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कर्मचारियों की Earned Leave और PF नियमों में होंगे बदलाव? सरकार आज ले सकती है फैसला

सभी पक्षों के बीच यह चर्चा आमने-सामने बैठकर होगी. (सांकेतिक तस्वीर)
सभी पक्षों के बीच यह चर्चा आमने-सामने बैठकर होगी. (सांकेतिक तस्वीर)

लेबर कानून और पीएफ से जुड़े नियमों को लेकर आज लेबर मिनिस्ट्री, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और लेबर यूनियनों के बीच आमने-सामने बैठकर चर्चा होनी है. इस बैठक में पीएफ की लिमिट और छुट्टी बढ़ाने की मांग पर फैसला लिया जाना है.

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नई दिल्ली. केंद्र सरकार आज लेबर कानूनों और प्रोविडेंट फंड से जुड़े नियमों को लेकर एक अहम फैसला ले सकती है. आज लेबर मिनिस्ट्री, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और लेबर यूनियनों (Labour Unions) के लोगों के साथ मिलकर आमने-सामने बैठक होने वाली है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस मीटिंग में पीएफ की लिमिट बढ़ाने और लेबर यूनियनों की ओर से छुट्टी बढ़ाने जाने की मांग पर फैसला लिया जाना है.

बता दें कि भारतीय मजदूर संघ (Bharatiya Mazdoor Sangh) ने सरकार से मांग की है कि जिन कर्मचारियों की मंथली सैलरी 15,000 रुपये है, उसमें PF की कटौती न की जाए, बल्कि जिनकी सैलरी 21,000 रुपये है, उसमें कर्मचारी भविष्य निधि स्कीम (Employees Provident Fund - EPF) के तहत कौटती की जाए. यानी 15,000 रुपये के मानक को बढ़ाकर 21,000 रुपये कर दिया जाए.





छुट्टी को लेकर क्या है संघ की मांग?
इसी तरह संघ ने छुट्टियों के मामलों में भी मांग की है. संघ की मांग है कि पूरी नौकरी के दौरान मिलने वाली छुट्टी 300 कर दी जाए. जो कि मौजूदा समय में 240 है. इतना ही नहीं संघ ने सरकार से ये भी मांग की है कि सभी तरह के वर्कर्स के लिए अलग-अलग कानून बनाए जाएं. जैसे मकान और दूसरे निर्माण काम से जुड़े वर्कस, बीड़ी वर्कर्स (bidi workers), जर्नलिस्ट्स (journalists) और ऑडियो-वीडियो वर्कर्स (audio-visual workers) यानी सिनेमा से जुड़े वर्कर्स का काम अलग-अलग होता है. लिहाजा उनके लिए अलग-अलग कानून बनाए जाएं.

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1 अप्रैल से लागू होंगे नए नियम
श्रम सुधारों (labor reforms) से जुड़े नए कानून सितंबर 2020 में संसद में पारित हुए थे. अब सरकार इन नए कानूनों को लागू करने के लिए 1 अप्रैल यानी नए फिस्कल ईयर से लागू करने की कोशिश कर रही है. इस मामले में केंद्र सरकार की ओर से वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के जरिए सभी स्टेकहोल्डर्स (stakeholders) के साथ बातचीत भी हुई, लेकिन कई लेबर यूनियन्स की तरफ से इसका बहिष्कार (boycotted) किया गया. लिहाजा ऐसे माहौल में अब सरकार 20 जनवरी को आमने-सामने बैठकर बातचीत कर सकती है. इस मामले से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि इन कानूनों पर अंतिम दौर की चर्चा की जाएगी. सभी मामलों को हल करने की कोशिश की जाएगी. इसके बाद जल्द ही इन नियमों को नोफाइड (notified) कर दिया जाएगा.
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