LIC​ लिस्टिंग से मुनाफा कमाने का सोच रहे तो लग सकता है झटका! ये है कारण

LIC​ लिस्टिंग से मुनाफा कमाने का सोच रहे तो लग सकता है झटका! ये है कारण
टल सकती है एलआईसी लिस्टिंग की डेडलाइन .

चालू वित्त वर्ष में LIC की लिस्टिंग (LIC Listing) और आईडीबीआई बैंक में हिस्सेदारी बेचने का फैसला खटाई में पड़ सकता है. सरकारी बीमा कंपनी के लिए पहले ही कई नियामकीय क्लियरेंस की जरूरत थी, लेकिन अब कोरोना वायरस महामारी ने मुश्किलें और भी बढ़ा दी हैं.

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नई दिल्ली. कोरोना वायरस महामारी की वजह से भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की लिस्टिंग और आईडीबीआई बैंक (IDBI Bank Stake Sale) में हिस्सेदारी बेचने की डेडलाइन मार्च 2021 के आगे बढ़ सकती है. LIC की लिस्टिंग (LIC Listing) से केंद्र सरकार 90,000 करोड़ रुपये की पूंजी जुटाना चाहती है. सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए विनिवेश (Disinvestment Targe FY21) का लक्ष्य 2.10 लाख करोड़ रुपये रखा था, जिसका बड़ा हिस्सा एलआईसी लिस्टिंग और आईडीबीआई में हिस्सेदारी बेचने से आने वाला था.

चालू वित्त वर्ष में खटाई में पड़ सकती है LIC की लिस्टिंग
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (FM Nirmala Sitharaman) ने 1 फरवरी 2020 को वित्त वर्ष 2020-21 के लिए पेश किये बजट में LIC की लि​स्टिंग का ऐलान किया था. सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, मौजूदा परिस्थिति को देखते हुए चालू वित्त वर्ष में LIC लिस्टिंग का काम खटाई में पड़ सकता है.

BPCL की भी बिडिंग डेडलाइन टली



कोविड-19 की वजह से उत्पन्न हुई स्थिति को देखते हुए हाल ही में केंद्र सरकार ने ऑयल मार्केटिंग कंपनी (OMC) भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) के निजीकरण के लिए बिडिंग डेडलाइन को आगे बढ़ा दिया था. अब इसकी अंतिम तारीख एक महीने बढ़कर 31 जुलाई 2020 हो गई है.



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LIC और IDBI बैंक में सरकार की कि​तनी हिस्सेदारी है?
वर्तमान में, LIC में सरकार की 100 फीसदी हिस्सेादारी जबकि IDBI में सरकार की कुल हिस्सेदारी 46.5 फीसदी है. सूत्रों ने बताया कि बाजार की स्थिति सुधरने के बाद भी सरकार द्वारा अब LIC और IDBI Bank में स्टेक डाइल्युशन में कटौती करने की उम्मीद है. ऐसे में कम वैल्युएशन पर स्टेक सेल करना विवेकपूर्ण फैसला नहीं होगा.

लिस्टिंग से पहले कई अड़चनें
वैल्युएशन के अलावा भी LIC की ​लिस्टिंग से पहले की तरह के नियामकीय क्लियरेंस (Regulatory Clearance for LIC) की जरूरत होगी. सबसे महत्वूपर्ण है कि LIC एक्ट (LIC Act.) में संशोधन करना होगा. हालांकि, सरकार द्वारा ऐलान के बाद से ही कहा जा रहा है कि यह कई दशकों में सबसे बड़ी लिस्टिंंग हो सकती है.

भारतीय बीमा बाजार में LIC का वर्चस्व
गौरतलब है कि एलआईसी देश की सबसे बड़ी इंश्योरेंस प्रदाता है और देश के 70 फीसदी बीमा बाजार पर इसका कब्जा है. बीमा पॉलिसी की संख्या के आधार पर एलआईसी के मार्केट शेयर का कुल 76.28 फीसदी है जबकि पहले साल के प्रीमियम के आधार पर एलआईसी की बाजार में कुल हिस्सेदारी 71 फीसदी है.

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13 तिमाही बाद LIC को मुनाफा
LIC की कई सब्सिडियरीज हैं, जिनमें से एक आईडीबीआई बैंक भी हैं. शनिवार को जारी नतीजों के मुताबिक, आईडीबीआई को मार्च (IDBI Bank Results) तिमाही में 135 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ है. बैंक को यह मुनाफा बड़े स्तर पर फंसे कर्ज की रिकवरी की वजह से हुआ है. इसके पहले आईडीबीआई बैंक को पिछले 13 तिमाहियों में खराब नतीजों का सामना करना पड़ रहा था.

आईडीबीआई बैंक पर PCA फ्रेमवर्क लागू
जनवरी 2019 में एलआईसी ने आईडीबीआई बैंक में 51 फीसदी के साथ अधिग्रहण किया था. एलआईसी ने यह अधिग्रहण कुल 21,624 करोड़ रुपये में किया था. फिलहाल ही, आईडीबीआई बैंक पर​ रिज़व बैंक ने पीसीए फ्रेमवर्क लागू किया है. हालांकि, अब बैंक का कहना है कि उसने रिटर्न ऑन एसेट को छोड़कर पीसीए (Prompt Corrective Action) फ्रेमवर्क के अन्य सभी पैरामीटर्स को पूरा कर लिया है.

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