इस साल आपको डिविडेंड पर होने वाली इनकम पर भी देना होगा टैक्स, जानिए सभी सवालों के जवाब

इस साल आपको डिविडेंड पर होने वाली इनकम पर भी देना होगा टैक्स, जानिए सभी सवालों के जवाब
डिविडेंड पर टैक्स के सभी नियम जानिए

इनकम टैक्स (Income Tax Returns) के नए नियमों के मुताबिक, अगर, अब अगर किसी को डिविडेंड मिलता है तो वो अब उसकी आमदनी में जुड़ जाएगा. ऐसे में टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स चुकाना होगा. आइए जानें इससे जुड़े सभी सवालों के जवाब...

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नई दिल्ली. अगर आपने किसी कंपनी में निवेश किया है और वो कंपनी डिविडेंड (Dividend) देती है तो उस आमदनी पर इस साल टैक्स चुकाना होगा. हालांकि, 1 फरवरी 2020 को पेश किए बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister of India) ने डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स (Dividend Distribution Tax) हटा दिया था. टैक्स एक्सपर्ट्स बताते हैं कि पहले कंपनियां डिविडेंड पर डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स देती थी. लेकिन अब ये निवेशकों की कुल आमदनी में जुड़ जाएगा. आइए जानें डिविडेंड और इसके टैक्स से जुड़ी सभी जरूरी बातें...

क्या होता है डिविडेंड-अगर आसान शब्दों में कहें तो किसी कंपनी को अगर मुनाफा हुआ. वो उसका कुछ हिस्सा अपने शेयरहोल्डर्स के साथ बांटती है. उसे डिविडेंड कहते हैं. जी हां, जो पैसा कंपनी ने आपसे लिया है. उससे वो बिजनेस करती है और मुनाफे में से हिस्सा आपके साथ बांटती है. लेकिन शेयरहोल्डर्स को डिविडेंड देना कंपनी के लिए अनिवार्य नहीं होता है. अगर कोई कंपनी डिविडेंड दे रही है तो गारंटी नहीं है कि आगे भी वो भी देगी. डिविडेंड देना है या नहीं कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स पर निर्भर करता है.

कितना डिविडेंड देना है, ये कंपनी की सालाना मीटिंग में तय होता है. इसे फाइनल डिविडेंड कहते हैं. अगर कंपनी वित्तीय वर्ष के बीच में ही डिविडेंड दे तो उसे इंटरिम डिविडेंड या अंतरिम लाभांश कहा जाता है. इंटरिम डिविडेंड तब दिया जाता है, जब कंपनी किसी वित्तीय वर्ष की पहली छमाही में प्रॉफिट कमाती है.



बीते वित्त वर्ष 2019-20 में डिविडेंड पर टैक्स का नियम- बीते वित्त में एक तय सीमा तक डिविडेंड टैक्स फ्री था. वहीं, लिमिट पार करते ही ये टैक्सबल हो जाता था. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि पिछले साल तक कंपनियां डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन के तौर पर टैक्स चुकाती थी. आम निवेशकों को डिविडेंड से होने वाली सालाना 10 लाख रुपये तक की आय पर कोई भी टैक्स नहीं चुकाना होता था. लेकिन 10 लाख रुपये से ज्यादा की डिविडेंड इनकम पर उन्हें 10 फीसदी की दर से टैक्स देना होता था.
मौजूदा वित्त वर्ष यानी 2020-21 में डिविडेंड पर टैक्स का नियम- मौजूदा वित्त वर्ष में टैक्स का नियम पूरी तरह से बदल गया है. अब कंपनियों को डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स नहीं देना है.  इसे बजट में हटा दिया गया है. लेकिन अब ये टैक्स आपसे वसूला जाएगा. अगर आसान शब्दों में कहें तो ये आपकी कुल आमदनी में जुड़ जाएगा. फिर उस पर स्लैब के हिसाब से टैक्स चुकाना होगा.

डिविडेंड पर कंपनियां कांटेगी अब TDS- नियम के मुताबिक, अगर आपको डिविडेंड के जरिए 5000 रुपये की आमदनी होती है तो टीडीएस नहीं कटेगा. लेकिन 5000 रुपये से ज्यादा की डिविडेंड इनकम पर 10 फीसदी की दर से टीडीएस देना होगा. लेकिन सरकर ने टीडीसी की दरें घटा दी है. इस लिहाज से 10 फीसदी की जगह 7.5 फीसदी की दर से TDS चुकाना  होगा. ये दरें 14 मई 2020 से 31 मार्च 2021 तक लागू है.

इसे उदाहरण के तौर पर समझते हैं. मान लीजिए, रवि को 20 अप्रैल 2020 को 1000 शेयर पर 5.50 रुपये प्रति शेयर के हिसाब से डिविडेंड मिला तो उसकी कुल रकम 5500 रुपये होती है. लेकिन उस समय TDS की दर 10% थी. इस लिहाज उन्हें 550 रुपये TDS देना होगा. इस लिहाज से उन्हें टैक्स काटकर 4950 रुपये मिलेंगे.

दूसरा उदाहरण- मान लीजिए, रवि को 14 जून 2020 को 1000 शेयर पर 10 रुपये प्रति शेयर के हिसाब से डिविडेंड मिला तो उसकी कुल रकम 10 हजार रुपये होती है. लेकिन उस समय TDS की दर 10 फीसदी की दर से घटकर 7.5 फीसदी पर आ गई. इस लिहाज से उन्हें 750 रुपये काटकर 9250 रुपये मिलेंगे.

एक और जरूरी बात अगर कंपनी के पास आपके पैन कार्ड की डिटेल नहीं है तो उस पर 20 फीसदी की दर से टीडीएस कटेगा.
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