बिना ज़मीन वाले किसानों के लिए मोदी सरकार की नई स्कीम! खेती के लिए खातों में पैसा डालने की तैयारी

किसानों की कर्जमाफी के बदले मोदी सरकार ने नया प्रस्ताव तैयार कर लिया है. नए प्रस्ताव के मुताबिक, किसानों के खाते में सीधे रकम दी जाएगी. बिना जमीन वाले किसानों को भी इसमें शामिल किया जा सकता है.

News18Hindi
Updated: January 11, 2019, 11:42 AM IST
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Updated: January 11, 2019, 11:42 AM IST
लक्ष्मण रॉय

मोदी सरकार किसानों को लुभाने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रही है. सीएनबीसी-आवाज़ को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, किसानों के लिए राहत पैकेज का प्रस्ताव तैयार हो गया. इस पर सरकार जल्द फैसला ले सकती है. नए प्रस्ताव में बिना ज़मीन वाले किसानों को भी शामिल किया गया है. नए प्रस्ताव के तहत किसानों के खाते में सीधे पैसे ट्रांसफर किए जाएंगे.

क्या है नया प्रस्ताव-किसानों की कर्जमाफी के बदले मोदी सरकार ने नया प्रस्ताव तैयार कर लिया है. नए प्रस्ताव के मुताबिक, किसानों के खाते में सीधे रकम दी जाएगी. बिना जमीन वाले किसानों को भी इसमें शामिल किया जा सकता है. प्रस्ताव में ओडिशा, तेलंगाना मॉडल की झलक है. स्कीम के तहत हर परिवार के लिए रकम की अधिकतम सीमा तय की जाएगी. (ये भी पढ़ें: GST काउंसिल की बैठक में हुए ये 4 बड़े फैसले, जानिए किसको क्‍या मिला)



प्रस्ताव में दो राज्य की झलक- प्रस्ताव में दो राज्य ओडिशा और तेलंगाना मॉडल की झलक है. तेलंगाना में हर बुआई सीजन से पहले 4000 रुपये प्रति एकड़ दी जाती है. वहीं ओडिशा में प्रति परिवार 5000 रुपये किसानों को देने की स्कीम है. स्कीम के तहत किसानों को सरकारी खरीद कीमत सुनिश्चित की जाएगी

इस पैकेज में बीमा, कृषि कर्ज, आर्थिक मदद एक साथ देने पर विचार हो रहा है. सरकार व्यक्तिगत फायदा देने के बजाए परिवार को मदद देने पर विचार कर सकती है. इस स्कीम के तहत किसान परिवार के अलावा ज्यादा आर्थिक रूप से पिछड़े परिवार को मदद देने की रणनीति बन रही है. स्कीम में छोटे, सीमांत और बटाईदारों या किराया पर किसानी करने वाले किसानों को फायदा देने पर जोर है. इस स्कीम के तहत किसानों 0% ब्याज पर लोन देने पर फैसला हो सकता है.

सरकार ओडिशा के "कालिया" मॉडल का कर रही है अध्ययन- किसानों को राहत देने के लिए मोदी सरकार "कालिया" का अध्ययन कर रही है. कालिया मॉडल के तहत प्रति किसान परिवार 5 क्रॉप सीजन के लिए 25000 रुपये देने का प्रस्ताव है. सलाना एक मुश्त आर्थिक मदद देने पर विचार है. इसके साथ ही सरकार आर्थिक बोझ की समीक्षा कर रही है.

(इकोनॉमिक पॉलिसी एडिटर, सीएनबीसी-आवाज़)
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