नहीं थम रही रुपये में गिरावट! एक अमेरिकी डॉलर की कीमत 72.20 रुपये हुई

नहीं थम रही रुपये में गिरावट! एक अमेरिकी डॉलर की कीमत 72.20 रुपये हुई
योजना के लिए कहां से आएगा पैसा: इस पूरी योजना के लिए कई माध्यमों से पैसा वसूला जाएगा. इसमें पेरिस जलवायु समझौते के तहत ग्रीन एनर्जी के विकास फंड धन लिया जाएगा. साथ संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से ग्रीन एनर्जी के फंड से इसे जुटाया जाएगा. साथ ही रिलायंस जैसे प्राइवेट पार्टनर की मदद से भी फंड इक्ट्ठा किया जाएगा.

भारतीय रुपये में गिरावट थमने का नाम नहीं ले रही है. बुधवार को एक अमेरिकी डॉलर 35 पैसे कमजोर होकर 72.20 पर खुला है.

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  • Last Updated: December 12, 2018, 10:37 AM IST
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भारतीय रुपये में गिरावट थमने का नाम नहीं ले रही है. बुधवार को एक अमेरिकी डॉलर 35 पैसे कमजोर होकर 72.20 पर खुला है. सोमवार को रुपया 51 पैसे कमजोर होकर 71.85 प्रति डॉलर पर बंद हुआ. एक्सपर्ट्स का कहना है कि उर्जित पटेल के इस्तीफ का असर रुपये पर है. लेकिन अब RBI को नए गवर्नर मिल चुके है. सभी की निगाहें अब उनके अगले कदम पर टिकी हैं.

आपको बता दें कि उर्जित पटेल के इस्तीफे के बाद शक्तिकांत दास को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) का नया गवर्नर नियुक्त किया गया है. शक्तिकांत दास फिलहाल वित्त आयोग के सदस्य हैं. वो पूर्व वित्त सचिव भी रह चुके हैं. कहा जा रहा है कि दो साल पहले शक्तिकांत दास ने नोटबंदी के दौरान बेहद अहम भूमिका निभाई थी.

ये भी पढ़ें-RBI को मिले नए गवर्नर, शक्तिकांत दास संभालेंगे कमान



75 तक गिर सकता है रुपया- फिच रेटिंग्स का अनुमान है कि 2019 के आखिर तक डॉलर के मुकाबले रुपया 75 रुपए तक गिर सकता है. फिच के मुताबिक चालू खाते का घाटा बढ़ने और दुनिया में कर्ज महंगा होने से रुपए में गिरावट आएगी. एशिया में इस समय रुपया सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्रा है. यह इस साल में 15 फीसदी तक कमजोर हो चुका है. इस साल 9 अक्टूबर को एक डॉलर के सामने 74.39 रुपए तक स्तर तक नीचे आ गया था. (ये भी पढ़ें-इस नोट पर पहले से छप रहे हैं शक्तिकांत दास के साइन)






अब आगे क्या- मार्सेलस इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के सौरभ मुखर्जी का कहना है कि आगे रुपये में कमजोरी और गहरा सकती है जिसका फायदा आईटी और फार्मा सेक्टर को फायदा मिलेगा. सौरभ मुखर्जी के मुताबिक डॉलर का भाव 75 रुपये के पार जा सकता है. ऐसे में निवेशक फार्मा कंपनियों के शेयरों में खासकर डॉ. रेड्डीज और आईटी कंपनी में टीसीएस का शेयर खरीद सकते है.

आम आदमी पर क्या होगा असर
> भारत अपनी जरूरत का करीब 80 फीसदी पेट्रोलियम प्रोडक्‍ट आयात करता है.
> रुपये में गिरावट से पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का आयात महंगा हो जाएगा.
> तेल कंपनियां पेट्रोल-डीजल की घरेलू कीमतों में बढ़ोतरी कर सकती हैं.
> डीजल के दाम बढ़ने से माल ढुलाई बढ़ जाएगी, जिसके चलते महंगाई में तेजी आ सकती है.
> इसके अलावा, भारत बड़े पैमाने पर खाद्य तेलों और दालों का भी आयात करता है.
> रुपये के कमजोर होने से घरेलू बाजार में खाद्य तेलों और दालों की कीमतें बढ़ सकती हैं.
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