इस सरकारी बैंक ने ग्राहकों को दिया तोहफा, सस्ती हो गई होम-ऑटो लोन की EMI

यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने अलग-अलग टेन्योर के लिए बेंचमार्क उधार दर में 0.05-0.20 फीसदी की कटौती की घोषणा की.

News18Hindi
Updated: July 30, 2019, 6:58 PM IST
इस सरकारी बैंक ने ग्राहकों को दिया तोहफा, सस्ती हो गई होम-ऑटो लोन की EMI
इस सरकारी बैंक ने ग्राहकों को दिया तोहफा
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Updated: July 30, 2019, 6:58 PM IST
सरकारी बैंक यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (Union Bank of India) ने ग्राहकों को तोहफा देते हुए मार्जिनल कॉस्ट ऑफ लेंडिंग रेट (MCLR) में कटौती की घोषणा की है. यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने अलग-अलग टेन्योर के लिए बेंचमार्क उधार दर में 0.05-0.20 फीसदी की कटौती की घोषणा की. इसके बाद बैंक का होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन सस्ता हो जाएगा. नई दरें 1 अगस्त से लागू होगी.

MCLR घटने से आम आदमी को सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि उसका मौजूदा लोन सस्ता हो जाता है और उसे पहले की तुलना में कम EMI देनी पड़ती है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने फरवरी से अब तक रेपो दरों में 0.75 फीसदी की कटौती की है. उसने भी बैंकों से इसका लाभ जल्द से जल्द ग्राहकों को हस्तांतरित करने के लिए कहा है.

कितना सस्ता हुआ लोन
कटौती के बाद अब 1 साल अवधि वाले कर्ज के लिए MCLR 8.55 फीसदी से घटकर 8.50 फीसदी हो गई है. बैंक के एक दिन और एक माह की अवधि वाले लोन पर ब्याज दर घटकर 8.10 फीसदी हो गई. पहले यह ब्याज दर 8.25 फीसदी और 8.30 फीसदी थी. बैंक के तीन माह और छह माह की अवधि वाले लोन पर ब्याज दर 0.10 फीसदी घटकर क्रमश: 8.25 फीसदी और 8.35 फीसदी रह गयी.



क्या है MCLR?
MCLR को मार्जिनल कॉस्ट ऑफ लेंडिंग रेट भी कहते हैं. इसमें बैंक अपने फंड की लागत के हिसाब से लोन की दरें तय करते हैं. ये बैंचमार्क दर होती है. इसके बढ़ने से आपके बैंक से लिए गए सभी तरह के लोन महंगे हो जाते हैं.
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MCLR कम होने से होता है ये असर
MCLR कम होने से आम आदमी को सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि उसका मौजूदा लोन सस्ता हो जाता है और उसे पहले की तुलना में कम ईएमआई देनी पड़ती है.

कैसे तय होता है MCLR?
मार्जिनल का मतलब होता है- अलग से या अतिरिक्त. जब भी बैंक लेंडिंग रेट तय करते हैं, तो वे बदली हुई स्थ‍ितियों में खर्च और मार्जिनल कॉस्ट को भी कैलकुलेट करते हैं. बैंकों के स्तर पर ग्राहकों को डिपॉजिट पर दिए जाने वाली ब्याज दर शामिल होती है. MCLR को तय करने के लिए चार फैक्टर को ध्यान में रखा जाता है. इसमें फंड का अतिरिक्त चार्ज भी शामिल होता है. निगेटिव कैरी ऑन CRR भी शामिल होता है. साथ ही, ऑपरेशन कॉस्ट औक टेन्योर प्रीमियम शामिल होता है.

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First published: July 30, 2019, 6:58 PM IST
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