धूम्रपान करने वालों के लिए क्‍यों जरूरी है टर्म इंश्‍योरेंस, कैसे तय होगा प्रीमियम, जानें सबकुछ

इंश्‍योरेंस कंपनियां धूम्रपान करने वाले लोगों से टर्म इंश्‍योरेंस का ज्‍यादा प्रीमियम वसूलती हैं.
इंश्‍योरेंस कंपनियां धूम्रपान करने वाले लोगों से टर्म इंश्‍योरेंस का ज्‍यादा प्रीमियम वसूलती हैं.

किसी बीमा ग्राहक (Insurance) के लाइफ कवर का प्रीमियम (Premium) जॉब प्रोफाइल जोखिम के मुकाबले धूम्रपान की आदतों (Smoking Habits) से ज्‍यादा प्रभावित होता है. सॉफ्टवेयर इंजीनियर, बैंकर और मार्केटिंग कंसल्टेंट जैसे कम जोखिम वाले जॉब प्रोफाइल के लोगों के लिए प्रीमियम ज्‍यादा जोखिम वाले जॉब प्रोफाइल वाले पेशेवरों के मुकाबले कम है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 10, 2020, 5:24 PM IST
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नई दिल्‍ली. टर्म इंश्योरेंस (Term Insurance) ऐसा प्रोडक्‍ट है, जो बीमा अवधि के दौरान पॉलिसीहोल्‍डर (Policyholders) की अकाल मृत्यु के जोखिम को कवर करता है. यही नहीं, टर्म प्लान में इंश्‍योर्ड व्यक्ति को सबसे कम प्रीमियम (Lowest Premium) का भुगतान भी करना होता है. धूम्रपान करने वालों (Smokers) के जीवन में टर्म इंश्योरेंस अहम भूमिका निभाता है. यह आपके परिवार को आपके लोन (Loans) चुकाने और आपकी अनुपस्थिति में आर्थिक जरूरतों (Financial Requirements) के भुगतान में मदद करेगा. लाभार्थी या नामांकित को केवल इंश्‍योर्ड व्यक्ति की मौत पर लाभ का भुगतान किया जाता है.

धूम्रपान और जीवन बीमा प्रीमियम
धूम्रपान न केवल आपके स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि आपकी जीवन बीमा पॉलिसी के प्रीमियम को भी नुकसान पहुंचाता है. कई लाइफ इंश्‍योरेंस कंपनियों के नियमों के मुताबिक, किसी ग्राहक के लाइफ कवर का प्रीमियम जॉब प्रोफाइल के मुकाबले धूम्रपान की आदतों से ज्‍यादा प्रभावित होता है. सॉफ्टवेयर इंजीनियर, बैंकर और मार्केटिंग कंसल्टेंट जैसे कम जोखिम वाले जॉब प्रोफाइल के लोगों के लिए प्रीमियम ज्‍यादा जोखिम वाले जॉब प्रोफाइल वाले पेशेवरों की तुलना में कम है. ज्‍यादा जोखिम वाले पेशों में श्रमिक और जेल अधिकारी शामिल हैं.

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कैसे तय होता है जोखिम का स्‍तर


इंश्‍योरेंस के लिए जीवन बीमा कंपनियां उपभोक्ताओं को दो अलग-अलग खंडों धूम्रपान करने वाले और गैर-धूम्रपान वालों में बांटती हैं. नियमों और जोखिम प्रोफाइल को देखते हुए, प्रीमियम तय किया जाता है. इनमें अपेक्षाकृत कम जोखिम वाली जॉब प्रोफाइल और धूम्रपान करने वाला ज्‍यादा जोखिम वाला माना जाता है, जबकि धूम्रपान नहीं करने पर ज्‍यादा जोखिम वाले प्रोफाइल को भी कम रिस्‍क वाला माना जाता है. इसी आधार पर कम या ज्‍यादा प्रीमियम का भुगतान करना होता है.

धूम्रपान करने वालों के लिए प्रीमियम
धूम्रपान करने वालों के बीमा प्रीमियम का आकलन करने के लिए इंश्‍योरेंस कंपनी पिछले एक महीने में आपके तंबाकू के उपयोग की आदतों के बारे में पूछताछ करती हैं. इसमें सिगार, सिगरेट या यहां तक कि चबाने वाले चीजों समेत किसी भी तंबाकू आधारित उत्पादों का उपयोग शामिल होता है. धूम्रपान करने वाले व्यक्ति की ओर से दी गई जानकारी के आधार पर कंपनी यह निर्णय लेती है कि वह कम या लगातार धूम्रपान करने वाला है.

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बीमाकर्ता को दें सही जानकारी
नियमों के तहत और अन्यों विकल्पों पर विचार करने पर ही इंश्‍योरेंस कंपनी बीमा पॉलिसी प्रीमियम का फैसला करती है. अगर आप धूम्रपान करते हैं और जीवन बीमा पॉलिसी खरीदना चाहते हैं तो आपको उच्च प्रीमियम का भुगतान करने के डर के बिना बीमाकर्ता को सही जानकारी देनी होगी. अकसर कंपनियां बीमा ग्राहक को मेडिकल टेसट कराने के लिए कहती हैं. हालांकि, टेस्‍ट में निकोटीन को कवर करना व्यावहारिक रूप से असंभव है, भले ही आप कभी-कभी धूम्रपान करने वाले हों.

सस्ते प्रीमियम पर अपना जीवन सुरक्षित करें
धूम्रपान एक अच्छी आदत नहीं है, लेकिन यह कुछ लोगों के जीवन का हिस्सा बन जाती है. टर्म प्लान आपकी अनुपस्थिति में आपके परिजनों के भविष्य की वित्तीय सुरक्षा के लिए सबसे सुविधाजनक और प्रामाणिक तरीका है. हालांकि, कई बार देखा गया है कि धूम्रपान करने वाले लोग जीवन बीमा को उच्च प्रीमियम के रूप में देखने से बचते हैं. सौभाग्य से धूम्रपान करने वालों के लिए जीवन बीमा प्रीमियम के इनकार की समस्या को पूरा करने के लिए प्रमुख जीवन बीमा कंपनियां कम कीमत पर पर्याप्त बीमा राशि के साथ टर्म प्लान की पेशकश करती हैं.

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विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट
विश्व स्वास्थ्य संगठन की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लगभग 120 मिलियन लोग धूम्रपान करते हैं, जो दुनिया की कुल धूम्रपान करने वाली आबादी का 12 फीसदी है. रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में हर वर्ष तंबाकू के सेवन के कारण 10 लाख से ज्‍यादा लोग मारे जाते हैं. धूम्रपान करने वाली कुल आबादी में 70 प्रतिशत वयस्क पुरुष धूम्रपान करते हैं, जबकि वयस्क महिला धूम्रपान करने वालों की संख्या 13-15 फीसदी है. इंडियन हार्ट एसोसिएशन (IHA) के अनुसार, दुनिया की कुल आबादी का 20 फीसदी से कम होने के बावजूद भारत में तंबाकू उपभोक्ताओं की इतनी अधिक जनसंख्या के कारण देश पर दुनिया के हृदय रोग का बोझ 83 फीसदी है.
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