Home /News /business /

पहली बार L&T ने दिया ये तोहफा! इस पर खर्च करेगी 9000 करोड़ रुपये

पहली बार L&T ने दिया ये तोहफा! इस पर खर्च करेगी 9000 करोड़ रुपये

पहली बार L&T ने दिया ये तोहफा! इस पर खर्च करेगी 9000 करोड़ रुपये

पहली बार L&T ने दिया ये तोहफा! इस पर खर्च करेगी 9000 करोड़ रुपये

कंस्ट्रक्शन एंड इंजीनियरिंग कंपनी लार्सन एंड टूब्रो लिमिटेड (Larsen & Toubro) के बोर्ड ने 6 करोड़ शेयर के बायबैक को मंजूरी दे दी है. इस शेयर बायबैक पर कंपनी कुल 9000 करोड़ रुपये खर्च करेगी.

    कंस्ट्रक्शन एंड इंजीनियरिंग कंपनी लार्सन एंड टूब्रो लिमिटेड (Larsen & Toubro) के बोर्ड ने 6 करोड़ शेयर के बायबैक को मंजूरी दे दी है. इस शेयर बायबैक पर कंपनी कुल 9000 करोड़ रुपये खर्च करेगी. आपको बता दें कि एलएंडटी ऐसा पहली बार बार किया है. शेयर बायबैक का मतलब होता है कि कंपनी जब अपने ही शेयर निवेशकों से खरीदती है तो इसे बायबैक कहते हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आपने लंबी अवधि के लिए निवेश किया है तो आपको सिर्फ बायबैक में कुछ पैसे कमाने के लिए अपने शेयर नहीं बेचने चाहिए. बायबैक में तभी हिस्सा लेना चाहिए जब आपको यह लगे कि कंपनी के शेयर की कीमत ज्यादा (ओवरवैल्यूड) है. और आपको यह भी लगता है कि कंपनी के पास ग्रोथ के ज्यादा मौके नहीं हैं.

    क्या होता है बायबैक-कंपनी जब अपने ही शेयर निवेशकों से खरीदती है तो इसे बायबैक कहते हैं. आप इसे आईपीओ का उलट भी मान सकते हैं. बायबैक की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन शेयरों का वजूद खत्म हो जाता है. बायबैक के लिए मुख्यत: दो तरीकों-टेंडर ऑफर या ओपन मार्केट का इस्तेमाल किया जाता है.

    भारतीयों की ये फेवरेट कंपनी 14 हजार करोड़ में बेच रही है कारोबार, जानिए क्या है मजबूरी!


    कंपनियां क्यों करती हैं बायबैक- कंपनी कई वजहों से बायबैक का फैसला लेती है. सबसे बड़ी वजह कंपनी की बैलेंसशीट में अतिरिक्त नकदी का होना है. कंपनी के पास बहुत ज्यादा नकदी का होना अच्छा नहीं माना जाता है. इससे यह माना जाता है कि कंपनी अपने नकदी का इस्तेमाल नहीं कर पा रही है. शेयर बायबैक के जरिए कंपनी अपने अतिरिक्त नकदी का इस्तेमाल करती है.

    क्या है प्रक्रिया- सबसे पहले कंपनी का बोर्ड शेयर बायबैक के प्रस्ताव को मंजूरी देता है. इसके बाद कंपनी बायबैक के लिए कार्यक्रम का एलान करती है. इसमें रिकार्ड डेट और बायबैक की अवधि का जिक्र होता है. रिकॉर्ड डेट का मतलब यह है कि उस दिन तक जिन निवेशकों के पास कंपनी के शेयर होंगे, वे बायबैक में हिस्सा ले सकेंगे. (ये भी पढ़ें-छुट्टियों के बदले इस ‘कर्मचारी’ को मिले 32 करोड़ रुपए )

    बायबैक का शेयर पर असर- बायबैक का कंपनी और उसके शेयर पर कई तरह से असर पड़ता है. सबसे पहले तो खरीद-फरोख्त के लिए शेयर बाजार में मौजूद कंपनी के शेयरों की संख्या घट जाती है. इससे प्रति शेयर आय (ईपीएस) बढ़ जाती है. शेयर का पीई भी बढ़ जाता है. एक बात ध्यान में रखने वाली है कि भले ही बायबैक के चलते शेयर से जुड़े कई आंकड़े बदल जाए, लेकिन कंपनी के कारोबार में बुनियादी रूप से कोई बदलाव नहीं आता.

    निवेशक के लिए क्या है मायने- बायबैक में अपने शेयर बेचना चाहिए या नहीं? यह सवाल कई निवेशकों के दिमाग में होता है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आपने लंबी अवधि के लिए निवेश किया है तो आपको सिर्फ बायबैक में कुछ पैसे कमाने के लिए अपने शेयर नहीं बेचने चाहिए. बायबैक में तभी हिस्सा लेना चाहिए जब आपको यह लगे कि कंपनी के शेयर की कीमत ज्यादा (ओवरवैल्यूड) है. और आपको यह भी लगता है कि कंपनी के पास ग्रोथ के ज्यादा मौके नहीं हैं.

    Tags: Stock market, Stock Markets

    विज्ञापन

    राशिभविष्य

    मेष

    वृषभ

    मिथुन

    कर्क

    सिंह

    कन्या

    तुला

    वृश्चिक

    धनु

    मकर

    कुंभ

    मीन

    प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
    और भी पढ़ें
    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर