अर्थशास्त्रियों ने कहा-राजकोषीय घाटे का लक्ष्य पाने में सरकार को कई चुनौतियों का सामना करना होगा

एक फरवरी को पेश हुए अंतरिम बजट पर बड़ी रेटिंग एजेंसी मूडीज के अर्थशास्त्रियों का कहना है कि वित्त वर्ष 2019-20 के लिए 3.4 प्रतिशत के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को हासिल करने में सरकार को चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा.

News18Hindi
Updated: February 2, 2019, 4:32 PM IST
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Updated: February 2, 2019, 4:32 PM IST
एक फरवरी को पेश हुए अंतरिम बजट पर बड़ी रेटिंग एजेंसी मूडीज के अर्थशास्त्रियों का कहना है कि वित्त वर्ष 2019-20 के लिए 3.4 प्रतिशत के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को हासिल करने में सरकार को चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा. रेटिंग एजेंसी ने कहा है कि अंतरिम बजट में खर्च बढ़ाने के कदम उठाए गए हैं जबकि राजस्व बढ़ाने के उपाय नहीं किए गए है. लगातार 4 वर्ष तक सरकार राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाएगी जो देश की फाइनेंशियल आउटलुक के लिए निगेटिव है.

क्या होता है राजकोषीय घाटा आपको बता दें कि राजस्व घाटे का मतलब होता है कि सरकार ने जितनी आमदनी का अनुमान लगाया था, उससे ज्यादा का खर्च हो गया. मतलब ये है कि अनुमान के मुताबिक आमदनी और खर्चे के बीच का अंतर राजस्व घाटा कहलाता है. राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit)- सरकार की कुल आय और खर्चे में अंतर को राजकोषीय घाटा कहा जाता है. इससे पता चलता है कि सरकार को कामकाज चलाने के लिए कितनी उधारी की जरूरत होगी. बजट के दौरान सभी इसी आंकड़े का इंतजार करते हैं. ये भी पढ़ें-आम चुनाव से देश पर बढ़ेगा बोझ, चुनाव के बाद होगा भारत की रेटिंग पर फैसला: फिच

अर्थशास्त्रियों  का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार ने चुनावी साल में किसानों और ग्रामीण रोजगार कार्यक्रमों के लिए खजाना खोलते हुए अतिरिक्त फंड का बंदोवस्त किया है.अगले साल राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को हासिल करना और ज्यादा चुनौतीपूर्ण होगा.



आम चुनाव से पहले सरकार ने अंतरिम बजट में छोटे और सीमांत किसानों के लिए सालाना 6 हजार रुपये वित्तीय मदद, असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए हर महीने 3000 रुपये पेंशन, 5 लाख रुपये तक के टैक्सेबल इनकम को इनकम टैक्स के दायरे से बाहर रखने समेत कई लोकलुभावन कदमों का ऐलान किया. ये भी पढ़ें-Budget 2019: घर खरीदारों को मिली राहत, सरकार ने बदला ये नियम

भारत ने मार्च 2020 में खत्म होने वाले वित्त वर्ष के लिए राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 3.4 प्रतिशत तक सीमित रखने का लक्ष्य रखा है. यह पिछले आंकलन से ज्यादा है. मौजूदा वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 3.3 प्रतिशत तक सीमित रखने का लक्ष्य रखा गया है लेकिन हो सकता है कि यह भी तय लक्ष्य से ज्यादा रहे.

जापानी ब्रोकरेज नोमूरा ने नोट में कहा, 'वित्त वर्ष 2018-19 के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य से लगातार चूक तथा वित्त वर्ष 2019-20 के लिए लक्ष्य को उसी स्तर पर कायम रखना ‘आश्चर्यजनक तौर पर नकारात्मक’ है. इससे 2020-21 में राजकोषीय घाटे को कम कर तीन प्रतिशत पर लाने के लक्ष्य पर सवाल खड़ा होता है.
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