खराब सब्जियों से CNG बनाकर लाखों में कमाई कर रही है ये मंडी, जानें बिजनेस मॉड्यूल

खराब सब्जियों से CNG बनाकर लाखों में कमाई कर रही है ये मंडी, जानें बिजनेस मॉड्यूल
खराब सब्जियों से गैस बना लाखों में कमाई कर रही है सूरत APMC

सूरत एपीएमसी खराब सब्जियों से गैस बनाने वाली देश की पहली APMC है. खेतीबाड़ी उत्पादन बाजार समिति को गैस से लाखों में कमाई हो रही है. हर रोज 40 से 50 टन खराब सब्जियों, फलों से गैस बन रही है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: June 21, 2020, 11:17 AM IST
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नई दिल्ली. सब्जी मंडी से निकले जैविक कचरे से गैस बनाकर सूरत एपीएमसी (APMC) लाखों में कमाई कर रही है. एक अभिनव प्रयोग द्वारा सूरत, गुजरात में खराब सब्जियों से गैस बनाकर गुजरात गैस कंपनी (Gujarat Gas Company) को आपूर्ति की जा रही है. इस प्रयोग से प्रदूषण से मुक्ति के साथ ही कूड़े से भी मुक्ति मिल रही है. बता दें कि बायोगैस (Biogas) हर उस चीज से बन सकती है, जो सड़ सकती है. फिर चाहे वह किचन वेस्ट हो या पेड़-पौधों के पत्ते... जैविक अपशिष्ट से यह आसानी से बनाई जाती है. कंपोस्टिंग से गैस हवा में चली जाती है, जबकि बायोगैस से उस व्यर्थ जाने वाली गैस का इस्तेमाल मानव उपयोग में किया जा सकता है.

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी. सूरत एपीएमसी खराब सब्जियों से गैस बनाने वाली देश की पहली APMC है. खेतीबाड़ी उत्पादन बाजार समिति को गैस से लाखों में कमाई हो रही है. हर रोज 40 से 50 टन खराब सब्जियों, फलों से गैस बन रही है. एपीएमसी गुजरात गैस को रोजाना 5100 scm बायो CNG की बिक्री कर रही है. इसके लिए सूरत एपीएमसी और गुजरात गैस कंपनी के बीच समझौता हुआ है जिसके तहत अंतर्राष्ट्रीय बाजार की कीमतों पर गैस की बिक्री होती है.

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रोजाना हो रहा 1000 क्यूबिक मीटर गैस का उत्पादन
सूरत APMC के चेयरमैन रमण जानी ने बताया कि इस प्लान में हर दिन 50 टन वेस्ट प्रोसेस हो रहा है और हर दिन 1000 cm गैस का उत्पादन हो रहा है. उन्होंने गुजरात गैस कंपनी के साथ हमने एमओयू किया है और उत्पादन हुआ गैस कंपनी की लाइन में चला जाता है.

ऐसे घर पर बना सकते हैं बायोगैस
किचन वेस्ट से बायोगैस यदि घर में बनाना है तो उसके लिए प्लास्टिक का एक ड्रम लें और उसमें एक या दो दिन थोड़ा गोबर डाल दें. इस ड्रम को 20 से 25 दिन के लिए ढंककर रख दें. इसके ढक्कन में एक छोटा छेद रखें, जिसमें से आप किचन वेस्ट उसमें डाल सकें. किचन वेस्ट डालने के बाद एक छड़ से उसे मिलाकर उस छेद को बंद कर दें.

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5-7 मिनट के लिए इस छेद को खुला रख सकते हैं, लेकिन ज्यादा देर खुला रखने पर गैस बाहर चली जाएगी. इस ड्रम में दो अन्य छेद भी रखें. एक छेद में पाइप डालकर उसे चूल्हे से जोड़ें, जिससे आप खाना पका सकें और दूसरे छेद से अतिरिक्त खाद बाहर निकल जाएगी. इसका इस्तेमाल बगीचे या खेत में किया जा सकता है. एक घर से निकलने वाले 1 हजार किलो किचन वेस्ट से 90 घन मीटर बायोगैस बन सकती है, जो कि 35 किलो एलपीजी गैस के बराबर होती है.
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