एक महीने में डीज़ल हुआ इतने रुपये सस्ता! एक्सपर्ट्स ने बताया अब क्यों बढ़ सकते हैं पेट्रोल के दाम?

पेट्रोल
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कच्चे तेल के बड़े एक्सपोर्टर्स की ओर से क्रूड (कच्चे तेल) के उत्पादन में कटौती के बाद अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कीमतें 5 महीने के ऊपरी स्तर पर पहुंच गई है. ऐसे में आपकी जेब पर ये असर होगा.

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कच्चे तेल के बड़े एक्सपोर्टर्स की ओर से क्रूड (कच्चे तेल) के उत्पादन में कटौती के बाद अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कीमतें 5 महीने के ऊपरी स्तर पर पहुंच गई है. ऐसे में भारत-चीन जैसे दुनिया के सबसे बड़े क्रूड खरीदार देशों की मुश्किलें बढ़ सकती है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर अन्य देश में उत्पादन में कटौती करते है तो कच्चा तेल फिर से महंगा हो जाएगा. लिहाजा भारत में पेट्रोल-डीज़ल की कीमतें फिर से बढ़ने लगेंगी. हालांकि, दुनिया के बड़ी रिसर्च एजेंसी गोल्डमैन सैक्स की ओर से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि क्रूड की कीमतों में इस साल बड़ी तेजी की उम्मीद नहीं है. ब्रेंट क्रूड की कीमतें 75 डॉलर प्रति बैरल के आस-पास रह सकती है. आपको बता दें कि फिलहाल ब्रेंट क्रूड के दाम 5 महीने के ऊपरी स्तर 71.18 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर है.

पिछले एक महीने में पेट्रोल हुआ महंगा, डीज़ल हुआ सस्ता- आईओसी की वेबसाइट पर दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, एक मार्च को एक लीटर पेट्रोल की कीमत 71.81 रुपये थी. वहीं, 8 अप्रैल को यह बढ़कर 72.85 रुपये हो गई है. इस लिहाज से करीब एक महीने के दौरान पेट्रोल के दाम 1.04 रुपये प्रति लीटर बढ़ गए है.

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एक लीटर डीज़ल की कीमतें इस दौरान 1.01 रुपये तक कम हो गई है. एक मार्च को एक लीटर डीज़ल की कीमत 67.12 रुपये थी. वहीं, 8 अप्रैल को यह बढ़कर 66.11 रुपये पर गई है.


पेट्रोल-डीजल के रेट्स इन आधार पर होते हैं तय- एनर्जी एक्सपर्ट्स नरेंद्र तनेजा ने न्यूज18 हिंदी को बताया कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियां तीन आधार पर पेट्रोल और डीजल के रेट्स तय करती हैं. पहला इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड (कच्चे तेल का भाव). दूसरा देश में इंपोर्ट (आयात) करते वक्त भारतीय रुपये की डॉलर के मुकाबले कीमत. इसके अलावा तीसरा आधार इंटरनेशनल मार्केट में पेट्रोल-डीजल के क्या भाव हैं.

इस साल 24 फीसदी महंगा हुआ कच्चा तेल -इस साल की बात करें तो 1 जनवरी से अबतक क्रूड की कीमतों में 23 फीसदी इजाफा हो चुका है. जनवरी के शुरू में क्रूड करीब 54 डॉलर प्रति डॉलर बैरल के भाव था, जो 9 अप्रैल 2019 को करीब 71.18 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया.


इससे आप पर क्या असर होगा?


महंगे क्रूड का असर निर्यात बिल, महंगाई, व्यापार घाटे के साथ ही राजकोषीय घाटे पर देखने को मिलता है. इनमें एक सीमा से ज्यादा बढ़ोतरी अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदेह बन जाती है. इससे रुपए की कीमत पर भी दबाव बढ़ जाता है. ऐसा होने पर यह आयात बिल को और बढ़ाने का काम करता है.

 (1) अपनी जरूरतों का करीब 80 फीसदी कच्चा तेल हम विदेशों से खरीदते हैं. ऐसे में कीमतें बढ़ने से देश का करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) बढ़ सकता है. क्रूड की कीमतें लगातार बढ़ने से भारत का इंपोर्ट बिल उसी रेश्‍यो में महंगा होगा, जिससे करंट अकाउंट डेफिसिट की स्थिति बिगड़ेगी.

(2) देश की ग्रोथ पर पड़ता है असर-इकोनॉमिक सर्वे के अनुसार, क्रूड की कीमतें अब 10 डॉलर बढ़ती हैं तो करंट अकाउंट डेफिसिट 1000 करोड़ डॉलर बढ़ सकता है. वहीं, इससे इकोनॉमिक ग्रोथ में 0.2 से 0.3 फीसदी तक कमी आती है. बता दें कि जनवरी से अबतक क्रूड 17 डॉलर के करीब महंगा हो चुका है. वहीं, इससे WPI इनफ्लेशन में 1.7 फीसदी की बढ़ोत्तरी होती है.

(3) बढ़ सकती है आपकी ईएमआई- एक्सपर्ट्स बताते हैं कि महंगे कच्चे तेल से पेट्रोल-डीज़ल के दाम बढ़ जाते है. ऐसे में देश में महंगाई भी बढ़ जाती है.

आरबीआई ब्याज दरें तय करने के लिए महंगाई को आधार मानता है. अगर महंगाई बढ़ी तो ब्याज दरें बढ़ जाती है. ऐसे में बैंक भी ब्याज दरें बढ़ा देते है और आपकी ईएमआई बढ़ जाती है.

 
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