एक दिन में ही पेट्रोल हो जाएगा 25 रुपये प्रति लीटर तक सस्ता, अगर सरकार हुई मेहरबान

एक दिन में ही पेट्रोल अगर 25 रुपये प्रति लीटर तक सस्ता हो जाए तो शायद आम आदमी के लिए इससे बड़ी खुशखबरी कोई नहीं होगी. ऐसा हो सकता है अगर पेट्रोल-डीज़ल पर लगने वाले टैक्स को हटाकर उसे जीएसटी (गुड्स एंड सर्विस टैक्स) में डाल दिया जाए.

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Updated: July 26, 2019, 1:08 PM IST
एक दिन में ही पेट्रोल हो जाएगा 25 रुपये प्रति लीटर तक सस्ता, अगर सरकार हुई मेहरबान
...तो एक दिन में ही पेट्रोल 25 रुपये तक हो सकता है सस्ता!
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Updated: July 26, 2019, 1:08 PM IST
एक दिन में ही पेट्रोल अगर 25 रुपये प्रति लीटर तक सस्ता हो जाए तो शायद आम आदमी के लिए इससे बड़ी खुशखबरी कोई नहीं होगी. ऐसा हो सकता है अगर पेट्रोल-डीज़ल पर लगने वाले टैक्स को हटाकर उसे जीएसटी (गुड्स एंड सर्विस टैक्स) में डाल दिया जाए. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि ऐसा संभव है क्योंकि केंद्र सरकार और राज्य सरकार पेट्रोल पर फिलहाल 35 रुपये से ज्यादा टैक्स वसूल रही हैं. ऐसे में अगर कीमतों को जीएसटी में लाया जाता है तो एक झटके में पेट्रोल के दाम 25 रुपये तक कम हो जाएंगे.

जीएसटी में लाने को लेकर चर्चा शुरू
पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों को एक बार फिर से जीएसटी में लाने को लेकर चर्चा शुरू हो गई है. उद्योग मंडल एसोचैम ने पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स को जीएसटी में शामिल करने एवं स्टांप शुल्क जैसे कुछ स्थानीय एवं कुछ राज्य टैक्स को भी इसमें शामिल करने की मांग की है. अगर ऐसा होता है तो पेट्रोल के दामों में भारी गिरावट देखने को मिल सकती है.आपको बता दें कि IOC की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल पर 35.56 रुपये वैट और एक्साइज ड्यूटी के तौर पर चुकाए जाते है. ऐसे में अगर सरकार ये फैसला लेती है तो पेट्रोल 25 रुपए तक सस्ता हो सकता है.

आइए जानें पेट्रोल कितना हो सकता है सस्ता...

IOC की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल पर 35.56 रुपये वैट और एक्साइज ड्यूटी के तौर पर चुकाए जाते है. इसके अलावा औसतन डीलर कमीशन 3.57 रुपये प्रति लीटर है. साथ ही, 0.31 रुपये प्रति लीटर माल-भाड़े के रूप में चार्ज किए जाते हैं. इस लिहाज से 16 जुलाई को तय हुई एक लीटर पेट्रोल की कीमतों पर लगने वाले टैक्स और कमीशन नीचे दी गई टेबल में देख सकते हैं.



अब अगर पेट्रोल जीएसटी में आता है तो क्या होगा- एसकोर्ट सिक्योरिटी के रिसर्च हेड आसिफ इकबाल ने न्यूज18 हिंदी को बताया कि जितनी पेट्रोल की कीमत होती है लगभग उतना ही टैक्स भी लगता है. कच्चा तेल खरीदने के बाद रिफाइनरी में लाया जाता है और वहां से पेट्रोल-डीज़ल की शक्ल में बाहर निकलता है. इसके बाद उस पर टैक्स लगना शुरू होता है. सबसे पहले एक्साइज़ ड्यूटी केंद्र सरकार लगाती है. फिर राज्यों की बारी आती है जो अपना टैक्स लगाते हैं. इसे सेल्स टैक्स या वैट कहा जाता है.
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>> इसके साथ ही पेट्रोल पंप का डीलर उस पर अपना कमीशन जोड़ता है. अगर आप केंद्र और राज्य के टैक्स को जोड़ दें तो यह लगभग पेट्रोल या डीजल की वास्तविक कीमत के बराबर होती है. उत्पाद शुल्क से अलग वैट एड-वेलोरम (अतिरिक्त कर) होता है, ऐसे में जब पेट्रोल-डीज़ल के दाम बढ़ते हैं तो राज्यों की कमाई भी बढ़ती है.



>> अगर पेट्रोल-डीज़ल को जीएसटी के दायरे में लाया जाता है तो आम लोगों की मौज तय है. लेकिन केंद्र और राज्य सरकार को इससे नुकसान हो सकता है.

>> आसिफ कहते हैं कि अगर 25 जुलाई के दाम देखें तो साफ़ है कि अगर टैक्स न लगें तो पेट्रोल के दाम काफ़ी नीचे आ जाएंगे. 73.27 रुपए प्रति लीटर का दाम टैक्स (एक्साइज़ ड्यूटी और वैट) हटने पर 37.70 रुपये प्रति लीटर रह जाएगा.

और अगर इसमें 28% की दर से जीएसटी जोड़ लिया जाए तो भी ये 48.25 रुपये प्रति लीटर बैठेगा.

>> अगर एक लीटर पेट्रोल 73 रुपये के बजाय 48 रुपये में बिकने लगे तो ये कितनी बड़ी राहत होगी, इसका अंदाज़ा लगाना आसान है.

लेकिन क्या पेट्रोल को जीएसटी के दायरे में लाना इतना आसान है? शायद नहीं! अर्थशास्त्रियों का कहना है कि अब ये फ़ैसला सिर्फ केंद्र सरकार नहीं कर सकती है. क्योंकि राज्य भी जीएसटी काउंसिल की बैठक का प्रमुख हिस्सा है.

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First published: July 26, 2019, 11:12 AM IST
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