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इन दिवालिया कंपनियों में फंसे LIC के 11000 करोड़ रुपये

इन दिवालिय कंपनियों में फंसे LIC के 11000 करोड़ रुपये

लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन (Life Insurance Corporation) ने जिन डेट सिक्यॉरिटीज (Debt Securities) में पैसा लगाया है. उनमें से 11,000 करोड़ रुपये के निवेश पर उसे इश्यूअर की तरफ से डिफॉल्ट का सामना करना पड़ा है.

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    नई दिल्ली. लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन (Life Insurance Corporation) ने जिन डेट सिक्यॉरिटीज (Debt Securities) में पैसा लगाया है, उनमें से 11,000 करोड़ रुपये के निवेश पर उसे इश्यूअर की तरफ से डिफॉल्ट का सामना करना पड़ा है. ये डेट सिक्यॉरिटीज खासतौर पर DHFL, रिलायंस कैपिटल, रिलायंस होम फाइनैंस और सिंटेक्स इंडस्ट्रीज के हैं. जिन्हें रेटिंग कंपनियों ने डाउनग्रेड कर जंक कर दिया है. एलआईसी का पैसा ऐसी कई कंपनियों में लगा हुआ है, जो फिलहाल इनसॉल्वेंसी प्रॉसेस से गुजर रही हैं. इनमें आलोक इंडस्ट्रीज, ABG शिपयार्ड, एमटेक ऑटो, मंधाना इंडस्ट्रीज, जेपी इन्फ्राटेक, ज्योति स्ट्रक्चर्स, रेनबो पेपर्स और ऑर्किड फार्मा शामिल हैं.

    LIC ने DHFL में किए गए 6,500 करोड़ रुपये के निवेश के लिए प्रोविजनिंग की है जो उसने अपने लाइफ और पेंशन फंड के वास्ते किए थे. कंपनी को जून में डाउनग्रेड कर डिफॉल्ट कैटिगरी में डाल दिया गया था. LIC ने रिलायंस कैपिटल में 4,000 करोड़ रुपये का निवेश किया है. कंपनी सितंबर में बैंकों के लिए एनपीए हो गई थी.

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    LIC की टोटल डेट बुक 4 लाख करोड़ रुपये की है और इसके पास 30 लाख करोड़ रुपये का ऐसेट अंडर मैनेजमेंट है. LIC के कुल 22,553 करोड़ रुपये के ऐसेट को सितंबर क्वॉर्टर में डाउनग्रेड किया गया था. इसमें से 4,300 करोड़ रुपये के ऐसेट को रेटिंग एजेंसियों ने डाउनग्रेड करके जंक कैटिगरी में डाल दिया था जो उसने पेंशन और लाइफ फंड के लिए रिलायंस कैपिटल से खरीदे थे.

    LIC का ग्रॉस नॉन परफॉर्मिंग ऐसेट 2018-19 में 6.15 पर्सेंट रहा जो पिछले फिस्कल में 6.23 पर्सेंट था. उसने बैड लोन के लिए प्रोविजनिंग बढ़ाई है जिसके चलते उसका नेट एनपीए 1.82% से घटकर 0.27% रह गया. कंपनी का NPA 31 मार्च 2019 को 24,777 करोड़ रुपये था. कंपनी ने इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनैंस में 3,250 करोड़ रुपये लगाए हुए हैं जिसे AAA से डाउनग्रेड करके AA+ कर दिय गया है. पिरामल कैपिटल ऐंड हाउसिंग में इसके 1,500 करोड़ रुपये लगे हैं जिन्हें AA+ से डाउनग्रेड करके AA किया गया है. इसके लगभग 6,000 करोड़ रुपये यस बैंक में भी लगे हुए हैं.

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    कंपनी ने पिछले फिस्कल ईयर में अपने डाउटफुल एसेट के लिए प्रोविजनिंग 25% बढ़ाकर 25,000 करोड़ रुपये कर दी है. उसने यह कदम रियल एस्टेट, लोन और दूसरे ऐसेट्स में किए गए निवेश की गुणवत्ता और प्रदर्शन को देखते हुए उठाया है.

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