देश के दूसरे सबसे बड़े सरकारी बैंक का लोन होगा सस्ता, इतनी घट जाएगी EMI

बैंक ऑफ बड़ौदा मार्जिनल कॉस्ट ऑफ लेंडिंग रेट (MCLR) में 0.15 फीसदी की कटौती करेगी. इसके बाद होम लोन, ऑटो और पर्सनल लोन सस्ते हो जाएंगे. हालांकि नई दरें बुधवार से लागू होंगी.

News18Hindi
Updated: August 5, 2019, 6:17 PM IST
देश के दूसरे सबसे बड़े सरकारी बैंक का लोन होगा सस्ता, इतनी घट जाएगी EMI
बैंक ऑफ बड़ौदा मार्जिनल कॉस्ट ऑफ लेंडिंग रेट (MCLR) में 0.15 फीसदी की कटौती करेगी. इसके बाद होम लोन, ऑटो और पर्सनल लोन सस्ते हो जाएंगे. हालांकि नई दरें बुधवार से लागू होंगी.
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Updated: August 5, 2019, 6:17 PM IST
देश के दूसरे सबसे बड़े सरकारी बैंक बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) का होम लोन, ऑटो लोन बुधवार से सस्ता हो जाएगा. दरअसल, बैंक ऑफ बड़ौदा मार्जिनल कॉस्ट ऑफ लेंडिंग रेट (MCLR) में 0.15 फीसदी की कटौती करेगी. इसके बाद होम लोन, ऑटो और पर्सनल लोन सस्ते हो जाएंगे. हालांकि नई दरें बुधवार से लागू होंगी.

MCLR घटने से आम आदमी को सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि उसका मौजूदा लोन सस्ता हो जाता है और उसे पहले की तुलना में कम EMI देनी पड़ती है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने फरवरी से अब तक रेपो दरों में 0.75 फीसदी की कटौती की है. उसने भी बैंकों से इसका लाभ जल्द से जल्द ग्राहकों को हस्तांतरित करने के लिए कहा है.

कितना सस्ता हुआ लोन
कटौती के बाद अब 1 साल अवधि वाले कर्ज के लिए MCLR 8.60 फीसदी से घटकर 8.45 फीसदी हो जाएगी. बैंक के एक दिन और एक माह की अवधि वाले लोन पर ब्याज दर घटकर क्रमश: 8.05 फीसदी और 8.15 फीसदी हो जाएगी. पहले यह ब्याज दर 8.20 फीसदी और 8.30 फीसदी थी. बैंक के तीन माह और छह माह की अवधि वाले लोन पर ब्याज दर 0.15 फीसदी घटकर क्रमश: 8.25 फीसदी और 8.40 फीसदी रह जाएगी. ये भी पढ़ें: सोने की कीमतों में बड़ा उछाल, 10 ग्राम का भाव 37 हजार के करीब पहुंचा



क्या है MCLR?
MCLR को मार्जिनल कॉस्ट ऑफ लेंडिंग रेट भी कहते हैं. इसमें बैंक अपने फंड की लागत के हिसाब से लोन की दरें तय करते हैं. ये बैंचमार्क दर होती है. इसके बढ़ने से आपके बैंक से लिए गए सभी तरह के लोन महंगे हो जाते हैं.
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MCLR कम होने से होता है ये असर
MCLR कम होने से आम आदमी को सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि उसका मौजूदा लोन सस्ता हो जाता है और उसे पहले की तुलना में कम ईएमआई देनी पड़ती है.

कैसे तय होता है MCLR?
मार्जिनल का मतलब होता है- अलग से या अतिरिक्त. जब भी बैंक लेंडिंग रेट तय करते हैं, तो वे बदली हुई स्थ‍ितियों में खर्च और मार्जिनल कॉस्ट को भी कैलकुलेट करते हैं. बैंकों के स्तर पर ग्राहकों को डिपॉजिट पर दिए जाने वाली ब्याज दर शामिल होती है. MCLR को तय करने के लिए चार फैक्टर को ध्यान में रखा जाता है. इसमें फंड का अतिरिक्त चार्ज भी शामिल होता है. निगेटिव कैरी ऑन CRR भी शामिल होता है. साथ ही, ऑपरेशन कॉस्ट औक टेन्योर प्रीमियम शामिल होता है.

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First published: August 5, 2019, 6:06 PM IST
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