म्यूचुअल फंड में पैसा लगाने के लिए जरूरी है ये बदला हुआ नियम जानना! मुनाफे पर सीधा होता है असर

म्यूचुअल फंड में पैसा लगाने के लिए जरूरी है ये बदला हुआ नियम जानना! मुनाफे पर सीधा होता है असर
फाइल फोटो

म्यूचुअल फंड स्कीम को निवेशकों के लिए और ज्यादा बेहतर बनाने के लिए सेबी ने बड़ा फैसला किया है. इस फैसले के बाद आपका मुनाफा बढ़ जाएगा. आइए जानें इससे जुड़े सभी सवालों के जवाब...

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 20, 2019, 10:22 AM IST
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म्यूचुअल फंड स्कीम को निवेशकों के लिए और ज्यादा बेहतर बनाने के लिए सेबी ने बड़ा फैसला किया है. इस फैसले के बाद आपका मुनाफा बढ़ जाएगा. मतलब साफ है कि सेबी ने टोटल एक्सपेंस रेश्यो यानी TER घटा दिए हैं. कम TER म्यूचुअल फंड में निवेश को आसान बनाने के साथ निवेशकों का रिटर्न भी बढ़ाएगा. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि अगर आप म्यूचुअल फंड की दो स्कीम के बीच तुलना भी कर रहे हैं तब भी आपको उससे जुड़े खर्च (एक्सपेंस रेश्यो) के बारे में जानना चाहिए तभी आप अपने लिए सही फंड का चुनाव कर कर सकेंगे.

नए नियम के मुताबिक अब  म्यूचुअल फंड में पैसा लगाने वालों से एक्सपेंस रेश्यो वसूला जाएगा. अब टोटल एक्सपेंस रेश्यो 2.25 फीसदी हो जाएगा. ये इक्विटी स्कीम पर 1 फीसदी होगा. वहीं, क्लोज एंडेड स्कीम पर 1.25 फीसदी चार्ज लगेगा. आपको बता दें ये चार्जेस आम निवेशकों से वसूले जाते है.आइए जानें इससे जुड़े सभी बातें.

आपके मुनाफे पर ऐसे होता है असर- म्यूचुअल फंड के रिटर्न (मुनाफे) पर एक्सपेंस रेश्यो का क्या असर पड़ता है. एक्सपेंस रेश्यो वास्तव में यह बताता है कि आपके निवेश पोर्टफोलियो के लिए म्यूचुअल फंड प्रबंधन आपसे कितनी फीस वसूल रहा है.



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>> अगर आसान शब्दों में समझें तो आपने किसी म्यूचुअल फंड स्कीम में 10,000 रुपये लगाए हैं. अगर इस फंड का एक्सपेंस रेश्यो दो फीसदी है, तो इसका मतलब यह है कि इस रकम के प्रबंधन के लिए आपको 200 रुपये की फीस चुकानी होगी.

 



>> इसका मतलब यह भी है कि अगर आपके निवेश पर साल भर में आपको 15 फीसदी रिटर्न मिला और एक्सपेंस रेश्यो दो फीसदी है, तो आपका नेट रिटर्न 13 फीसदी रहा. कम एक्सपेंस रेश्यो का मतलब अधिक मुनाफा है, और एक्सपेंस रेश्यो अधिक होने का मतलब मुनाफा घटना है.

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>> लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं है कि हमेशा एक्सपेंस रेश्यो अधिक होने का मतलब कम मुनाफा ही है. कई बार अधिक एक्सपेंस रेश्यो वाले फंड का रिटर्न भी शानदार हो सकता है.

ऐसे निकाल सकते हैं एक्सपेंस रेश्यो- यह रेश्यो (अनुपात) है जो म्यूचुअल फंड के प्रबंधन (मैनेजमेंट) पर आने वाले खर्च को प्रति यूनिट के रूप में बताता है.



 

>> किसी म्यूचुअल फंड का एक्सपेंस रेश्यो निकालने के लिए उसकी कुल संपत्ति (एसेट अंडर मैनेजमेंट यानी AUM) में कुल खर्च से भाग दिया जाता है.

कौन से खर्चें इनमें शामिल होते हैं-म्यूचुअल फंड हाउस (एसेट मैनेजमेंट कंपनी यानी AMC) के कई खर्च एक्सपेंस रेश्यो में शामिल किये जाते हैं.

>> फंड हाउस के पास ट्रेंड लोगों की एक टीम होती है. यही टीम मार्केट और कंपनियों पर नजर रखती है. यही टीम किसी शेयर को खरीदने या उससे निकलने के फैसले समय पर लेने में मदद करती है.

>> इसके साथ ही फंड चलाने वाली कंपनी ट्रांसफर और रजिस्ट्रार से संबंधित खर्च, कस्टोडियन, कानूनी एवं ऑडिट का खर्च, स्कीम की मार्केटिंग और उसके वितरण का खर्च उठाती है.

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>> ये सभी खर्च म्यूचुअल फंड की यूनिट खरीदने वाले ग्राहक से ही लिए जाते हैं. किसी म्यूचुअल फंड स्कीम की NAV (नेट एसेट वैल्यू) इस तरह के खर्च को घटाने के बाद निकाली गयी वैल्यू है.



कौन तय करता है ये खर्चें-  शेयर बाजार की निगरानी करने वाला रेग्युलेटर ( नियामक) सेबी इस रेश्यो की समीक्षा करता रहता है. सेबी ने अब एक्सपेंस रेश्यो की सीमा तय कर दी है. ओपन एंडेड इक्विटी म्यूचुअल फंड स्कीम में AUM के हिसाब से सेबी ने एक्सपेंस रेश्यो की सीमा तय कर दी है.

जिस म्यूचुअल फंड स्कीम का AUM 500 करोड़ रुपये है वे एक्सपेंस रेश्यो के रूप में अधिकतम 2.25 फीसदी चार्ज कर सकती हैं.

इसी तरह 500-750 करोड़ रुपये AUM वाली स्कीम के लिए एक्सपेंस रेश्यो 2% हो सकता है.

750-2,000 करोड़ रुपये वाले फंड के लिए एक्सपेंस रेश्यो 1.75%, 2000-5000 करोड़ AUM वाली स्कीम के लिए 1.6 फीसदी और 5000-10,000 करोड़ रुपये AUM वाले फंड के लिए एक्सपेंस रेश्यो 1.5 फीसदी हो सकता है.

सेबी के निर्देश के मुताबिक, 10-50,000 करोड़ AUM वाली स्कीम के लिए एक्सपेंस रेश्यो हर 5000 करोड़ रुपये बढ़ने के बाद 0.05 फीसदी कम होता चला जायेगा.

अगर किसी म्यूचुअल फंड स्कीम का AUM 50,000 करोड़ से अधिक है तो उसके लिए AMC एक्सपेंस रेश्यो के रूप में 1.05 फीसदी चार्ज ले सकती हैं.

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