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1 अप्रैल 2021 से पहले ही लागू हो सकते हैं चारो लेबर कोड: रिपोर्ट

श्रम मंत्री संतोश कुमार गंगवार की अध्यक्षता में होने वाली बैठक का ट्रेड यूनियनों ने बहिष्कार किया.
श्रम मंत्री संतोश कुमार गंगवार की अध्यक्षता में होने वाली बैठक का ट्रेड यूनियनों ने बहिष्कार किया.

सितंबर 2020 में संसद पास किए गए लेबर कोड (Labour Code) को 1 अप्रैल 2020 से पहले ही लागू किया जा सकता है. जनवरी के अंत तक ​इन कोड के तहत सभी नियमों को अंतिम रूप दे दिया जाएगा. ट्रेड यूनियनों ने इन कोड को लेकर सरकार की बैठक का बहिष्कार भी किया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 14, 2021, 9:02 AM IST
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नई दिल्ली. पिछले साल सितंबर महीने में संसद में पास हो चुके 4 लेबर कोड (Labour Code) को तय प्लान के मुताबिक 1 अप्रैल से पहले ही लागू किया जा सकता है. द हिंदु ने अपनी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी है. ये चार कोड - इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड 2020, कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी 2020, ऑक्युपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडिशन कोड 2020 हैं, जिन्हें सितंबर 2020 को संसद में पास किया जा चुका है. जबकि, वेजेज कोड को 2019 के मॉनसून सत्र में ही पास कर दिया गया था. केंद्रीय स्तर पर कुल 29 श्रम कानून (Labour Law) को मिलाकर 4 नये कोड बनाये गए हैं. इसके पहले तैयारी थी कि इन सभी चारों कानून को 1 अप्रैल 2021 तक लागू कर दिया जाए.

द हिंदु ने अपनी इस रिपोर्ट में लेबर एंड एम्प्लॉयमेंट सचिव अपूर्व चंद्रा के हवाले से लिखा है कि जनवरी महीने के अंत तक इन कोड के तहत तैयार नियमों को अंतिम रूप दे दिया जाएगा. एक बार इन नियमों को नोटिफाई कर दिए जाने के बाद यह लागू हो जाएंगे.

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ट्रेड यूनियनों ने सरकार की बैठक का बहिष्कार किया
11 जनवरी को सेंट्रल ट्रेड यूनियनों - ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस, इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस, हिंद मज़दूर सभा, सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनिन्स, ऑल-इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर, ट्रेड यूनियन कोऑर्डिनेशन कमिटी, सेल्फ एम्प्लॉइड विमेन एसोसिएशन, ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन्स, लेबर प्रोग्रेसिव फेडरेशन और यूनाइटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस ने एक साझा बयान जारी कर 12 जनवरी को वर्चुअल बैठक का बहिष्कार किया था. इस बैठक में श्रम मंत्री संतोष कुमार गंगवार (Santosh Kumar Gangwar) सेफ्टी एंड सोशल सिक्योरिटी नियमों पर चर्चा करने वाले थे.

इन ट्रेड यूनियनों के साझा बयान में कहा गया, 'हम नये श्रम कानून को लेकर चिंतित हैं. संसद में पूरे विपक्ष द्वारा चर्चा के बिना ही इन्हें पास करा दिया गया. हमारी आपत्ति को गंभीरता से लेने के बजाय सरकार इस तरह के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का​ त्रिपक्षीय परामर्श की औपचारिकता पूरी कर रही है. हमें पता है कि सरकार के स्तर पर कई तरह की फिजिकल बैठकें चल रही हैं. इसमें कृषि कानून को लेकर किसानों क साथ बैठक भी शामिल है.'

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80 फीसदी प्रावधान प्रस्तावित ड्राफ्ट में शामिल नहीं
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से संबंध रखने वाले भारतीय मज़दूर संघ ने इस बैठक में हिस्सा लिया और ऑक्युपेशल सेफ्टी नियम के तहत earned leave को 240 से बढ़ाकर 300 करने की मांग की है. मज़दूर संघ ने अपने बयान में कहा, 'इससे उन लोगों को नुकसान होगा, जिन्होंने अपने छुट्टी के अधिकार का इस्तेमाल न करते हुए नियोक्ता के लिए काम किया... प्रस्तावित ड्राफ्ट नियमों में संसद द्वारा पास किए गए 80 फीसदी प्रावधानों को शामिल नहीं किया गया है. नियम बनाने के लिए अधिकतर ताकत राज्यों को दिया गया है, जोकि खुद श्रम मामले में कोई रुचि नहीं दिखाते हैं.'
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