एफडी पर आपको नहीं मिल रहा मोटा रिटर्न? अपनाएं ये तरीका तो होगा फायदा

FD कम जोखिम वाले व्यक्तियों के लिए यह बेहतर विकल्प है
FD कम जोखिम वाले व्यक्तियों के लिए यह बेहतर विकल्प है

Fixed Deposit के जरिए एक तय समय अवधि पर आपके पास प​र्याप्त लिक्विडिटी उपलब्ध होती है. इसके कई दूसरे फायदे भी होते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 18, 2020, 5:55 AM IST
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फिक्स्ड डिपोजिट (Fixed deposit) को सबसे सहूलियत भरा निवेश विकल्प माना जाता है, खासकर तब, जब आप इनकम टैक्स स्लैब में आते हैं. कम जोखिम वाले उत्पादों के लिए कम जोखिम वाले व्यक्तियों के लिए यह बेहतर काम करता है. क्रेडिट रिस्क के अलावा इसमें लिक्विडिटी जोखिम और पुनः इन्वेस्टमेंट का रिस्क रहता है. अगर आप इंडिया पोस्ट, नेशनल बैंक्स और निजी सेक्टर में बड़े नामों में फिक्स्ड डिपोजिट करते हैं, तो जोखिम नगण्य है. हालांकि एक इन्वेस्टर लिक्विडिटी की जरूरतों की अनदेखी नहीं कर सकता है. लैड्रिंग से एड्रेस कर सकते हैं. इसका मतलब यह होता है कि अपना फिक्स्ड डिपोजिट टाइमलाइन में डालते हैं.

उदाहरण के लिए आपके पास फिक्स्ड डिपोजिट के लिए 5 लाख रूपये हैं, तो इन्हें एक साल, तीन साल और पांच साल के लिए पांच फिक्स्ड डिपोजिट में डालें, इससे आपके वित्तीय लक्ष्य में मदद मिलेगी. नियमित अंतराल पर ऐसा करते रहने से आपको नियमित अंतराल पर एफडी की मैच्योरिटी मिलती रहेगी.

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अगर आपको बीच में पैसों की आवश्यकता होगी तो आप एफडी परिपक्व होने से पहले भी पैसा निकाल सकते हैं. इसमें सिर्फ जरूरत की सीमा तक ही पैसे निकाले जा सकेंगे. उदाहरण के लिए अगर आपके पास पांच लाख की एक एफडी है और आपको मेडिकल इमरजेंसी के लिए 2 लाख रूपये चाहिए तो उन दो लाख रुपयों के लिए एफडी के पूरे पांच लाख रुपयों का ब्याज जाएगा. इसके अलावा अगर एक-एक लाख की पांच एफडी है, तो दो टूटने पर भी तीन का ब्याज मिलेगा.
लैडरिंग के भी पुनः इन्वेस्टमेंट की रिस्क कम हो जाती है. इसका मतलब है कि जब पुनः इन्वेस्टमेंट के समय कम पैसे मिलने की संभावना रहती है. एक साथ अपनी पूरी राशि इन्वेस्ट की है, तो आपको एफडी कम ब्याज पर करनी होगी. इसमें अर्थव्वस्था साइकिल में ब्याज दरों की कमी से ब्याज कम मिलता है.

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उदाहरण के लिए अगर आपने 2008 में SBI के साथ 10 फीसदी ब्याज दर पर एफडी कराई है और अगले साल वह पूरी होगी. इस बार पुनः SBI में ही इसे इन्वेस्ट करने पर आपको 6.5 फीसदी ब्याज ही मिल सकता है. इससे बचने के लिए अलग-अलग समय पर अलग-अलग जगह इन्वेस्टमेंट करना सही रहता है.
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