GST काउंसिल के फैसले से 10 लाख छोटे कारोबारियों को होगा बड़ा फायदा

कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि जीएसटी में छूट की सीमा को 20 लाख रुपये से बढ़ाकर 40 लाख रुपये करने से लगभग 10 लाख छोटे व्यापारी टैक्स दायरे से बाहर हो सकते हैं.

News18Hindi
Updated: January 10, 2019, 4:55 PM IST
GST काउंसिल के फैसले से 10 लाख छोटे कारोबारियों को होगा बड़ा फायदा
कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि जीएसटी में छूट की सीमा को 20 लाख रुपये से बढ़ाकर 40 लाख रुपये करने से लगभग 10 लाख छोटे व्यापारी टैक्स दायरे से बाहर हो सकते हैं.
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Updated: January 10, 2019, 4:55 PM IST
कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की अगुवाई में जीएसटी कउंसिल द्वारा GST में दी गई छूटों का स्वागत करते हुए कहा की यह इस बात का स्पष्ट संकेत है की सरकार छोटे व्यापारियों की समस्याओं को सुलझाने के प्रति सजग है और वास्तव में छोटे व्यापारियों के लिए टैक्स प्रणाली को सरल करना चाहती है. कैट की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि जीएसटी में छूट की सीमा को 20  लाख रुपये से बढ़ाकर 40 लाख रुपये करने से लगभग 10 लाख छोटे व्यापारी टैक्स दायरे से बाहर हो सकते हैं जो एक अच्छा संकेत है.

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कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स का कहना है कि कम व्यापार करने वाले छोटे व्यापारियों के लिए यह एक बड़ी राहत है कम्पोजीशन स्कीम की सीमा को 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1 .5 करोड़ रुपये करने का निर्णय काफी समय से लंबित था और इस निर्णय से देश भर में लगभग 20 लाख से अधिक व्यापारियों को फायदा होगा.

दूसरी ओर अब ऐसे व्यापारियों को केवल वर्ष भर में एक ही रिटर्न भरना होगी इससे इनको टैक्स पालन के जंजाल से मुक्ति मिलेगी हालांकि टैक्स की अदायगी हर तिमाही में करनी होगी जो की तर्कसंगत है.

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कैट ने सर्विस सेक्टर के लिए कम्पोजीशन स्कीम की सीमा 50 लाख रखने का निर्णय भी स्वागत योग्य किया है और इससे लगभग 10 लाख से अधिक छोटे सर्विस प्रदाताओं को लाभ मिलेगा.

यह और भी तर्कसंगत है की इनको 6 प्रतिशत के टैक्स स्लैब में रखा गया है.व्यापारियों के कुछ अन्य विषयों पर सरकार का ध्यान जाना बेहद आवश्यक है इसमें प्रमुख रूप से समय से व्यापारियों को रिफंड मिलना, ऑटो पार्ट्स, एल्युमीनियम के बर्तन आदि पर टैक्स की दर को कम करना तथा रिटर्न को मासिक की जगह तिमाही करना आदि शामिल हैं पर सरकार को ध्यान देना चाहिए और तुरंत इनका भी समाधान करना चाहिए​.
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