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यात्रियों को आखिर Indian Railways क्यों नहीं दे रहा बेड रोल, रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ने बताई असली वजह

रेलवे बोर्ड के चेयरमैन वीके यादव ने बताया कि यात्रियों से बेडरोल का किराया नहीं लिया जाता है.
रेलवे बोर्ड के चेयरमैन वीके यादव ने बताया कि यात्रियों से बेडरोल का किराया नहीं लिया जाता है.

इंडियन रेलवे (Indian Railways) इस समय पूरी तरह से आरक्षित ट्रेनें (Reserved Trains) ही चला रहा है. यात्रियों का कहना है कि रेलवे किराया (Fare) तो पूरा ले रहा है, लेकिन बेड सीट, तकिया, तौलिया और कंबल (Bedroll) उपलब्‍ध नहीं करा रहा है. इस पर रेलवे बोर्ड के चेयरमैन वीके यादव (VK Yadav) ने कहा कि यात्रियों से बेडरोल का कोई किराया नहीं लिया जाता है. साथ ही उन्‍होंने बेडरोल नहीं देनी की असली वजह भी बताई.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 2, 2020, 7:41 AM IST
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नई दिल्‍ली. कोरोना काल में भारतीय रेलवे (Indian Railways) कई नये नियम और शर्तों के साथ ट्रेनें चला रहा है. कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए सीमित पैसेंजर ट्रेनें (Passenger Trains) चलाई जा रही हैं. ट्रेनों और स्टेशन परिसरों में कोरोना प्रोटोकॉल (Corona Protocol) का सख्‍ती से पालन कराया जा रहा है. पटरियों पर सिर्फ आरक्षित ट्रेनें (Fully Reserved Trains) ही चलाई जा रही हैं. चलती ट्रेन में यात्रियों को ना ही गर्मागर्म भोजन परोसा जा रहे है और ना ही एयर‍कंडीशंड कोच (AC Coaches) में बेडरोल यानी बेड सीट, तकिया, तौलिया व कंबल उपलब्ध कराया जा रहा है. सवाल उठ रहे थे कि भारतीय रेलवे यात्रियों को बेडरोल नहीं दे रहा है तो किराया क्यों पूरा वसूल रहा है. इस पर रेलवे बोर्ड के चेयरमैन वीके यादव (VK Yadav) ने बताया कि 1999 से जारी व्यवस्था के मुताबिक यात्रियों से बेड रोल का शुल्क नहीं लिया जाता है. कोरोना काल से पहले भी बेडरोल के लिए रेलवे शुल्क नहीं लेता था.

स्वास्थ्य के मद्देनजर रेलवे नहीं दे रहा है बेड रोल
कोविड-19 का दौर ना सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया के लिए चुनौती बना हुआ है. यही चुनौती भारतीय रेलवे के सामने भी है. यादव ने कहा कि भारतीय रेलवे के पास बेडरोल की कोई कमी नहीं है. कोरोना संकट से पहले के समय की तरह रेलवे यात्रियों को उपलब्‍ध भी कराया जा सकता है, लेकिन कोविड-19 के प्रसार की आशंका को देखते हुए फिलहाल यह सेवा नहीं दी जा रही है. सीआरबी ने बताया कि सभी बेडरोल एक ही जगह धुलते हैं. ऐसे में स्वास्थ्य सुरक्षा के मद्देनजर यह जोखिम भरा हो सकता है. उन्होंने कहा कि रेलवे बेडरोल के लिए यात्रियों से अलग से पैसा नहीं लेता है.

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फिलहाल रेलवे इतनी ट्रेनों का कर रहा संचालन


कोरोना काल से पहले रेलवे 12,000 से ज्‍यादा ट्रेनों का संचालन करता था. अभी महज 908 रेग्‍युलर स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं. यही नहीं, वेटिंग लिस्ट यात्रियों को कंफर्म टिकट उपलब्‍ध कराने के लिए रेलवे 21 सितंबर 2020 से 20 जोड़ी क्लोन ट्रेनें भी चला रहा है. इसके अलावा 566 फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनों का भी संचालन किया जा रहा है. लॉकडाउन की वजह से बंद करने के बाद रेलवे जुलाई 2020 से 238 कोलकाता मेट्रो ट्रेनें भी चला रहा है. वहीं, मुंबई की जीवन रेखा मानी जाने वाली सब-अर्बन ट्रेनों को भी शुरू कर दिया गया है. ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मुंबई सब-अर्बन में कुल 2,773 ट्रेनें चलाई जा रही हैं. इसी तरह कोलकाता में भी 843 सब-अर्बन ट्रेनें चलाई जा रही हैं.

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रेलवे पैसेंजर ट्रेनों को मेमू ट्रेनों में करेगा तब्‍दील
ग्रामीण और कस्बाई इलाकों के रेल यात्रियों को ज्‍यादा सुविधा देने के लिए भारतीय रेलवे पैसेंजर ट्रेनों को मेमू ट्रेनों मे तब्‍दील करने की योजना बना रहा है. यही नहीं, लंबी दूरी का सफर करने वाली पैसेंजर ट्रेनों को मेल या एक्सप्रेस ट्रेन में बदलने की भी योजना है. रेलवे का दावा है कि इससे यात्रियों को अधिक आरामदायक सफर करने का अवसर मिलेगा और कम समय में गंतव्य तक पहुंच पाएंगे.
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