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Investment Tips: टीम इंडिया की तरह आप भी ना करें अपने पोर्टफोलियो में ये गलतियां? वरना होता रहेगा नुकसान

 अपने निवेश को अलग अलग सेक्टर में विभाजित कर अच्छी कंपनियों पर दांव लगाएं.

अपने निवेश को अलग अलग सेक्टर में विभाजित कर अच्छी कंपनियों पर दांव लगाएं.

अगर आप बिना किसी रणनीति और दूसरों की गलतियों से सीखे बगैर निवेश या ट्रेडिंग का जोखिम लेंगे तो आपको काफी मुश्किल होगी. आ ...अधिक पढ़ें

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मुंबई. एशिया कप से टीम इंडिया बाहर हो चुकी है लेकिन क्रिकेट मैच में हुई गलतियों से आप भी अपनी फाइनेंशियल लाइफ के सबक ले सकते हैं. जैसा कहा भी गया है कि सबसे बुद्धिमान व्यक्ति वह होता है जो दूसरों की गलतियों से सीखता है.

अब देखिए ना, पेपर पर दुनिया की सबसे मजबूत टीम इंडिया इस कदर एशिया कप से बाहर होगी किसी ने सोचा भी नहीं था ठीक ऐसे ही अगर आप बिना किसी रणनीति और दूसरों की गलतियों से सीखे बगैर निवेश या ट्रेडिंग का जोखिम लेंगे तो आपको काफी मुश्किल होगी. आज हम ऐसी पांच बड़ी गलतियों की तरफ इशारा करेंगे जो टीम इंडिया ने एशिया कप में की और अक्सर ऐसी ही गलतियां निवेशक या ट्रेडर्स जल्दबाजी में करते हैं.

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1.भावनाओं पर काबू रखना
अक्सर कहा जाता है कि बाज़ार के जोखिम में 90 प्रतिशत आपकी साइकोलॉजी काम करती है और 10 प्रतिशत आपकी स्किल होती हैं. टीम इंडिया ने जब पाकिस्तान के खिलाफ पहला मैच जीता तो सबने खुशियां मनाई लेकिन पाकिस्तान के खिलाफ अगले ही मैच में टीम इंडिया पूरी तरह परास्त हो गई. टीम इंडिया का ओवर कॉन्फिडेंस और पाकिस्तान की बल्लेबाजी को कम आंकना भारी पड़ा. इसलिए मार्केट में भी कहा जाता है कि जरूरत से ज्यादा बुलिश होना भी मार्केट में नुकसान देता है. ग्लोबल संकेतों और इकोनॉमी के माइक्रो आंकड़ों को नज़रअंदाज़ कर अगर आप सिर्फ भावनाओं के आधार पर निवेश या ट्रेडिंग करेंगे तो आपको भी नुकसान उठान पड़ सकता है.

2.केवल एक सेक्टर पर फोकस ना करे
क्रिकेट की तरह शेयर मार्केट भी सेक्टरों से मिलकर बना है. एशिया कप में टीम इंडिया की मजबूती उसकी बैटिंग थी लेकिन मोहम्मद शमी और दीपक चाहर जैसे बॉलरों की कमी उसे हमेशा खलती रही. भुवनेश्वर कुमार औऱ अर्शदीप पेस को कायम नहीं रख पाए. ठीक इसी तरह अगर आप निवेश कर रहे हैं तो केवल एक सेक्टर पर फोकस ना करें. अपने निवेश को अलग अलग सेक्टर में विभाजित कर अच्छी कंपनियों पर दांव लगाएं.

इस बात को उदाहरण के तौर पर समझिए कोविड के दौरान फार्मा और केमिकल सेक्टर बूम पर था लेकिन अब बैकिंग औऱ मेटल सेक्टर बूम पर है.

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3.ऑलराउंडर कंपनियों पर ज्यादा फोकस
जब हम शेयरों का चुनाव करते हैं तो एक बात फोकस ज्यादा होता है और वो है क्वार्टर दर कर्वाटर कंपनी की आय. ठीक ऐसे ही क्रिकेट में ऑलराउंडर खिलाड़ियों पर दारोमदार होता है. एशिया कप के लिए बढ़िया टीम का चयन जरूरी था. आवेश खान और जसप्रीत बुमराह के बाद दीपक चाहर पर दांव लगाना फायदे का सौदा हो सकता था. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. चाहर बाहर बैठे रह गए .भारतीय गेंदबाजी पूरे टूर्नामेंट में फिसड्डी साबित हुई. विपक्षी टीम 180 रनों का टारगेट भी आसानी से हासिल कर रही थी.

4.पोर्टफोलियों की रिबेलेंसिंग 
जब हम अपने पोर्टफोलियों में से एक शेयर को बेचते हैं तो दूसरे को खरीदते हैं. क्योंकि हमें लगता है कि इस शेयर में अब वो दम नहीं है जो पहले था. लेकिन जिस शेयर पर हम दांव लगाते हैं उसके फंडामेंटल भी मजबूत होने चाहिए. पूरे टूर्नामेंट में धोनी की कमी महसूस होती रही. विकटों के पीछे धोनी जैसी तेजी आज भी टीम इंडिया में महसूस हो रही है. शायद ऋषभ पंत धोनी की जगह को पूरी तरह भर नहीं पाए हैं यही वजह है कि पाकिस्तान के खिलाफ मैच में ऋषभ की बैटिंग में धोनी जैसी चपलता नजर नहीं आई. कुछ आलोचकों का कहना था कि पंत की जगह अगर दिनेश कार्तिक को जगह मिलती तो परिणाम बेहतर होता.

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5.एक जैसे शेयरों का चयन
एशिया कप में भारतीय टीम दो लैग स्पीनर को खिला रही थी. ये ठीक ऐसे ही जैसे एक ही सेक्टर के दो एक जैसी कंपनियों को अपने पोर्टफोलियों में रखना. टीम इंडिया ने दीपक हुड्डा और यजुवेंद्र चहल दोनों लैग स्पीनरों को खिलाया जबकि टीम को अच्छे ऑफ स्पीनर की जरूरत थी. एक जैसी कंपनियों के शेयर खरीदने रखने के बाद मोमेंटम की उम्मीद करना बेमानी होती है. पोर्टफोलियों को डाइवर्सीफाइ रखें. आपके पास अलग-अलग कंपनी के शेयरों हो जिनके फंडामेंटल मजबूत हो. एक ही सेक्टर की कंपनी कई बार आपको रिस्क और रिवार्ड रेश्यों को बिगाड़ सकती हैं. अगर एक सेक्टर में मंदी आ गई तो आपका पोर्टफोलियों भी मंदी की चपेट में आ जाएगा.

Tags: Investment tips, Stock Markets, Stock return, Stock tips, Stocks

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