PMO के पास नहीं है पूर्व प्रधानमंत्रियों के इनकम टैक्स रिटर्न का रिकॉर्ड, RTI में हुआ खुलासा

देश के पूर्व प्रधानमंत्रियों के इनकम टैक्स रिटर्न को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के पास कोई जानकारी नहीं है. साथ ही, PMO के पास पूर्व प्रधानमंत्रियों के इनकम टैक्स के रिफंड का भी कोई रिकॉर्ड नहीं है.

News18Hindi
Updated: May 27, 2019, 3:19 PM IST
PMO के पास नहीं है पूर्व प्रधानमंत्रियों के इनकम टैक्स रिटर्न का रिकॉर्ड, RTI में हुआ खुलासा
PMO के पास नहीं है पूर्व प्रधानमंत्रियों के इनकम टैक्स रिटर्न का रिकॉर्ड, RTI में हुआ खुलासा
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Updated: May 27, 2019, 3:19 PM IST
देश के पूर्व प्रधानमंत्रियों के इनकम टैक्स रिटर्न को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के पास कोई जानकारी नहीं है. साथ ही, PMO के पास पूर्व प्रधानमंत्रियों के इनकम टैक्स के रिफंड का भी कोई रिकॉर्ड नहीं है. यह खुलासा सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी में सामने आया है. PMO ने पीटीआई की ओर से दायर आरटीआई आवेदन के जवाब में कहा है कि पूर्व प्रधानमंत्रियों से संबंधित रिकॉर्ड कार्यालय के पास उपलब्ध नहीं है.आपको बता दें कि आरटीआई के तहत पूर्व प्रधानमंत्रियों और उनकी मंत्रिपरिषद के सदस्यों को मिले इनकम टैक्स रिफंड की जानकारी मांगी गई थी.

एनएसडीएल ई-गवर्नेंस इन्फ्रास्ट्रक्चर लि. द्वारा प्रबंधित आयकर विभाग के कर सूचना नेटवर्क द्वारा रिफंड के बारे में उपलब्ध कराई जाती है. आंकलन वर्ष 2001-02 से इस प्लेटफार्म पर किसी व्यक्ति के स्थायी खाता संख्या (PAN) के जरिये आनलाइन रिफंड की स्थिति की जानकारी ली जा सकती है.



क्या है मामला
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, PMO की ओर से जारी जवाब में कहा गया है कि जो सूचना मांगी गई है वह व्यक्तिगत प्रकृति की है और RTI कानून की धारा 8 (1) (आई) के तहत इसकी छूट है.

यह धारा ऐसी व्यक्तिगत सूचना के खुलासे से रोकती है जिसका सार्वजनिक हित या गतिविधि से कोई संबंध नहीं है. (ये भी पढ़ें-मोदी सरकार के 100 दिन का प्लान तैयार!नौकरियां बढ़ाने पर फोकस)

यह व्यक्ति की गोपनीयता को बेवजह का दखल होगा. हालांकि, केंद्रीय सार्वजनिक सूचना अधिकारी या राज्य सार्वजनिक सूचना अधिकारी या अपीलीय प्राधिकरण को यदि किसी मामले में लगता है कि वृहद जनहित में इस तरह का खुलासा किया जाना चाहिए तो ऐसा किया जा सकता है.

हालांकि यह धारा आगे यह भी कहती है कि यदि कोई सूचना संसद या राज्यों के विधानसभा को दी जा सकती है तो इसे किसी व्यक्ति को देने से इनकार नहीं किया जा सकता.
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