LIC IPO के इंतजार में हैं तो जान लें ये जरूरी बात, मार्च 2021 तक कोई उम्मीद नहीं

भारतीय जीवन बीमा निगम
भारतीय जीवन बीमा निगम

जरूरी तैयारियां नहीं पूरी होने की वजह से चालू वित्त वर्ष में LIC IPO आना मुश्किल है. LIC Act, 1956 में संशोधन भी करना होगा. ऐसे में चालू वित्त वर्ष में सरकार के विनिवेश लक्ष्य को भी झटका लग सकता है. एलआईसी के आईपीओ के जरिए 90 हजार करोड़ रुपये जुटाने की उम्मीद है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 5, 2020, 10:04 AM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. चालू वित्त वर्ष में भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की IPO नहीं आ सकेगी. दरअसल, IPO लाने से पहले की तैयारियों और समय की कमी की वजह से जरूरी औपचारिकताएं नहीं पूरा हो सकेंगी. एक ​मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से इस बारे में जानकारी दी गई है. केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2020-21 के लिए विनिवेश का लक्ष्य (FY21 Disinvestment Target) 2.1 लाख करोड़ रुपये रखा है, जिसका एक बड़ा हिस्साLIC में 10 फीसदी हिस्सेदारी बेचने से आने वाला है. अगर यह मान लें कि BPCL में हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया को 31 मार्च 2021 तक पूरा कर लिया जाता है, तब जाकर विनिवेश का लक्ष्य 1 लाख करोड़ रुपये पहुंच सकेगा.

एलआईसी एक्ट में संशोधन का पेंच
वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (Department of Financial Services) ने एलआईसी एक्ट (LIC Act, 1956) में संशोधन के लिए एक कैबिनेट ड्राफ्त प्रस्तावित किया है. कानूनी रूप से LIC Act में संशोधन के बाद ही इस सरकारी बीमा कंपनी का विनिवेश किया जा सकेगा. LIC की 25 फीसदी हिस्सेदारी अलग-अलग हिस्सों में बेचने की योजना है. ड्राफ्ट नोट के मुताबिक, LIC IPO की साइज 5 से 10 फीसदी के करीब होगी. यह आॅफरिंग के समय में बाजार की स्थिति पर भी निर्भर करेगा.

फाइनेंशियल एक्सप्रेस ने अपनी एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा है कि अगले 6 महीनों में एलआईसी आईपीओ लाना मुमकिन नहीं होगा. क्योंकि इसकी तैयारी का बहुत काम अभी भी बाकी है.
यह भी पढ़ें: आज होगी GST Council की 42वीं बैठक, राज्यों की क्षतिपूर्ति समेत इन मुद्दों पर चर्चा के आसार



LIC को कंपनी एक्ट के अनुरुप करने के बाद ही IPO
आमतौर पर आईपीओ की तैयारी में करीब 6 से 9 महीने लगते है. इसके बाद आईपीओ को बाजार में उतारा जाता है. एलआईसी के मामले में मौजूदा महामारी के अलावा, एलआईसी एक्ट, 1956 में संशोधन करने की आवश्यकता है ताकि कंपनी एक्ट के तहत इसे म्यूचुअल स्ट्रक्चर को खत्म कर कॉरपोरेट बॉडी के तौर पर तैयार किया जाए. म्यूचुअल स्ट्रक्चर के तहत एलआईसी की मालिकाना हक पॉलिसीधारकों का ही माना जाता है.

ज्वाइंट बुक कंपनी के तौर काम करेगी एलआईसी
वर्तमान में, एलआईसी अपने सरप्लस का 95 फीसदी हिस्सा पॉलिसीधारकों को देती है और शेष 5 फीसदी केंद्र सरकार के पास जाता है. अब इसे बदलना होगा. एलआईसी को अब ज्वाइंट स्टॉक कंपनी (Joint Stock Company) के तौर पर सभी के साथ मुनाफा शेयर करना होगा. इसी प्रकार, अकाउंट्स बुक को भी कंपनी एक्ट के तौर पर बनाना होगा. संभव है कि इस साल दिसंबर महीने के सत्र में एलआईसी एक्ट संशोधन संबंधित बिल को संसद में पेश किया जाए.

यह भी पढ़ें: Fixed Deposit के जरिए भी होगी रेगुलर इनकम, बस अपनाएं ये ट्रिक

एलआईसी आईपीओ से 90 हजार करोड़ रुपये जुटाने की उम्मीद
माना जा रहा है कि एलआईसी वैल्यूएशन करीब 8 से 11.5 लाख करोड़ रुपये है. ऐसे में आईपीओ के जरिए 10 फीसदी हिस्सेदारी बेचने से सरकार को 80,000 से 1,10,000 करोड़ रुपये प्राप्त हो सकते हैं. हाल ही में आरबीएसए एडवाइजर्स नाम की प्राइवेट वैल्युऐशन फर्म ने अनुमान लगाया है कि एलआईसी की कुल वैल्युएशन 9.9-11.5 लाख करोड़ रुपये की है. केंद्र ने आईपीओ के जरिए 90 हजार करोड़ रुपये जुटाने की उम्मीद की है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज