Akshaya Tritiya 2021: अक्षय तृतीया पर एक्सचेंज से खरीदें सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड! जानें कैसी हैं मुनाफे को लेकर उम्‍मीदें

सॉवरेन गोल्‍ड बॉन्‍ड का एक कूपन रेट होता है. ये एक्सचेंज पर सूचीबद्ध होने पर एक तय बाजार भाव के साथ आता है.

सॉवरेन गोल्‍ड बॉन्‍ड का एक कूपन रेट होता है. ये एक्सचेंज पर सूचीबद्ध होने पर एक तय बाजार भाव के साथ आता है.

Akshaya Tritiya 2021: गोल्ड बॉन्ड (Gold Bonds) को स्टॉक एक्सचेंजों पर शेयर्स की तरह खरीदा या बेचा जा सकता है. इसके लिए लिक्विडिटी पर ध्यान देने की है जरूरत. खुदरा निवेशक (Retail Investors) इन्‍हें डीमैट अकाउंट के जरिये खरीद और बेच सकते हैं.

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नई दिल्‍ली. देश के काफी लोग अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya 2021) पर सोना खरीदना पसंद करते हैं. वहीं, बड़ी संख्‍या में निवेशक बॉन्ड या फंड के जरिये भी गोल्‍ड (Gold Bonds/Gold Funds) में निवेश करते हैं. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने अभी तक इस फाइनेंशियल ईयर के लिए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (Sovereign Gold Bond) जारी करने की योजना की जानकारी नहीं दी है. इसके बावजूद आप स्टॉक एक्सचेंजों से सॉवरेन गोल्‍ड बॉन्‍ड खरीद सकते हैं. ये लिस्टेड हैं और इनकी ट्रेडिंग कैश सेगमेंट में शेयर्स के साथ होती है. खुदरा निवेश (Retail Investors) इन्हें डीमैट अकाउंट के जरिए खरीद और बेच सकते हैं.

बिड-ऑफर स्‍प्रेड जितना कम, निवेशक को ज्‍यादा फायदा

सॉवरेन गोल्‍ड बॉन्‍ड का एक कूपन रेट होता है. ये एक्सचेंज पर सूचीबद्ध होने पर एक तय भाव (Market Rate) के साथ आता है. आरबीआई ने अभी तक सॉवरेन गोल्‍ड बॉन्‍ड को 49 बार लॉन्च किया है. केंद्रीय बैंक ने हर बार औसतन 1.25 टन गोल्ड डिजिटल या पेपर फॉर्म में जारी किया है. इनमें से 19 की एक्सचेंज पर प्रति दिन की ट्रेडिंग वॉल्यूम 100 या अधिक यूनिट की है. हालांकि, कई सॉवरेन गोल्‍ड बॉन्‍ड के साथ कम लिक्विडिटी की समस्या है. आपके लिए इन्हें मार्केट प्राइस पर खरीदना मुश्किल होगा. आपको इसके लिए कुछ अधिक प्राइस देना होगा. इस अंतर को बिड-ऑफर स्प्रेड कहा जाता है. यह स्प्रेड जितना कम होगा, आपके लिए उतना ही अच्छा है.

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बॉन्‍ड की खरीदारी में यील्‍ड टू मैच्‍योरिटी होती है काफी अहम

अगर आप सेकेंडरी मार्केट से कोई बॉन्ड खरीदते हैं तो यील्ड टू मैच्योरिटी (YTM) काफी अहम होती है. इससे आपको पता चलता है कि अगर आप बॉन्ड को मैच्योरिटी तक रखेंगे तो आपको कितना मुनाफा (Profit) मिलेगा. हालांकि, एक सॉवरेन गोल्‍ड बॉन्‍ड के लिए यील्‍ड टू मैच्‍योरिटी का महत्व नहीं होता और आप इसके मार्केट प्राइस की इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) की वेबसाइट पर जारी किए गए 999 प्योरिटी के गोल्ड के क्लोजिंग रेट से तुलना कर सकते हैं. सभी ब्रोकर्स एक्सचेंज के जरिए सॉवरेन गोल्‍ड बॉन्‍ड को खरीदने की सुविधा देते हैं.

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अगर एसजीबी में करते हैं निवेश तो कैसी रह सकता है रिटर्न

दो साल में अच्छी तेजी से बाद गोल्ड की कीमतें नीचे आईं. अभी भी लगातार तेजी के बावजूद ये सर्वोच्‍च स्‍तर से करीब 9,000 रुपये प्रति 10 ग्राम नीचे चल रही हैं. क्‍वांटम एएमसी के सीनियर फंड मैनेजर चिराग मेहता ने बताया कि इस साल की शुरुआत से गोल्ड पर प्रेशर है. इसका कारण डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड है, जो अमेरिका में जल्द इकोनॉमिक रिकवरी की उम्मीद के कारण मजबूत हुई है. हालांकि, पिछले एक महीने में गोल्ड की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है. कोरोना के मामले बढ़ने के कारण इनवेस्टर्स इक्विटी जैसे जोखिम वाले एसेट्स में अपना निवेश कम कर सकते हैं और इसका फायदा गोल्ड को मिलने की उम्‍मीद है. इससे गोल्ड की कीमतों में दोबारा तेजी का दौर आ सकता है.

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