LIC Nivesh Plus scheme: कम पैसों में करें बड़ा निवेश, जानिए इस पॉलिसी के बारे में सबकुछ

रोजाना 28 रुपये खर्च कर मिलेंगे 6 फायदे
रोजाना 28 रुपये खर्च कर मिलेंगे 6 फायदे

एलआईसी निवेश प्लस (LIC Nivesh Plus) सिंगल प्रीमियम, नॉन पार्टिसिपेटिंग, यूनिट-लिंक्ड और व्यक्तिगत जीवन बीमा है, जो पॉलिसी की अवधि के दौरान बीमा के साथ निवेश का भी विकल्प देता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 12, 2020, 5:58 AM IST
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नई दिल्ली. अगर आप कहीं निवेश (Investment) करने का प्लान कर रहे हैं और मन में ये दुविधा है कि कैसे और कहां निवेश करें. तो हम आपको बताते हैं कि भारतीय जीवन बीमा निगम (Life Insurance Corporation) की एक स्कीम है, जहां कम निवेश कर आप अच्छा लाभ कमा सकते हैं. दरअसल, एलआईसी निवेश प्लस (LIC Nivesh Plus) सिंगल प्रीमियम, नॉन पार्टिसिपेटिंग, यूनिट-लिंक्ड और व्यक्तिगत जीवन बीमा है, जो पॉलिसी की अवधि के दौरान बीमा के साथ निवेश का भी विकल्प देता है.

सम एश्योर्ड चुनने की सुविधा
आप इस योजना को ऑफलाइन के साथ-साथ ऑनलाइन भी खरीद सकते हैं. पॉलिसी लेने वाले को बेसिक सम एश्योर्ड चुनने की भी सुविधा है. सम एश्योर्ड के विकल्प सिंगल प्रीमियम के 1.25 गुना या सिंगल प्रीमियम के 10 गुना हैं.

एलिजिबिलिटी
एलआईसी निवेश प्लस स्कीम के लिए न्यूनतम प्रवेश आयु 90 दिन से 70 साल है.



टेन्योर और प्रीमियम लिमिट
पॉलिसी का टेन्योर 10 से 35 साल है और लॉक-इन पीरियड 5 साल है. प्रीमियम पर मिनिमम लिमिट 1 लाख रुपये है, जबकि मैक्सिमम लिमिट नहीं है. अधिकतम मैच्योरिटी आयु 85 साल की है.

मैच्योरिटी बेनिफिट
यदि पॉलिसीहोल्डर पॉलिसी टर्म तक जिंदा रहता है, तो उसे मैच्योरिटी बेनिफिट प्राप्त होता है, जो यूनिट फंड मूल्य के बराबर होता है. पॉलिसी अवधि समाप्त होने के बाद यह देय होता है.

फ्री-लुक पीरियड
कंपनी फ्री-लुक पीरियड अपने ग्राहक को देती है. इस दौरान ग्राहक पॉलिसी को वापस कर सकते हैं. यदि कंपनी से पॉलिसी सीधे खरीदी जाती है तो 15 दिन और ऑनलाइन खरीदी जाती है तो 30 दिन की फ्री-लुक पीरियड लागू होती है.

डेथ बेनिफिट
यदि पॉलिसी अवधि के दौरान बीमाधारक की मृत्यु हो जाती है, तो नॉमिनी डेथ बेनिफिट प्राप्त करने का हकदार है. यदि पॉलिसीधारक जोखिम शुरू होने की तारीख से पहले मर जाता है तो यूनिट फंड वैल्यू के बराबर राशि देय होती है.

पार्शियल विदड्रॉअल
एलआईसी निवेश प्लस प्लान में कंपनी ग्राहकों को 6वीं पॉलिसी वर्ष के बाद आंशिक निकासी करने की अनुमति देती है. नाबालिगों के मामले में 18 वर्ष की आयु के बाद आंशिक निकासी की अनुमति मिलती है.
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