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    LIC का IPO: वित्त वर्ष 2021-22 में खिसक सकता है जीवन बीमा निगम का पब्लिक ऑफर

    एलआईसी का आईपीओ वित्‍त वर्ष 2021-22 में गिर सकता है.
    एलआईसी का आईपीओ वित्‍त वर्ष 2021-22 में गिर सकता है.

    केंद्र सरकार (Central Government) के 31 मार्च 2021 को समाप्त हो रहे चालू वित्त वर्ष में रिकॉर्ड 2.1 लाख करोड़ रुपये के विनिवेश (Disinvestment) का लक्ष्य पाने के लिये भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) में हिस्सेदारी की बिक्री काफी अहम है. इसी के तहत आईपीओ (IPO) लाने से पहले का काम चार चरण में पूरा किया जा रहा है.

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 25, 2020, 4:31 PM IST
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    नई दिल्ली. केंद्र सरकार (Central Government) देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के स्वतंत्र बीमांकिक मूल्यांकन (Independent Actuarial Assessment) को देखना चाहती है. ऐसे में एलआईसी का पब्लिक ऑफर (IPO) अगले वित्त वर्ष में खिसक सकता है. निवेश व लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) के सचिव तुहिन कांत पांडेय ने कहा कि एलआईसी का आईपीओ लाने से पहले का काम चार चरण में चल रहा है.

    2.1 लाख करोड़ के विनिवेश लक्ष्‍य के लिए बिक्री है काफी अहम
    पांडेय ने बताया कि चार चरण में अनुपालन सुनिश्चित करने के लिये परामर्शदाताओं (Advisors) की नियुक्ति, विधायी संशोधन, आंतरिक संपत्ति पर आधारित मूल्यांकन बताने के लिये एलआईसी के सॉफ्टवेयर में बदलाव और एलआईसी के बीमांकिक मूल्यांकन के लिये बीमांकक (Actuator) की नियुक्ति शामिल हैं. सरकार उस कानून को भी बदलना चाहती है, जिसके तहत एलआईसी की स्थापना हुई थी. अगले साल 31 मार्च को समाप्त हो रहे चालू वित्त वर्ष में रिकॉर्ड 2.1 लाख करोड़ रुपये के विनिवेश (Disinvestment) का लक्ष्य पाने के लिये एलआईसी में हिस्सेदारी की बिक्री अहम है.

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    चारों चरण पूरा होने के बाद IPO के आकार पर होगा फैसला


    दीपम के सचिव पांडेय ने कहा कि इन चारों चरणों के पूरा होने के बाद ही एलआईसी में सरकार की बेचे जाने वाली हिस्सेदारी की मात्रा पर फैसला लिया जा सकेगा. उन्‍होंने कहा कि इसके बाद ही आईपीओ को लेकर कोई फैसला होगा. इसी दौरान आईपीओ के आकार पर भी चर्चा होगी. ये सब चारों चरण पूरा होने के बाद ही किया जा सकता है. इसलिए चालू वित्त वर्ष में इन्हें पूरा करने की पूरी कोशिश की जा रही है. हालांकि, मुझे लगता है कि बड़ा मुद्दा होने के कारण आईपीओ पर फैसला होने में समय लगेगा.

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    एसबीआई कैप्‍स और डिलॉयट को नियुक्‍त किया परामर्शदाता
    तुहिन कांत पांडेय ने बताया कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) कैप्स और डिलॉयट को आईपीओ से पहले का परामर्शदाता नियुक्त किया गया है. ये दोनों अनुपालन के मुद्दों की सूची बनाने के लिये एलआईसी के साथ मिलकर काम कर रहे हैं. सचिव ने कहा कि दूसरा हिस्सा विधायी संशोधन है. इसके लिये वित्तीय सेवा विभाग दीपम के साथ मिलकर काम कर रहा है. इस संशोधन के जरिये एलआईसी अधिनियम में जरूरी बदलाव किए जाएंगे, जो आईपीओ लाने की राह आसान बनाएंगे.
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