रांच में आपका खाता है

DICGC के बीमा कवरेज में एक बैंक की सभी शाखा में किसी एक व्यक्ति के अकाउंट को एक यूनिट माना जायेगा. ऐसे में आपको केवल एक लाख रुपये ही मिलेंगे. हालांकि, अलग-अलग बैंक के अकाउंट में रखी गई रकम के मामले में आपको इस तरह की स्थिति में हर बैंक से कम से कम एक लाख रुपये मिल जाएंगे.

ज्वाइंट अकाउंट के मामले में क्या हो सकता है?

आरबीआई के नियमों के अनुसार, सिंगल और ज्वाइंट अकाउंट को एक ही यूनिट माना जाता है. मान​ लीजिए किसी बैंक में आपका एक अकाउंट है और दूसरा ज्वाइंट अकाउंट है. ऐसे स्थिति में अगर बैंक फेल हो जाता है तो DICGC के बीमा अकाउंट के हिसाब से आपको दोनों अकाउंट का मुआवजा मिलेगा.
First published: September 26, 2019, 9:02 PM IST
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