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बड़ा खुलासा: किसान क्रेडिट कार्ड के पैसे से बैंक ने कर दिया निजी कंपनी का जीवन बीमा! जानिए पूरा मामला

किसान क्रेडिट कार्ड को लेकर बड़ा खुलासा
किसान क्रेडिट कार्ड को लेकर बड़ा खुलासा

एक ग्रामीण बैंक ने किसान क्रेडिट कार्ड के पैसे से किसानों के लिए निजी कंपनी का बीमा खरीद लिया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 3, 2020, 8:01 PM IST
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नई दिल्ली. खेती किसानी को आगे बढ़ाने के लिए बनाए जाने वाले किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) का बैंक की ओर से दुरुपयोग करने का बड़ा मामला सामने आया है. एक ग्रामीण बैंक ने किसान क्रेडिट कार्ड के पैसे से किसानों के लिए निजी कंपनी का बीमा खरीद लिया. सीएम फ्लाइंग की जांच में इसका खुलासा हुआ था, लेकिन मामले को दबा दिया गया. अब सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक ऑफिसर्स ऑर्गनाइजेशन के चीफ कॉर्डिनेटर मुकेश जोशी ने दस्तावेजों के साथ सीबीआई (CBI) को जांच के लिए पत्र लिखा है. जोशी का कहना है कि किसान क्रेडिट कार्ड का पैसा सिर्फ खेती के लिए इस्तेमाल हो सकता है.

क्या है मामला-आरोप है कि बैंक प्रबंधन ने निजी बीमा कंपनी से मिलीभगत करके किसानों को बताए बिना पैसा काटा. उसके बदले निजी कंपनी ने बैंक अधिकारियों को थाईलैंड की सैर कराई. बता दें कि किसान क्रेडिट कार्ड के पैसे से सिर्फ खेती से जुड़े काम किए जा सकते हैं.

इसके पैसे से फसल बीमा का प्रीमियम तो काटा जा सकता है लेकिन जीवन बीमा का प्रीमियम काटने का कोई प्रावधान नहीं है. लेकिन बैंक अधिकारियों ने मिलीभगत कर के निजी कंपनी का बीमा खरीदा. ये क्रेडिट कार्ड किसानों को सूदखोरों से बचाने और उनकी कृषि संबंधी तात्कालिक आर्थिक जरूरतों को तुरंत पूरा करने के उद्देश्य से बनाए जाते हैं.



एक प्राइवेट बीमा कंपनी बजाज एलांइस के साथ सांठ-गांठ करके किसानों का जीवन बीमा कर दिया. यह पूरी तरह से बैंक के नियमों के खिलाफ है और ग्राहकों के साथ पेशागत धोखाधड़ी है. मामला साल 2012 का है. लेकिन मामले को दबा दिया गया.
जोशी का आरोप है कि बैंक के लगभग 80 फीसदी किसानों को यह चूना लगाया गया. हम एलआईसी के किसी एजेंट से अपनी एलआईसी कराते हैं तो एजेंट हमें पहली किश्त का लगभग 50 फीसदी तक प्रीमियम वापस कर देता है. अब आप खुद अंदाजा लगा सकते हैं. मामले की एक कंप्लेंट 2012 में पंजाब नैशनल बैंक के विजीलेंस से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक को हुई. लेकिन बैंक प्रबंधन ने लीपापोती कर दी.

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बैंक अधिकारियों की यूनियन ने 2014 में बाकायदा इस मामले में बैंक प्रबंधन को नोटिस भेजा फिर जांच शुरू हुई तो मुख्यमंत्री उड़ऩ दस्ते के समक्ष इस मामले में लीपापोती हुई. जोशी का आरोप है कि अपने चुनिंदा लोगों से बयान करा कर उस मामले को पूरी तरह से दबाने की कोशिश की गई.. प्रभावित किसानों तक जांच अधिकारियों को नहींं पहुंचने दिया गया. अपने चहेते लोगों को बुला कर बयान दिलवा दिए गए. विजीलेंस ने अपनी जांच में पाया कि बैंक अफसरों का थाईलैंड ट्रिप निजी बीमा कंपनी द्वारा प्रायोजित था.

अगर किसानों तक जाते तो इसका कुछ और ही नतीजा निकलता. दूसरी तरफ पंजाब नेशनल बैंक की जांच तो दबाब में आकर बंद कर दी गई. जबकि इनको मामले की पूरी जानकारी थी कि इस मामले में क्या गोलमाल है.

इस पूरी घटना का नुकसान यह हुआ कि यह पैसा चूंकि किसानों ने अपने मन से खर्च नहीं किया था इसलिए उन्होंने इसे लौटाने से इनकार दिया और किसानों को बैंक ने एनपीए घोषित कर दिया.

जोशी का कहना है कि भ्रष्टाचार केवल कैश में नहीं होता काइंड में भी होता है. यह बात शायद सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक के प्रबंधन को मालूम नहींं है. एक बीमा कंपनी की पॉलिसी बैंक के ग्राहकों को बचने की एवज में बीमा कंपनी ने कई अफसरों को थाईलैंड में सैर सपाटे के लिए भेजा. इस मामले की शिकायत जब मुख्यमंत्री को हुई तो उन्होंने अपने उड़न दस्ते की ड्यूटी इस मामले की जांच के लिए लगाई.

जांच के दौरान पुष्टि हुई कि निजी बीमा कंपनी ने अपने कारोबार के विकास के लिए बैंक के कुछ अधिकारियों को अपने खर्चे पर थाईलैंड भेजा, जिस पर मुख्यमंत्री उड़ऩदस्ते ने अपने पत्र संख्या 898/ एसपी/सीएम फ्लाइंग स्कॉड ने माना कि यह आरोप सही थे और दोषी अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाए.

दरअसल यह एक बड़ी डील का छोटा सा हिस्सा थे जो बीमा कंपनी ने उस समय के चेयरमैन और अधिकारियों को दी थी. मुख्यमंत्री उड़न दस्ते ने विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की थी.

जोशी का कहना है कि इन खबरों के माध्यम से हम लगातार कोशिश कर रहे हैं कि उन कारणों को समझा जाए जिसके कारण बड़ा कारोबार करते हुए भी देश के बैंक लगातार दिवालिया होने की ओर बढ़ रहे हैं. जो बैंक अधिकारी सिर्फ बीमा पॉलिसी बेचने की एवज में विदेश यात्रा कर सकते हैं, वो अधिकारी थोड़े से लालच में क्या बैंक के ग्राहकों को किसी और तरीके से चूना लगाने की कोशिश नहीं करेंगे. हमारी सीबीआई से मांग है कि 2012 से अब तक हुई परचेज की भी विजीलेंस जांच कराई जाए.
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