Investors को झटका! अब सितंबर 2022 से पहले LIC का IPO आने की उम्मीद नहीं, जानिए क्या है मामला?

 इन्वेस्टर को झटका! अब सितंबर 2022 से पहले LIC का IPO आने की उम्मीद नहीं
इन्वेस्टर को झटका! अब सितंबर 2022 से पहले LIC का IPO आने की उम्मीद नहीं

सरकार LIC में अपनी 10 फीसदी हिस्सेदारी बेचने के लिए IPO लाने जा रही थी. सरकार का लक्ष्य इस IPO के जरिये करीब 90 हजार करोड़ रुपये जुटाने का था. लेकिन LIC का IPO इस वित्त वर्ष में आना अब मुश्किल लग रहा है. जानिए क्या है मामला..

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नई दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने वर्ष 2020-21 के अपने बजट भाषण में भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के विनिवेश (Disinvestment) की बात कही थी और मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में 2.1 लाख करोड़ रुपये की रकम Disinvestment से जुटाने का लक्ष्य रखा था. लेकिन अब सरकार की इस योजना पर पानी फिरता नजर आ रहा है. केंद्र सरकार को LIC में अपनी हिस्सेदारी बेचने से बड़ी रकम मिलने की उम्मीद थी. सरकार LIC में अपनी 10 फीसदी हिस्सेदारी बेचने के लिए IPO लाने जा रही थी. सरकार का लक्ष्य इस IPO के जरिये करीब 90 हजार करोड़ रुपये जुटाने का था. लेकिन LIC का IPO इस वित्त वर्ष में आना अब मुश्किल लग रहा है. इस मामले से जुड़े सूत्रों ने मनी कंट्रोल को बताया कि ताजा परिस्थितियों के कारण LIC का IPO अब सितंबर 2022 से पहले आना मुश्किल है.

सरकार और LIC में उच्च पद पर कार्यरत और इस मामले से जुड़े एक वरिष्ठ सूत्र ने मनी कंट्रोल को बताया कि धीमी तैयारियों और औपचारिकताओं को पूरा करने में देरी होने के चलते यह स्थिति पैदा हुई है और IPO अब वित्त वर्ष 2022 के दूसरे क्वार्टर के बाद ही आ पाएगा. अधिकारी ने बताया कि अगले 6 महीनों में यह गजद आना मुश्किल है, क्योंकि अभी बहुत सी तैयारियां की जानी बाकी है. आमतौर पर IPO लाने में 6 से 9 महीने तक का वक्त लगता है. इसके अलावा एलआईसी ऐक्ट (LIC Act) में तब्दीली के लिए भी वक्त चाहिए. ऐसे में इस प्रक्रिया में देरी होना तय माना जा रहा है.

फंड जुटाने की मुहिम को झटका
अधिकारी ने बताया कि इस वित्त वर्ष में LIC का IPO नहीं आने से सरकार ने विनिवेश से जो 2.1 लाख करोड़ रुपये का फंड जुटाने का लक्ष्य रखा है उसे तगड़ा झटका लगा है. LIC का IPO नहीं आने से यह आंकड़ा 1 लाख करोड़ रुपये पर ही अटक सकता है. अधिकारी ने बताया कि LIC के IPO के अलावा बीपीसीएल (BPCL) के निजीकरण की प्रक्रिया भी धीमी चल रही है. उम्मीद जताई जा रही है कि 31 मार्च तक BPCL का प्राइवेटाइजेशन (Privatization) किया जा सकता है. हाल ही में डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज की ओर से तैयार किए गए प्रस्ताव में एलआईसी ऐक्ट में संशोधन की बात कही गई है ताकि 25 पर्सेंट हिस्सेदारी बेची जा सके. सूत्रों के मुताबिक एलआईसी ऐक्ट में संशोधन का बिल संसद में दिसंबर महीने में पेश किया जा सकता है. प्रस्ताव के मुताबिक पहले राउंड में LIC की 10% हिस्सेदारी बेचने के लिए IPO लाया जाना था. यह IPO मार्केट के हालात को ध्यान में रखते हुए लाया जाएगा.
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इन वजहों से हो रही देरी
LIC का IPO आने में देरी होने की कई वजहें हैं. सरकार ने अब तक इस IPO के लिए लीड मैनजर और लीगल एजवाइजर (lead managers and legal advisor) तक की नियुक्ति नहीं की है. अगस्त में सरकार ने SBI और Deloitte को प्री-आईपीओ एडवाइजर नियुक्त किया था. इस दिशा में केवल यही एक बड़ी प्रगति हुई है. इसके अलावा इस IPO के साइज, वैल्यू और फ्लोर प्राइस तय नहीं है. सके अलावा LIC को दूसरी लिस्टेड कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी को अभी कम करना है और इस IPO के लिए अपने बैलेंस शीट को एडजस्ट करना है ताकि LIC एक्ट के प्रावधानों के तहत IPO लाया जा सके. साथ ही सरकार को LIC में अपनी हिस्सेदारी कम करने के लिए संसद से LIC Act में संशोधन कराना अभी बाकी है.
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