Good News: इस सेक्‍टर में पैदा होंगी 1.2 करोड़ नौकरियां, ग्रामीण क्षेत्र को मिलेगा बड़ा मौका

अमूल के एमडी आरएस सोढी ने कहा कि देश का डेयरी सेक्‍टर 10 साल में 110 अरब डॉलर का हो जाएगा.

डेयरी प्रोडक्‍ट्स प्रोड्यूसर अमूल (Amul) के प्रमुख आरएस सोढी ने कहा कि ये सेक्‍टर देश में रोजगार (Employment) की तस्‍वीर बदल सकता है. उन्‍होंने कहा कि देश का मिल्‍क मार्केट (Milk Market) 5 फीसदी की रफ्तार से बढ़ रहा है. वहीं, ग्‍लोबल मिल्‍क मार्केट 1.8 फीसदी की रफ्तार से बढ़ रहा है. ऐसे में अगले 10 साल में डेयरी सेक्‍टर (Dairy Sector) में बड़ी संख्‍या में रोजगार पैदा होगा.

  • Share this:
    नई दिल्‍ली. कोरोना वायरस महामारी (Coronavirus in India) के कारण देश में नौकरियों को लेकर बड़ा संकट (Jobs Crisis) पैदा हो गया है. लॉकडाउन के बीच लाखों लोगों की नौकरियां चली गई हैं तो करोड़ों का रोजगार छिन गया है. इस बीच डेयरी उद्योग ने नौकरियों को लेकर उम्‍मीद जगाई है. गुजरात को-ऑपरेटिव मिल्‍क मार्केट फेडरेशन लिमिटेड यानी अमूल (Amul) के प्रबंध निदेशक (MD) आरएस सोढी ने दावा किया है कि डेयरी सेक्‍टर अगले 10 साल में 1.2 करोड़ नई नौकरियां (New Jobs) पैदा करेगा.

    'देश के डेयरी सेक्‍टर में निवेश की हैं बहुत संभावनाएं'
    सोढी ने बताया कि भारत में दुनिया का 21 फीसदी दुग्‍ध उत्‍पादन (Milk Production) करता है. वहीं, भारत का मिल्‍क मार्केट (Indian Milk Market) 5 फीसदी की रफ्तार से बढ़ रहा है. इसके मुकाबले वैश्विक मिल्‍क मार्केट (Global Milk Market) 1.8 फीसदी की तेजी से वृद्धि कर रहा है. उन्‍होंने कहा कि अमूल ने विदेश में निवेश नहीं किया है क्‍योंकि मिल्‍क मार्केट और ग्रोथ दोनों भारत में ही हैं. उन्‍होंने कहा कि भारत के डेयरी सेक्‍टर से जुड़े एनिमल ब्रीडिंग और फीडिंग से लेकर लॉजिस्टिक्‍स व पैकेजिंग तक निवेश की बड़ी संभावनाएं हैं.

    ये भी पढ़ें- 3 साल में भारतीयों ने UPI से किए 1882 करोड़ लेनदेन, 3 साल में Visa-Mastercard को छोड़ देगा पीछे

    10 साल में 110 अरब डॉलर का होगा डेयरी सेक्‍टर
    अमूल के एमडी ने कहा कि भारत में डेयरी सेक्‍टर अगले 10 साल में 110 अरब डॉलर का हो जाएगा. ऑल इंडिया मैनेजमेंट एसोसिएशन (AIMA) के ऑनलाइन संवाद में उन्‍होंने कहा कि जहां भारत दुनिया के लिए खाद्य सामग्री आपूर्तिकर्ता (Food Provider) नहीं बन सकता है. वहीं, हम निश्चित तौर पर पूरी दुनिया को डेयरी उत्‍पादों की आपूर्ति करने की स्थिति में हैं. उन्‍होंने कहा कि किसानों को उनके उत्‍पाद की अच्‍छी कीमत मिलनी चाहिए. इसके लिए जरूरी है कि हम भारतीय बाजारों पर ज्‍यादा ध्‍यान दें. अभी भारतीय उद्योग अमेरिका और यूरोप को निर्यात करने में पैसा गंवा रहे हैा.

    ये भी पढ़ें- डिजिटल हेल्‍थ मिशन में डाटा प्राइवेसी पर केंद्र ने मांगे सुझाव, 3 सितंबर तक दे सकते हैं राय

    किसानों की गरीबी के लिए अर्बन लॉबी है जिम्‍मेदार
    सोढी ने कहा कि भारतीय किसानों की गरीबी के लिए देश की अर्बन लॉबी (Urban Lobby) जिम्‍मेदार है. इस लॉबी ने ये भ्रम फैला दिया है कि कृषि उत्‍पादों की कीमतें (Food Prices) बढ़ाना अर्थव्‍यवस्‍था के लिए नुकसानदायक है. जब भी हम दूध की कीमत में 1 से 2 रुपये प्रति ली्रअर की वृद्धि करते हैं तो वो सुर्खियां बन जाती है. देश के तमाम अखबार और न्‍यूज चैनल खाने-पीने चीजों की महंगाई का मुद्दा उछालने लगते हैं. इसके बाद एक पिज्‍जा पर 400 रुपये खर्च कर देने वाले लोग भी महंगाई का हल्‍ला मचाने लगते हैं. इसलिए देश में किसानों की हालत खराब है.

    पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.