जेवर एयरपोर्ट के लिए कभी भी शुरु हो सकता है जमीन का अधिग्रहण, यह बड़ी मंजूरी भी मिली

जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट

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जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Jewar Airport) के लिए अब कभी भी जमीन का अधिग्रहण शुरु हो सकता है. जल्द ही 7 गांवों की 13 सौ हेक्ट्रेयर से ज्यादा जमीन एयरपोर्ट को विस्तार देने के लिए अधिग्रहित की जाएगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 15, 2021, 2:18 PM IST
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नोएडा. जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Jewar Airport) के लिए अब कभी भी जमीन का अधिग्रहण शुरु हो सकता है. जल्द ही 7 गांवों की 13 सौ हेक्ट्रेयर से ज्यादा जमीन एयरपोर्ट को विस्तार देने के लिए अधिग्रहित की जाएगी. नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो की ओर से आखिरी एनओसी (NOC) मिलने के बाद अब विस्तार का रास्ता साफ हो गया है. जबकि इससे पहले रक्षा मंत्रालय, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI), नागर विमानन महानिदेशालय अपनी एनओसी दे चुके हैं. आखिरी एनओसी मिलने के बाद अब एयरपोर्ट का मास्टर प्लान (Master Plan) तैयार करने पर भी काम शुरु हो गया है. खास बात यह है कि जल्द ही शिलान्यास की तारीख का भी ऐलान किया जा सकता है.

गौरतलब रहे कुछ दिन पहले ही यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट कंपनी लिमिटेड ने निर्माण कार्य के लिए ई-टेंडर भी जारी कर दिए हैं. वहीं अथॉरिटी से जुड़े अफसरों की मानें तो जेवर एयरपोर्ट को विस्तार देने के लिए जिन 7 गांवों की जमीन का अधिग्रहण किया जाना है उसमे करौली बांगर 183 हेक्ट्रेयर, कुरैब 345, बीरमपुर 96, दयानतपुर 165, रन्हेरा 519, नंगलाशाहपुर 115 और मुंढेरा गांव की 43 हेक्ट्रेयर जमीन भी शामिल है.

एयरपोर्ट पर बनाए जाएंगे 3 नए रनवे

जेवर एयरपोर्ट पर 3 और नए रनवे का निर्माण होना है. नए रनवे के लिए 1365 एकड़ ज़मीन की जरूरत होगी. ज़मीन का अधिग्रहण करने के लिए भी यूपी सरकार ने कैबिनेट की बैठक में अपनी मंजूरी दे दी है. वहीं पहले चरण के निर्माण में 29500 करोड़ रुपये की लागत आएगी. वहीं दूसरे चरण के निर्माण की लागत 31114 करोड़ रुपये आएगी.
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दूसरे चरण के निर्माण की टेक्निकल फिजिबिलिटी रिपोर्ट (टीईएफआर) बनाने के लिए नियाल (नोएडा इंटरनैशनल एयरपोर्ट लिमिटेड) ने पीडब्ल्यूसी को जिम्मेदारी दी थी. पीडब्ल्यूसी की रिपोर्ट के मुताबिक नोएडा एयरपोर्ट के दूसरे चरण का निर्माण का 2042 में शुरू होगा.

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यमुना एक्सप्रेस-वे के किनारे जेवर में बनने वाला एयरपोर्ट देश का सबसे बड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट होगा. लेकिन इसके साथ ही यहां देश का सबसे बड़ा हवाई जहाजों की मरम्मत करने का वर्कशॉप एमआरओ (मेंटिनेंस रिपेयरिंग एंड ओवरहॉलिंग) हब भी बन रहा है. इसी के चलते जेवर एयरपोर्ट पर 2 नहीं 5 रनवे बनाए जाने का प्रस्ताव पास हुआ है.



गौरतलब रहे अभी तक हवाई जहाजों के इंजन की मरम्मत का काम ज़्यादातर खासतौर से सिंगापुर, श्रीलंका और दूसरे यूरोपीय देशों में कराया जाता है. लेकिन अब सरकार के इस कदम से एयर एवियशन कंपनियों को बड़ी राहत मिलेगी और आर्थिक बचत भी होगी.
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