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LIC IPO से पहले केंद्र का बड़ा फैसला! सूचीबद्ध सरकारी कंपनियों में 25% पब्लिक होल्डिंग का नियम किया खत्म

LIC IPO से पहले केंद्र सरकारी कंपनियों में पब्लिक होल्डिंग के नियम को खत्‍म कर सकता है.

LIC IPO से पहले केंद्र सरकारी कंपनियों में पब्लिक होल्डिंग के नियम को खत्‍म कर सकता है.

केंद्र सरकार भारतीय जीवन बीमा निगम का आईपीओ (LIC IPO) लाने की तैयारी में जुटी है. अगर मिनिमम पब्लिक होल्डिंग (Minimum Public Holding) का नियम खत्‍म हो जाता है तो बड़े निवेशकों (Large Investors) को ज्यादा हिस्सेदारी दे दी जाएगी.

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    नई दिल्‍ली. केंद्र सरकार ने देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम के आईपीओ (LIC IPO) से पहले सार्वजनिक क्षेत्र की सूचीबद्ध कंपनियों (Listed PSUs) में मिनिमम पब्लिक होल्डिंग (Minimum Public Holding) के नियम को खत्म कर दिया है. केंद्र ने इस संबंध में अधिसूचना भी जारी कर दी है. इसके लिए सरकार ने सिक्‍योरिटी कॉन्‍ट्रैक्‍ट (रेग्‍युलेशन) रूल्‍स, 1957 के पब्लिक लिस्टिंग नियमों में एक नया नियम जोड़ दिया है. बता दें कि अभी तक पूंजी बाजार नियामक सेबी (SEBI) के नियमों के मुताबिक, सूचीबद्ध कंपनियों में कम से कम 25 फीसदी हिस्‍सेदारी खुदरा निवेशकों के पास होना अनिवार्य है.

    सेबी ने 2010 में जनता की हिस्‍सेदारी को किया था 25 फीसदी
    साल 2010 तक सेबी के नियम के तहत किसी भी सूचीबद्ध कंपनी में खुदरा निवेशकों (Retail Investors) की हिस्‍सेदारी 10 फीसदी होनी अनिवार्य थी. फिर साल 2010 में खुदरा निवेशकों की अनिवार्य हिस्‍सेदारी को बढ़ाकर 25 फीसदी किया गया था. सेबी की ओर से कंपनियों को इसमें थोड़ी राहत भी मिलती है. इसके तहत कंपनियों को सूचीबद्धता के 3 साल के भीतर जनता की हिस्‍सेदारी (Public Holding) की सीमा को पूरा करना होता था. अब सरकार ने एलआईसी का आईपीओ जल्‍द जाने के लिए इस नियम को सरकारी कंपनियों के लिए बदल दिया है. नए नियम के मुताबिक, जनता की अनिवार्य हिस्‍सेदारी की शर्त 5 साल में पूरी करनी होगी.

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    केंद्र सरकार बदल सकती है नियम का कोई भी प्रावधान
    सिक्‍योरिटी कॉन्‍ट्रैक्‍ट (रेग्‍युलेशन) रूल्‍स, 1957 का नियम-19ए कहता है कि सूचीबद्ध कंपनी में प्रमोटर (Company Promotors) के अलावा कम से कम 25 फीसदी हिस्‍सेदारी जनता की होनी चाहिए. ये हिस्‍सेदारी व्‍यक्तिगत निवेशक या संस्‍थागत निवेशक (Individual/Institutional Investors) किसी को भी बेची जा सकती है. वित्‍त मंत्रालय (Ministry of Finance) के 30 जुलाई 2021 को जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, केंद्र सरकार जनहित में इस नियम के सभी या किसी भी प्रावधान को खत्‍म कर सकती है. माना जा रहा है कि सरकार के जनता की न्‍यूनतम हिस्‍सेदारी के नियम को खत्‍म करने से बड़े निवेशकों को ज्‍यादा हिस्‍सेदारी मिल सकती है.
    एलआईसी में सरकार की हिस्‍सेदारी है 100 करोड़ रुपये
    एलआईसी का इश्यू मार्च 2022 के पहले पेश करने की तैयारी चल रही है. इसके जरिये सरकार 1 लाख करोड़ रुपये तक जुटाने की योजना बना रही है. लिस्टिंग के बाद इसका मार्केट कैपिटलाइजेशन 10-12 लाख करोड़ रुपये होने की उम्मीद है. कंपनी ने योग्य पॉलिसीधारकों का डाटाबेस बनाना शुरू कर दिया है. बता दें कि एलआईसी में सरकार की कैपिटल 100 करोड़ रुपये है. पिछले 50 साल से यह केवल 5 करोड़ रुपये ही थी. साल 2012 में इसे बढ़ाकर 100 करोड़ रुपये किया गया. सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचने के लिए काम करने वाले डिपॉर्टमेंट ऑफ इन्वेस्टमेंट एंड पब्लिक असेट मैनेजमेंट (DIPAM) ने 15 जुलाई को आईपीओ के लिए बुक रनिंग लीड मैनेजर, कानूनी सलाहकार और शेयर ट्रांसफर एजेंट्स को नियुक्त करने के लिए आवेदन मंगाया है.

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