एक अप्रैल से बदल जाएगी GST की ये स्कीम, GST काउंसिल ने दी मंज़ूरी

CNBC TV18 को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, काउंसिल ने कम्पोजिशन स्कीम में शामिल टैक्स पेयर्स को अब तीन महीने में टैक्स रिटर्न फाइल करने की इज़ाजत दे दी है.

News18Hindi
Updated: January 10, 2019, 1:02 PM IST
एक अप्रैल से बदल जाएगी GST की ये स्कीम, GST काउंसिल ने दी मंज़ूरी
जीएसटी कंपोजिशन स्कीम में हो सकता है बड़ा बदलाव, अब मिलेगी ये छूट!
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Updated: January 10, 2019, 1:02 PM IST
सरकार ने गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) के तहत एकीकृत कम्पोजिशन योजना का ऑप्शन चुनने वालो को बड़ी राहत देने की तैयारी कर रही है. CNBC TV18 को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, काउंसिल ने कम्पोजिशन स्कीम में शामिल टैक्स पेयर्स को अब तीन महीने में टैक्स रिटर्न फाइल करने की इज़ाजत दे दी है. वहीं, अब स्कीम का दायरा भी बढ़ाने की तैयारी है. काउंसिल की बैठक में कम्पोजिशन स्कीम की लिमिट बढ़कर 1.5 करोड़ रुपये हो सकती है. आपको बता दें कि दिल्ली में जीएसटी काउंसिल की 32वीं बैठक जारी है.

जीएसटी काउंसिलने कंपोजिशन स्कीम की सीमा बढ़ाने को औपचारिक मंजूरी दी. कंपोजिशन स्कीम की सीमा ₹`1.5 Cr करने को मंजूरी मिली, स्कीम पर बदलाव 1 अप्रैल 2019 से लागू होगा.

क्या है जीएसटी कंपोजिशन स्कीम- सरकार ने छोटे कारोबारियों को राहत देने के लिए कंपोजिशन स्कीम शुरू की है. शुरुआती दौर में GST Tax System की तमाम जटिलताओं से राहत देने के लिए सरकार ने छोटे कारोबारियों को कंपोजिशन स्कीमअपनाने का विकल्प दिया. 20 लाख रुपए से ज्यादा के टर्नओवर वाले लोगों के लिए GST रजिस्ट्रेशन तो अनिवार्य है लेकिन वो चाहें तो जीएसटी का झंझट कम कर सकते हैं. साल में 75 लाख तक का कारोबार करने वाले जीएसटी कंपोजिशन स्कीम का फायदा उठा सकते हैं. अपनी सुविधानुसार वे चाहें तो जीएसटी की नॉर्मल स्कीम के तहत काम करें, चाहें तो  कंपोजिशन स्कीम के तहत.

इसके तहत छोटे कारोबारियों को हर महीने रिटर्न फाइल नहीं करना होता है. साथ ही, टैक्स का एक निश्चित रेट, एकमुश्त टैक्स भरना होता है. इसके अलावा रसीदों को अपलोड करना का झंझट भी नहीं है. (ये भी पढ़ें-RBI ने छोटे कारोबारियों को दिया नए साल का तोहफा, 25 करोड़ तक लोन रिस्ट्रक्चरिंग की इजाजत दी)


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स्कीम लेने वालों को फायदा- कारोबारियों को न तो सेल और न परचेज का रिकॉर्ड रखना जरूरी होता है. साथ ही, रसीदों को अपने रिटर्न के साथ अपलोड करना होता है. इसके उलट GST की सामान्य स्कीम वालों को हर महीने GSTR-1 में अपनी सभी बिक्रियों की और GSTR-2 में सारी खरीदारों की डीटेल देनी होती है और उनकी रसीदें भी अपलोड करनी होती हैं.

कंपोजिशन  लेने वालों को अपने रिटर्न के साथ बीते तीन महीनों के दौरान हुई कुल बिक्री पर एकमुश्त GST जमा करना है. टैक्स भी एक फिक्स रेट्स पर जमा करना है. (ये भी पढ़ें-GST कलेक्शन में गिरावट, नवंबर के मुकाबले दिसंबर में 3000 करोड़ रुपये घटा)
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