किसानों के लिए जरूरी खबर- PMFBY पर 24 घंटे में दे बैंक को जानकारी, वरना हो सकता है नुकसान

किसानों के लिए जरूरी खबर- PMFBY पर 24 घंटे में दे बैंक को जानकारी, वरना हो सकता है नुकसान
फसल बीमा योजना नहीं लेना चाहते हैं तो करें ये काम

PM फसल बीमा योजना में बदलाव के बाद आपको बैंक में जाकर करना होगा ये काम, 24 जुलाई के बाद नहीं होगी सुनवाई

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नई दिल्ली. अगर आप किसान क्रेडिट कार्ड (Kisan credit card) धारक हैं तो आपके यह जरूरी खबर है. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana) में शामिल नहीं होना चाहते हैं तो बीमा के लिए तय की गई नामांकन की कट-ऑफ तारीख 31 जुलाई से सात दिन पहले यानी 24 तारीख तक अपने बैंक (Bank) शाखा को एक घोषणा पत्र दें. उसमें बताएं कि मैं इस योजना में शामिल नहीं होना चाहता. ऐसा करके आप योजना से खुद को अलग कर सकते हैं. अन्यथा यह लापरवाही आपकी जेब पर भारी पड़ेगी. बैंक से सीधे पीएम फसल बीमा योजना का प्रीमियम कट जाएगा.

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फायदे में बीमा कंपनियां



फसल बीमा के मामले में राष्ट्रीय स्तर पर किसानों से ज्यादा कंपनियों को फायदा मिला है. तीन साल में किसानों, केंद्र सरकार और राज्य सरकार द्वारा सामूहिक रूप से प्रीमियम के रूप में 76,154 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया जबकि किसानों ने सिर्फ 55,617 करोड़ रुपये की राशि दावों के रूप में प्राप्त की.
सरकार ने मानी किसानों की बात, किया स्वैच्छिक

फसल बीमा की अजीबोगरीब शर्तों की वजह से कंपनियां फायदे में और किसान घाटे में रहते हैं. इसलिए किसान संघ इस योजना को लंबे समय से फसल बीमा को स्वैच्छिक करने की मांग कर रहे थे. इसे स्वीकार करते हुए अब मोदी सरकार ने योजना को सभी किसानों के लिए खरीफ सीजन-2020 से स्वैच्छिक कर दिया है. वरना किसान क्रेडिट कार्ड लेने वालों का प्रीमियम ऑटोमेटिक कट जाता था.

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प्राकृतिक आपदा में फसल खराब होने के बाद फसल बीमा का है सहारा


2016 में जब इस स्कीम की शुरुआत की गई थी तब सभी लोन लेने वाले किसानों के लिए बीमा योजना (PMFBY) के तहत फसल का इंश्योरेंस करवाना अनिवार्य किया गया था. इसलिए किसान क्रेडिट कार्ड (KCC-Kisan credit card) लेने वाले करीब सात करोड़ किसानों को मजबूरन इसका हिस्सा बनना पड़ता था. इस वक्त करीब 58 फीसदी किसान ऋण लेने वाले हैं. अब देखना है कि स्वैच्छिक करने के बाद क्या बीमा करवाने वाले कम हो जाएंगे.

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योजना में शामिल होने के लिए ये दस्तावेज जरूरी

-नामांकन प्रक्रिया को पूरा करने के लिए किसानों (Farmers) को आधार संख्या (aadhaar card), बैंक पासबुक, भूमि रिकॉर्ड/ किरायेदारी समझौते, और स्व-घोषणा प्रमाण पत्र ले जाना होगा.



-इस सीजन में, योजना के तहत नामांकित सभी किसानों को उनके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबरों (Mobile Number) पर नियमित एसएमएस के माध्यम से आवेदन की स्थिति के बारे में सूचित किया जाएगा.

-किसानों के लिए परेशानी मुक्त नामांकन सुनिश्चित करने के लिए, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने बैंकों, बीमा कंपनियों, कॉमन सर्विस सेंटर (सीएसी), राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) और ग्राम स्तरीय 29,275 अधिकारियों को ट्रेनिंग दिया है.

योजना में बड़े बदलाव

-योजना को फसल ऋण के साथ-साथ स्वैच्छिक बनाया गया है.

-बीमा कंपनियों के लिए अनुबंध की अवधि को एक वर्ष से बढ़ाकर तीन वर्ष तक किया गया है.

-एकल जोखिम के लिए भी बीमा की अनुमति दी गई है. अब किसान अपनी फसलों के लिए अधिक महंगे बहु-जोखिम कारक, जिनमें से कई कारकों के किसी क्षेत्र विशेष में होने की संभावना न के बराबर होती है, के कवर के लिए भुगतान करने की बजाय उन जोखिम कारकों का चयन कर सकते हैं, जिसके लिए वे अपनी फसल का बीमा करवाना चाहते हैं.
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