कोरोना काल में संगठनों का नया साथी बना Kutumb ऐप, मिल रही है फ्री पेमेंट गेटवे की सुविधा

स्वतंत्र वर्मा और अभिषेक केजरीवाल

स्वतंत्र वर्मा और अभिषेक केजरीवाल

कुटुंब ऐप (Kutumb App) अभी फ्री पेमेंट गेटवे की सुविधा भी प्रदान कर रहा है जिसका महामारी के दौर में एनजीओ और समाज सेवी संस्थाएं लाभ उठा रही हैं.

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नई दिल्ली. कुटुंब एप्लीकेशन (Kutumb Application) कोरोना काल में संगठनों की गतिविधियों को निरंतर जारी रखने हेतु एक महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म बनकर उभरा है. महामारी के आने और कोरोना गाइडलाइन के लागू होने के बाद जब एक के बाद एक सभी काम बंद होने लगे और लोग अपने लोगों से मदद लेने और अपने काम को करने में असमर्थ होने लगे तो कुटुंब ऐप (Kutumb App) वरदान बनकर उभरा है.

यह एप्लीकेशन आईआईटी बॉम्बे के अभिषेक केजरीवाल के दिमाग की उपज है. इस बार में जब हमने कुटुंब एप्लीकेशन के बिजनेस हेड, आईआईटी कानपुर से पढ़े स्वतंत्र वर्मा से बात की तो उन्होंने बताया कि यह पूर्ण रूप से स्वदेशी और भारत सरकार द्वारा स्टार्ट अप इंडिया के अंतर्गत मान्यता प्राप्त एप्लीकेशन है. कुटुंब पर संस्था अपना प्राइवेट अकाउंट बनवाती है और फिर संस्था अपन लोगों को इस पर जोड़ सकती है. कुटुंब पर आप फेसबुक, व्हाट्सऐप और टेलीग्राम जैसे विदेशी एप्प से ज्यादा बेहतर तरीके से अपने संगठन के लोगों को आपस में जोड़ सकते हैं और संगठन मजबूत करने के साथ अपने विचारों को अपनों के बीच में चर्चा के लिए रख सकते हैं.

फ्री पेमेंट गेटवे की सुविधा 

वर्मा ने बताया कि कोरोना काल में बहुत सी प्रामाणिक सामाजिक संस्थाएं इस पर दान भी इक्कट्ठा करने का काम कर रही हैं जिससे उन्हें तमाम लोगों की मदद करने में आम जनता का सहयोग और शक्ति मिल रही है. यह प्लेटफॉर्म अभी फ्री पेमेंट गेटवे की सुविधा भी प्रदान कर रहा है जिसका महामारी के दौर में एनजीओ और समाज सेवी संस्थाएं लाभ उठा रही हैं. पहले इन संगठनों को दान देंने के लिए बिचौलियों से संपर्क करना पड़ता था जिससे फंड्स के तमाम गबन की खबरें आती थी पर अब इन संस्थाओं से जुड़े लोग या संस्थाओं के कार्य प्रणाली से प्रभावित लोग पेमेंट गेटवे के माध्यम से डायरेक्ट ऑनलाइन दान दे सकते हैं और दान सीधे संस्था के रजिस्टर्ड खाते में जमा हो जाता है और दान की गई राशि का रसीद भी प्राप्त हो जाती है.
नाम गोपनीय रखने कि शर्त पर एक संस्था के अध्यक्ष ने बताया कि पहले जहा संस्था को मिलने वाला आधा दान संस्था तक नहीं पहुच पाता था वहीं अब हम पहले से दुगना राहत कार्य गरीबों के लिए कर पा रहे जो कि खासकर इस महामारी के समय जीवनदाता के रूप में काम कर रहा. कुटुंब ऐप के बाकी और भी फीचर किसी न किसी तरीके से संगठन के लोगों को लाभ पहुचा रहे हैं.

क्या हैं इसके मुख्य फीचर ?

1. सुरक्षित और प्राइवेट ऐप संस्था के लिए



2. सभी मुख्य घोषणाओं के लिए अलग सूचना बोर्ड और हर एक मेंबर को नोटिफिकेशन, 100% पहुंच (फेसबुक पर पहुंच 5% से भी कम)

3. पंजीकृत संस्था सामाजिक कार्यों के लिए डोनेशन इकट्ठा कर सकते हैं

4. Digital ID Card - डिजिटल सदस्यता देना संस्था के लिए आसान

5. चैट ग्रुप्स - समूह चैट करें बिना किसी लिमिट के (Whatsapp 256 Member Only)

6. मेंबर का लीडरबोर्ड - कौन कितने लोग संस्था में जोड़ रहा

7. लाइव ऑडियो बातचीत बिना लिमिट सभी सदस्यों से एक साथ

इस प्लेटफॉर्म से जुड़ चुके हैं 10 हजार से ज्यादा संगठन

इसकी विशेषतओं को देखते हुए 10,000 से ज्यादा संगठन इस एप्लीकेशन से जुड़ चुके हैं. इनमे से मुख्य संस्थाएं निम्नलिखित हैं-

1. NOPRUF (राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा)

2. अखिल भारतीय मनरेगा कर्मचारी महासंघ, नई दिल्ली

3. कोरोना योध्दा कर्मचारी परिषद

4. All India Ayurveda Doctors & Students Association

5. शारीरिक शिक्षा एवं खेल विकास समिति

6. मराठा महासंघ

7. All Gujarat Nursing Union

8. All India Professional Photographers (AIPP)

9. Akhil Bhartiya Pharmacist Association

10. रेलवे कर्मचारी परिवार

11. भारतीय कलाकार संघ

12. सलून अँन्ड पार्लर असोसिएशन

13. मिशन शिक्षण संवाद

14. मुख्यमंत्री जन कल्याणकारी योजना प्रचार प्रसार अभियान (CMJKYPPA)

15. Bhartiya Kisan Union, BKU

16. उत्तर प्रदेश कृषि छात्र संघ

17. Delhi University Student and Alumni Group

18. TEACHING WITH TLM

19. पोल्ट्री व्यावसायिक

20. Teachers of Bihar

आंदोलन को धार देने के लिए BKU ने तकनीक को बनाया बड़ा हथियार

गौरतलब है कि भारतीय किसान यूनियन (BKU) ने कोरोना काल में अपने आंदोलन को धार देने के लिए इस एप्लीकेशन का सहारा लिया था. बीकेयू द्वारा इस एप्लीकेशन को 12 फरवरी को लॉन्च किया गया और इसी दिन इस एप्लीकेशन से 30 हजार लोग जुड़ गए थे. इसके अलावे पुरानी पेंशन बहाली के लिए देशभर में चलाए जा रहे आंदोलन के लिए भी इस एप्लीकेशन का सहारा लिया जा रहा है जिसमें 66 लाख कर्मचारियों तक इस मुहिम को पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है. कुछ संगठन जैसे कि अखिल भारतीय फार्मासिस्ट एसोसिएशन तथा ऑल इंडिया प्रोफेशनल फोटोग्राफर एसोसिएशन जैसी संस्थाओं के लिए देशभर में सदस्य बनाना पहली बार कुटुंब के जरिए ही संभव हो पाया है.

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